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भाजपा व सपा उम्मीदवारों ने खरीदा पर्चा
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श्रावस्ती। जिला पंचायत अध्यक्ष को लेकर जिले में सियासत तेज हो गई। शुक्रवार को भाजपा व सपा समर्थित उम्मीदवारों ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन पत्र लिया। इसी के साथ निर्दल के रूप में सामने आने वाले प्रत्याशी ने भाजपा संगठन से वार्ता के बाद मैदान छोड़ दिया है। अब आज शनिवार होने वाले नामांकन के बाद शाम तीन बजे यह फैसला होगा कि चुनाव निर्विरोध होगा या फिर तीन जुलाई को इसके लिए मतदान होगा।
जिला पंचायत अध्यक्ष को लेकर जिले में सियासत कई दिनों से पल पल में रंग बदल रही है। पहले जहां भाजपा की ओर से उम्मीदवारी को लेकर पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री दद्दन मिश्र व युवा नेता के रूप में उभरे देव प्रताप के बीच चल रहा संघर्ष दद्दन मिश्र के टिकट फाइनल होने के बाद समाप्त हो गया था। वहीं देव प्रताप सिंह ने पहले निर्दल ही अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। यही नहीं वह नामांकन पत्र लेने के लिए गुरुवार व शुक्रवार को निर्वाचन कार्यालय पर डटे भी रहे। लेकिन इसी बीच भाजपा संगठन की ओर से हुई बैठक में उन्हें कई बिंदुओं पर आश्वस्त करते हुए पार्टी प्रत्याशी का समर्थन करने के लिए मना लिया गया। इसी के साथ ही देव प्रताप ने अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी वापस ले ली। लेकिन इसके बाद भी भाजपा उम्मीदवार के रास्ते का कांटा अभी समाप्त नहीं हुआ।
समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी घोषित अनुराधा यादव ने शुक्रवार को नामांकन पत्र खरीद कर अपनी दावेदारी की घोषणा की है। अनुराधा यादव ने न केवल नामांकन पत्र लिया, बल्कि सपा समर्थित सदस्यों के साथ बैठक की। ऐसे में सपा व भाजपा के उम्मीदवार अब आमने सामने हैं। लेकिन इसका फैसला शनिवार शाम तीन बजे उस समय होगा जब नामांकन दाखिल करने की अंतिम समय सीमा बीत जाएगी। इसी के बाद यह स्पष्ट हो पाएगा कि डीडीसी अध्यक्ष पद पर चुनाव भाजपा के पक्ष में निर्विरोध होगा या फिर समाजवादी पार्टी के विरोध का उन्हें सामना करना होगा।
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भाजपा के कैंप में चहल पहल तो विपक्ष में सन्नाटा
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भले ही समाजवादी पार्टी की ओर से घोषित अनुराधा यादव ने अपना पर्चा खरीदा हो। लेकिन उनके कैंप में शुक्रवार को सन्नाटा ही दिखाई दिया। पर्चा खरीदने के बाद कुछ एक जिला पंचायत सदस्य ही उनके साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे। जहां आगे की रणनीति पर विचार हुआ। वहीं दूसरी ओर भाजपा के कैंप में दिन भर गहमागहमी की स्थिति रही। करीब सोलह जिला पंचायत सदस्य सत्ता पक्ष के खेमे में बैठे दिखाई दिए। जानकारों का दावा है कि विपक्ष के भी कई सदस्य लगातार भाजपा प्रत्याशी के संपर्क में बने हुए हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि यदि चुनाव की भी स्थिति आई तो भाजपा लगभग 90 फीसदी सदस्यों के साथ अपनी जीत दर्ज करेगी।
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जिला पंचायत अध्यक्ष को लेकर जिले में सियासत कई दिनों से पल पल में रंग बदल रही है। पहले जहां भाजपा की ओर से उम्मीदवारी को लेकर पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री दद्दन मिश्र व युवा नेता के रूप में उभरे देव प्रताप के बीच चल रहा संघर्ष दद्दन मिश्र के टिकट फाइनल होने के बाद समाप्त हो गया था। वहीं देव प्रताप सिंह ने पहले निर्दल ही अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। यही नहीं वह नामांकन पत्र लेने के लिए गुरुवार व शुक्रवार को निर्वाचन कार्यालय पर डटे भी रहे। लेकिन इसी बीच भाजपा संगठन की ओर से हुई बैठक में उन्हें कई बिंदुओं पर आश्वस्त करते हुए पार्टी प्रत्याशी का समर्थन करने के लिए मना लिया गया। इसी के साथ ही देव प्रताप ने अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी वापस ले ली। लेकिन इसके बाद भी भाजपा उम्मीदवार के रास्ते का कांटा अभी समाप्त नहीं हुआ।
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समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी घोषित अनुराधा यादव ने शुक्रवार को नामांकन पत्र खरीद कर अपनी दावेदारी की घोषणा की है। अनुराधा यादव ने न केवल नामांकन पत्र लिया, बल्कि सपा समर्थित सदस्यों के साथ बैठक की। ऐसे में सपा व भाजपा के उम्मीदवार अब आमने सामने हैं। लेकिन इसका फैसला शनिवार शाम तीन बजे उस समय होगा जब नामांकन दाखिल करने की अंतिम समय सीमा बीत जाएगी। इसी के बाद यह स्पष्ट हो पाएगा कि डीडीसी अध्यक्ष पद पर चुनाव भाजपा के पक्ष में निर्विरोध होगा या फिर समाजवादी पार्टी के विरोध का उन्हें सामना करना होगा।
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भाजपा के कैंप में चहल पहल तो विपक्ष में सन्नाटा
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भले ही समाजवादी पार्टी की ओर से घोषित अनुराधा यादव ने अपना पर्चा खरीदा हो। लेकिन उनके कैंप में शुक्रवार को सन्नाटा ही दिखाई दिया। पर्चा खरीदने के बाद कुछ एक जिला पंचायत सदस्य ही उनके साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे। जहां आगे की रणनीति पर विचार हुआ। वहीं दूसरी ओर भाजपा के कैंप में दिन भर गहमागहमी की स्थिति रही। करीब सोलह जिला पंचायत सदस्य सत्ता पक्ष के खेमे में बैठे दिखाई दिए। जानकारों का दावा है कि विपक्ष के भी कई सदस्य लगातार भाजपा प्रत्याशी के संपर्क में बने हुए हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि यदि चुनाव की भी स्थिति आई तो भाजपा लगभग 90 फीसदी सदस्यों के साथ अपनी जीत दर्ज करेगी।