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11 वर्ष बाद भी नहीं शुरू हुई दूध खरीद
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जमुनहा(श्रावस्ती)। राप्ती के कछार सहित सीमा क्षेत्र के गो पालकों का सपना 11 वर्ष बाद भी अधूरा है। लाखों रुपये खर्च कर जमुनहा के चमरपुरवा में बीएडीपी से दुग्ध सहकारी समिति का निर्माण कराया गया था, लेकिन कर्मचारियों की तैनाती न होने के कारण आज तक इसका संचालन प्रारंभ नहीं हो सका।
श्वेत क्रांति लाने के लिए सरकार भले ही पशुपालन व दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दे रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके एकदम विपरीत है। विभागीय उपेक्षा के कारण यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। देखा जाए तो अब तक जिले में दुग्ध उत्पादन समिति स्थापित नहीं हो सकी है। आज भी यह कार्य गोंडा के सहारे संचालित कराया जा रहा है। वहीं नेपाल सीमा से सटे राप्ती के कछार क्षेत्र जमुनहा के गांव में दूध खरीद के लिए वर्ष 2009-10 में योजना तैयार की गई थी ताकि दूधियों व पशुपालकों को दूध बचने के लिए दूर न जाना पड़े। इसके लिए बॉर्डर एरिया डेवलेपमेंट प्रोग्राम के तहत लाखों रुपये खर्च कर जमुनहा के चमरपुरवा स्थित प्राथमिक विद्यालय चमरपुरवा प्रथम के बगल में दुग्ध सहकारी समिति का निर्माण कराया गया था।
तब इसके संचालन के लिए जेनरेटर सहित अन्य उपकरण भी मंगाए गए थे। इससे ग्रामीणों में यह उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें अपने गांव के आसपास की दूध बेचने की सुविधा मिलेगी। साथ ही दूध का उचित मूल्य भी मिलेगा। लेकिन ग्रामीणों का यह सपना 11 वर्ष बाद भी सपना ही रहा। केंद्र पर कर्मचारियों की तैनाती न होने के कारण अब तक इसका संचालन प्रारंभ नहीं हो सका है। ऐसे में आज भी पशुपालक व दूधिया दूध बेचने के लिए जमुनहा, मल्हीपुर, बदला, बाबागंज सहित बहराइच जाने को विवश देखे जा रहे हैं।
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श्वेत क्रांति लाने के लिए सरकार भले ही पशुपालन व दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दे रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके एकदम विपरीत है। विभागीय उपेक्षा के कारण यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। देखा जाए तो अब तक जिले में दुग्ध उत्पादन समिति स्थापित नहीं हो सकी है। आज भी यह कार्य गोंडा के सहारे संचालित कराया जा रहा है। वहीं नेपाल सीमा से सटे राप्ती के कछार क्षेत्र जमुनहा के गांव में दूध खरीद के लिए वर्ष 2009-10 में योजना तैयार की गई थी ताकि दूधियों व पशुपालकों को दूध बचने के लिए दूर न जाना पड़े। इसके लिए बॉर्डर एरिया डेवलेपमेंट प्रोग्राम के तहत लाखों रुपये खर्च कर जमुनहा के चमरपुरवा स्थित प्राथमिक विद्यालय चमरपुरवा प्रथम के बगल में दुग्ध सहकारी समिति का निर्माण कराया गया था।
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तब इसके संचालन के लिए जेनरेटर सहित अन्य उपकरण भी मंगाए गए थे। इससे ग्रामीणों में यह उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें अपने गांव के आसपास की दूध बेचने की सुविधा मिलेगी। साथ ही दूध का उचित मूल्य भी मिलेगा। लेकिन ग्रामीणों का यह सपना 11 वर्ष बाद भी सपना ही रहा। केंद्र पर कर्मचारियों की तैनाती न होने के कारण अब तक इसका संचालन प्रारंभ नहीं हो सका है। ऐसे में आज भी पशुपालक व दूधिया दूध बेचने के लिए जमुनहा, मल्हीपुर, बदला, बाबागंज सहित बहराइच जाने को विवश देखे जा रहे हैं।
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