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बुद्ध ने दी अतिवादी व्यवहार से बचने की नसीहत : देवानंद

Wed, 03 Dec 2025 12:44 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 03 Dec 2025 12:44 AM IST
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Buddha advised us to avoid extreme behaviour: Dev Anand
गंध कुटी में पूजा करते थाइलैंड के अनुयायी। - फोटो : गंध कुटी में पूजा करते थाइलैंड के अनुयायी।
कटरा(श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती मंगलवार को थाईलैड से आए अनुयायियों के 80 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से बोधि वृक्ष का दर्शन-पूजन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
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बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने बताया कि भगवान बुद्ध के दर्शन का दूसरा प्रमुख विचार मध्यम मार्ग के नाम से जाना जाता है। सूक्ष्म दार्शनिक स्तर पर तो इसका अर्थ कुछ भिन्न है लेकिन लौकिकता के स्तर पर इसका अभिप्राय अतिवादी व्यवहार से बचने से है। तीसरा प्रमुख विचार संवेदनशीलता है, जो दूसरों के दुखों को अनुभव करने की क्षमता से संबंधित है। वर्तमान में इसी को मनोविज्ञान समानुभूति कहता है। बुद्ध दर्शन का चौथा प्रमुख विचार परलोकवाद की बजाए इहलोकवाद पर अधिक बल देने वाला है। बुद्ध के समय प्रचलित दर्शनों में चार्वाक के अलावा लगभग सभी दर्शन परलोक पर अधिक ध्यान दे रहे थे। उनके विचारों का सार यह था कि इहलोक मिथ्या है और परलोक ही वास्तविक सत्य है जिसके चलते निरर्थक आयोजनों को बढ़ावा मिलता था।
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