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प्रधानमंत्री करेंगे सरयू नहर परियोजना का लोकार्पण
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श्रावस्ती। आजाद भारत की अब तक की सबसे बड़ी परियोजना को प्रधानमंत्री राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इसके लिए श्रावस्ती सहित मंडल के सभी जिलों में कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है। कार्यक्रम की समीक्षा के लिए गुरुवार को जलशक्ति मंत्री उत्तर प्रदेश सहित मंडल के अन्य जिलों का दौरा करेंगे। इस दौरान वह तैयारी की भी समीक्षा करेंगे।
आजाद भारत में 78.68 करोड़ की लागत से 1978 में दो जिलों में सिंचाई के लिए राज्य सरकार ने एक परियोजना प्रारंभ की थी। यह परियोजना 1982 में इतनी विशाल हो गई कि नौ जिले इससे जुड़ गए। धीरे धीरे इसका नाम परिवर्तित होते हुए सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना कर दिया गया। नाम परिवर्तन के साथ इसकी लागत भी पुनरीक्षित हो गई। प्रारंभ में 78.68 करोड़ की लागत बढ़कर 2021 तक 9802.68 करोड़ रुपये हो गई। सिंचाई क्षमता भी 3.12 लाख हेक्टेअर से बढ़कर 14.04 लाख हेक्टेअर हो गई। यह परियोजना अब बनकर तैयार हो गई है। बस इसे प्रधानमंत्री को राष्ट्र को समर्पित करना है। इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय ने किसी औपचारिक तिथि की घोषणा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि 18 दिसंबर को प्रधानमंत्री इस परियोजना का लोकार्पण कर सकते हैं। इसके लिए श्रावस्ती सहित मंडल के चारों जिलों में तैयारी चल रही है।
श्रावस्ती के अवधूत नगर में लगभग 150 हेक्टअर भूमि किसानों की सहमति के आधार पर ली गई है। इन किसानों को तीन क्विंटल प्रति बीघा की दर से धनराशि दी गई है। मंडल के किसी भी जिले में प्रधानमंत्री का कार्यक्रम लग सकता है। इसको देखते हुए गुरुवार को जलशक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह मंडल भ्रमण पर आ रहे हैं। वह दोपहर बारह बजे बलरामपुर पहुंचेंगे जहां मंडलायुक्त व डीआईजी सहित डीएम, एसपी सहित जनप्रतिनिधियों व जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम के संबंध में बैठक करेंगे। इसके बाद शाम साढ़े चार बजे भिनगा पहुंचेंगे जहां निरीक्षण भवन में डीएम, एसपी, जनप्रतिनिधियों व जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद शाम 5:45 बजे कलेक्ट्रेट में प्रेसवार्ता व छह बजे स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद वह बहराइच जाएंगे।
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परियोजना 1978 में लैफ्ट बैंक घाघरा कैनाल परियोजना की लागत 78.68 करोड़ रुपये स्वीकृत हुई थी। इसके माध्यम से बहराइच व गोंडा के 3.12 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य था। वर्ष 1982-83 में परियोजना को परिमार्जित करते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश के बहराइच, गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीर नगर, गोरखपुर व महराजगंज में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरयू नहर परियोजना का गठन किया गया। इस परियोजना से 14.04 लाख हेक्टेअर सिंचाई क्षमता के सृजन का लक्ष्य है। इसके सापेक्ष 31 अक्टूबर, 2021 तक 12.61 लाख हेक्टेअर सिंचाई क्षमता सृजित की जा चुकी है। शेष 1.42 लाख हेक्टेअर सिंचाई क्षमता माइक्रो इरीगेशन पद्धति से प्रस्तावित है।
सरयू नहर परियोजना के लिए घाघरा, राप्ती, बाणगंगा, सरयू व रोहिणी नदी को आपस में जोड़ा गया है। इस परियोजना की पुनरीक्षित लागत 9802.68 करोड़ रुपये है। परियोजना पर मार्च, 2021 तक 9562.68 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इस परियोजना के लिए 25027.72 हेक्टेअर भूमि की आवश्यकता थी। इसके सापेक्ष 25021.497 हेक्टेअर भूमि विभाग ने पहले ही खरीद ली है।
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आजाद भारत में 78.68 करोड़ की लागत से 1978 में दो जिलों में सिंचाई के लिए राज्य सरकार ने एक परियोजना प्रारंभ की थी। यह परियोजना 1982 में इतनी विशाल हो गई कि नौ जिले इससे जुड़ गए। धीरे धीरे इसका नाम परिवर्तित होते हुए सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना कर दिया गया। नाम परिवर्तन के साथ इसकी लागत भी पुनरीक्षित हो गई। प्रारंभ में 78.68 करोड़ की लागत बढ़कर 2021 तक 9802.68 करोड़ रुपये हो गई। सिंचाई क्षमता भी 3.12 लाख हेक्टेअर से बढ़कर 14.04 लाख हेक्टेअर हो गई। यह परियोजना अब बनकर तैयार हो गई है। बस इसे प्रधानमंत्री को राष्ट्र को समर्पित करना है। इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय ने किसी औपचारिक तिथि की घोषणा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि 18 दिसंबर को प्रधानमंत्री इस परियोजना का लोकार्पण कर सकते हैं। इसके लिए श्रावस्ती सहित मंडल के चारों जिलों में तैयारी चल रही है।
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श्रावस्ती के अवधूत नगर में लगभग 150 हेक्टअर भूमि किसानों की सहमति के आधार पर ली गई है। इन किसानों को तीन क्विंटल प्रति बीघा की दर से धनराशि दी गई है। मंडल के किसी भी जिले में प्रधानमंत्री का कार्यक्रम लग सकता है। इसको देखते हुए गुरुवार को जलशक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह मंडल भ्रमण पर आ रहे हैं। वह दोपहर बारह बजे बलरामपुर पहुंचेंगे जहां मंडलायुक्त व डीआईजी सहित डीएम, एसपी सहित जनप्रतिनिधियों व जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम के संबंध में बैठक करेंगे। इसके बाद शाम साढ़े चार बजे भिनगा पहुंचेंगे जहां निरीक्षण भवन में डीएम, एसपी, जनप्रतिनिधियों व जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद शाम 5:45 बजे कलेक्ट्रेट में प्रेसवार्ता व छह बजे स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद वह बहराइच जाएंगे।
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परियोजना 1978 में लैफ्ट बैंक घाघरा कैनाल परियोजना की लागत 78.68 करोड़ रुपये स्वीकृत हुई थी। इसके माध्यम से बहराइच व गोंडा के 3.12 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य था। वर्ष 1982-83 में परियोजना को परिमार्जित करते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश के बहराइच, गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीर नगर, गोरखपुर व महराजगंज में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरयू नहर परियोजना का गठन किया गया। इस परियोजना से 14.04 लाख हेक्टेअर सिंचाई क्षमता के सृजन का लक्ष्य है। इसके सापेक्ष 31 अक्टूबर, 2021 तक 12.61 लाख हेक्टेअर सिंचाई क्षमता सृजित की जा चुकी है। शेष 1.42 लाख हेक्टेअर सिंचाई क्षमता माइक्रो इरीगेशन पद्धति से प्रस्तावित है।
सरयू नहर परियोजना के लिए घाघरा, राप्ती, बाणगंगा, सरयू व रोहिणी नदी को आपस में जोड़ा गया है। इस परियोजना की पुनरीक्षित लागत 9802.68 करोड़ रुपये है। परियोजना पर मार्च, 2021 तक 9562.68 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इस परियोजना के लिए 25027.72 हेक्टेअर भूमि की आवश्यकता थी। इसके सापेक्ष 25021.497 हेक्टेअर भूमि विभाग ने पहले ही खरीद ली है।