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आवागमन की समस्या तराई में बनेगी अहम चुनावी म़ुद्दा
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श्रावस्ती। हर बार चुनावी जंग में जीत हासिल करने की होड़ में जुटने वाले सभी छोटे बड़े नेता क्षेत्रीय स्तर पर कराए जाने वाले विकास कार्यों के बड़े बड़े दावे करते हैं। जमीनी हकीकत यह है कि तराई की सूरत आज भी न तो बदली और न ही संवरी। इसके चलते ही आवागमन की समस्या इस पूरे इलाके में एक बार फिर से अहम चुनावी मुद्दा बनेगी। सूर्यास्त के बाद नेपाल सीमा से सटे सिरसिया विकास क्षेत्र के गांवों के लोगों को आवागमन के लिए अभी भी कोई संसाधन मुहैया नहीं हो पाता।
प्रदेश में चाहे कांग्रेस की सरकार रही हो चाहे भाजपा, सपा अथवा बसपा। जब जिस दल की सरकार प्रदेश की सत्ता में आई तब तब तराई वासियों द्वारा चुना गया प्रतिनिधि सत्तापक्ष का ही रहा। इसके बावजूद न तो सरकार और न ही चुने गए जनप्रतिनिधि की ओर से कभी भी इस क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर कराने की दिशा में कोई ठोस कार्य हुआ। इसी उपेक्षा के चलते सीमावर्ती सिरसिया विकास क्षेत्र आज भी विकास की दौड़ में बहुत पीछे है। पूरा क्षेत्र दक्षिण तरफ भिनगा जंगल तो पश्चिम तरफ ककरदरी व उत्तर तरफ पश्चिमी सोहेलवा एवं पूर्वी तरफ पूर्वी सोहेलवा जंगल सहित नेपाल के पहाड़ों के मध्य स्थित है। 86 ग्राम पंचायतों वाले इस विकास क्षेत्र को नेपाल के पहाड़ी नाले कई खंडों में बांटते हैं। सीमा सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस विकास क्षेत्र में आवागमन के संसाधनों का टोटा है।
सिरसिया से बलरामपुर जाने वाली आखिरी बस शाम साढ़े चार बजे चली जाती है। जबकि भिनगा व बहराइच के लिए सिरसिया, तालबघौड़ा व लक्ष्मनपुर बाजार से आखिरी बस शाम साढ़े छह बजे चली जाती है। यही स्थिति जमुनहा बाजार की भी है जहां से शाम छह बजे के बाद बहराइच व अन्य क्षेत्रों में जाने के लिए कोई बस नहीं है। ऐसे में तराईवासियों को सूर्यास्त के बाद कहीं आने जाने के लिए भोर का इंतजार करना पड़ता है। समस्या से निजात के लिए क्षेत्रवासियों द्वारा क्षेत्रीय विधायक व सांसद सहित दो बार सिरसिया के मोतीपुर कला आए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित सरकार के अन्य जिम्मेदारों तक प्रमुखता के साथ इस परेशानी को दूर कराए जाने की मांग उठायी गयी लेकिन इस समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। ऐसे में आवागमन की सुविधा न मिल पाने से परेशान तराई वासियों ने इस बार विधानसभा चुनाव में इसे अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने का फैसला किया है। लोगों का कहना है कि जो इस बार भिनगा में परिवहन डिपो व सिरसिया में बस अड्डा स्थापित कराने की गारंटी देगा उसी के पक्ष में क्षेत्र का वोटर रहेगा।
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प्रदेश में चाहे कांग्रेस की सरकार रही हो चाहे भाजपा, सपा अथवा बसपा। जब जिस दल की सरकार प्रदेश की सत्ता में आई तब तब तराई वासियों द्वारा चुना गया प्रतिनिधि सत्तापक्ष का ही रहा। इसके बावजूद न तो सरकार और न ही चुने गए जनप्रतिनिधि की ओर से कभी भी इस क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर कराने की दिशा में कोई ठोस कार्य हुआ। इसी उपेक्षा के चलते सीमावर्ती सिरसिया विकास क्षेत्र आज भी विकास की दौड़ में बहुत पीछे है। पूरा क्षेत्र दक्षिण तरफ भिनगा जंगल तो पश्चिम तरफ ककरदरी व उत्तर तरफ पश्चिमी सोहेलवा एवं पूर्वी तरफ पूर्वी सोहेलवा जंगल सहित नेपाल के पहाड़ों के मध्य स्थित है। 86 ग्राम पंचायतों वाले इस विकास क्षेत्र को नेपाल के पहाड़ी नाले कई खंडों में बांटते हैं। सीमा सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस विकास क्षेत्र में आवागमन के संसाधनों का टोटा है।
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सिरसिया से बलरामपुर जाने वाली आखिरी बस शाम साढ़े चार बजे चली जाती है। जबकि भिनगा व बहराइच के लिए सिरसिया, तालबघौड़ा व लक्ष्मनपुर बाजार से आखिरी बस शाम साढ़े छह बजे चली जाती है। यही स्थिति जमुनहा बाजार की भी है जहां से शाम छह बजे के बाद बहराइच व अन्य क्षेत्रों में जाने के लिए कोई बस नहीं है। ऐसे में तराईवासियों को सूर्यास्त के बाद कहीं आने जाने के लिए भोर का इंतजार करना पड़ता है। समस्या से निजात के लिए क्षेत्रवासियों द्वारा क्षेत्रीय विधायक व सांसद सहित दो बार सिरसिया के मोतीपुर कला आए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित सरकार के अन्य जिम्मेदारों तक प्रमुखता के साथ इस परेशानी को दूर कराए जाने की मांग उठायी गयी लेकिन इस समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। ऐसे में आवागमन की सुविधा न मिल पाने से परेशान तराई वासियों ने इस बार विधानसभा चुनाव में इसे अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने का फैसला किया है। लोगों का कहना है कि जो इस बार भिनगा में परिवहन डिपो व सिरसिया में बस अड्डा स्थापित कराने की गारंटी देगा उसी के पक्ष में क्षेत्र का वोटर रहेगा।
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