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300 उपासकों ने बौद्ध तपोस्थली में की पूजा

Sun, 01 Sep 2019 11:00 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 01 Sep 2019 11:00 PM IST
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300 worshipers worshiped in Buddhist taposthali
श्रावस्ती में रविवार को बौद्ध तपोस्थली में पूजन करते अनुयायी। - फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में चल रहे विशेष वर्षावास पूजा में शामिल होने के लिए रविवार को श्रीलंका से 300 सदस्यीय दल पहुंचा। दल में शामिल सदस्यों ने आनंद बोधि पर विशेष पूजा अर्चना की। इस दौरान समूची तपोस्थली बुद्धम् शरणम् गच्छामि से गूंजायमान रही। इसके बाद दल के सदस्यों ने तपोस्थली के विभिन्न मूमेंटों का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की।
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श्रीलंका से तपोस्थली पहुंचे तीन सौ श्रीलंकाई बौद्ध अनुयायियों ने माता सुमेदा के नेतृत्व में रविवार को आनंद बोधि पर विशेष वर्षावास पूजा की। इस दौरान माता सुमेदा महाथेरो ने कहा कि बुद्ध का जीवन हर किसी के लिए प्रेरणादायी है। गौतम बुद्ध बौद्ध धर्म के प्रवर्तक थे। बचपन में उनको राज कुमार सिद्धार्थ के नाम से जाना जाता था।
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बौद्ध ग्रंथों के अनुसार गौतम बुद्ध के जन्म से 12 वर्ष पूर्व ही एक ऋषि ने भविष्यवाणी की थी, कि यह बच्चा या तो एक सार्वभौमिक सम्राट या महान ऋषि बनेगा। सिद्धार्थ के जन्म से पूर्व हुई भविष्यवाणी से परेशान होकर उनके पिता ने उन्हें तपस्वी बनने से रोकने के लिए राजमहल की परिधि में रखा।
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गौतम राजसी विलासिता में पले-बढ़े, मनोरंजन, ब्राह्मणों द्वारा निर्देशन, और तीरंदाजी, तलवारबाजी, कुश्ती, तैराकी और दौड़ में प्रशिक्षित किए गए थे। कम उम्र में ही उनका विवाह करा दिया गया।
सिद्धार्थ बचपन से ही अत्यंत करुण हृदय वाले थे। वह किसी का भी दुख नहीं देख सकते थे। 35 वर्ष की आयु में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। वह संसार का मोह त्याग कर तपस्वी बन गए थे और परम ज्ञान की खोज में चले गए थे।

पूजन के दौरान समूची तपोस्थली बुद्धम् शरणम् गच्छामि, धम्मम् शरणम् गच्छामि से गूंजायमान रही। इस मौके पर आनंद सागर, नाग ज्योति, धम्म सागर, माता विद्यावती, सुख सागर सहित बौद्ध भिक्षु मौजूद रहे।
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