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बौद्ध अनुयायियों ने निकाली प्रभातफेरी

Mon, 14 Oct 2019 11:30 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Oct 2019 11:30 PM IST
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Buddhist followers removed Prabhatferi
बौद्ध तपोस्थली में राष्ट्रीय बौद्ध महासभा के कार्यकर्ताओं ने निकाला रैली। - फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। राष्ट्रीय बौद्ध महासभा द्वारा बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में तीन दिवसीय सामाजिक एवं धम्म क्रांति के पथ प्रदर्शक का राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ। भारत-नेपाल मैत्री बुद्ध विहार श्रावस्ती में आयोजित यह अधिवेशन सोमवार को हुआ। कार्यक्रम के अंतिम दिन प्रभातफेरी भी निकाली गई। जिसकी अध्यक्षता बौद्ध भिक्षु संघानंद ने किया।
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कार्यक्रम के अंतिम दिन सोमवार को राष्ट्रीय बुद्ध महासभा के अध्यक्ष धर्म प्रकाश भारती ने कहा कि संत न होते जगत में तो जल मरता संसार। मध्ययुग में भारतीय समाज की हालत बहुत दयनीय थी। उस समय यहां सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक अशांति थी। दो भिन्न संस्कृतियों के मनुष्य हिंदू और मुसलमान के नाम पर हमेशा आपस में लड़ते-झगड़ते रहते थे। साथ ही यहां जाति-पात व ऊंच-नीच का बोलबाला था।
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इससे मानव समाज का ढांचा छिन्न-भिन्न हो रहा था। हिंदुओं में ब्राह्मण व पंडित और मुसलमानों में मुल्ला और मौलवी जनसामान्य की सच्ची धार्मिक आवश्यकताओं की पूरी तरह से उपेक्षा कर रहे थे। उन्होंने यहां पर कर्मकांड का जाल फैला रखा था। उनकी भावनाएं एवं विचार गरीबों के प्रति अशुद्ध थी।
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आपसी प्रेम तथा भक्तिभाव का लोप हो चुका था। स्थिति यह थी कि धर्माचारी ही जनता का सबसे ज्यादा शोषण कर रहे थे। ऐसे में जनता को एक व्यापक सामाजिक धार्मिक आंदोलन की तीव्र आवश्यकता महसूस होने लगी थी।
उन्होंने कहा कि भक्ति आंदोलन इसी जरूरत की वजह से पैदा हुआ और उसका इतना व्यापक फैलाव हुआ। उस समय जिन समाज सुधारक संतों ने परंपरागत जातिवाद के बंधनों को तोड़ने के लिए सामंतवाद और रूढ़िवाद का डटकर मुकाबला किया।
उनमें रविदास, कबीर, नामदेव, गुरुनानक आदि ऐसे निर्भी संत हुए जिन्हें क्रांतिकारी और समाज के सच्चे पथ प्रदर्शक कह सकते हैं। इन सभी संतों ने अत्यंत दृढ़ता से कहा, धर्म किसी की पैतृक संपत्ति नहीं हो सकता। ईश्वर पर किसी जाति का एकाधिकार नहीं हो सकता। वह सबका समान रूप से है। सभी मोक्ष के अधिकारी हैं।

सभी ज्ञान और योग के साधक हो सकते हैं। सभी मानव एक ही मार्ग से आते और जाते हैं। संतों ने दलित और शूद समझी जाने वाली जातियों के उद्धार के लिए अनेक साखियों की रचना की। उन्होंने अपनी वाणी को जनता की भाषा के माध्यम से आम लोगों तक पहुँचाया। कार्यक्रम के समापन पर बौद्ध तपोस्थली में प्रभातफेरी निकाली गई। जिसमें शामिल लोगों ने आनंद बोधि पर मत्था टेक विश्व कल्याण के लिए प्रार्थना किया। इस मौके पर भूपेंद्र पाल सिंह, धर्मेंद्र सिंह, मुकेश चंद्र मौजूद रहे।
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