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नानाजी व अटल की कर्मभूमि तथा गौतम की धरती पर बसपा ने खोला खाता
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श्रावस्ती। तथागत भगवान गौतम बुद्ध की तपोस्थली व भारत रत्न पंडित अटल बिहारी बाजपेई व नानाजी देशमुख की कर्मभूमि पर पहली बार बसपा ने अपना खाता खोला। सत्रहवीं लोकसभा के लिए हुए इस चुनाव में श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र ने एक नया इतिहास रचा है। ऐसा पहली बार हुआ जब सवर्णों की हैट्रिक लगाने वाली इस सीट से गठबंधन से पिछड़े वर्ग के प्रत्याशी ने अपनी जीत दर्ज की।
पहले बलरामपुर अब श्रावस्ती लोकसभा में जीत हार का यह खेल कोई नया नहीं है। यहां से पहली बार जनसंघ से चुन कर सदन पहुंचे पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न पंडित अटल बिहारी बाजपेई को दूसरी बार हार का मुंह देखना पड़ा। वहीं भारतीय लोक दल के संस्थापक रहे नानाजी देशमुख को भी दूसरी बार शिकस्त खानी पड़ी। कांग्रेस की कद्दावर नेता रही सुभद्रा जोशी, कांग्रेस के ही चंद्रभाल मणि त्रिपाठी, महंत दीप नारायण को भी जीत व हार का स्वाद चखना पड़ा।
इनके बाद मुन्न खां को शिकस्त दे सदन पहुंचे भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यदेव सिंह लगातार दो बार सांसद रहे। जिन्हें बाद में सपा के रिजवान जहीर के हाथों मात खानी पड़ी। रिजवान जहीर को भाजपा के बृज भूषण शरण सिंह के हाथों शिकास्त मिली। इसके बाद हुए परिसिमन में श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र बनी इस सीट पर कांग्रेस के डॉ. विनय कुमार पांडे ने अपनी जीत दर्ज कराई। जिन्हें भाजपा के दद्दन मिश्रा ने शिकास्त दी।
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1957 से लेकर 2019 तक के इस सफर में प्रत्याशी तो कई मैदान में उतरे, लेकिन मतदाताओं ने कभी भी बसपा पर भरोसा नहीं जताया, और न ही पिछड़ी जाति अथवा किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति को अपना रहनुमा ही चुना। सत्रहवीं लोकसभा के लिए हुए इस चुनाव में सभी रिकॉर्ड टूट गए। इस सीट पर जहां पहली बार गठबंधन से बसपा ने अपना खाता खोला। वहीं पहली बार पिछड़े वर्ग के प्रत्याशी रहे राम शिरोमणि वर्मा पर आस्था जताते हुए मतदाताओं ने उन्हें अपना रहनुमा चुना।
दो प्रत्याशी ही लगातार दूसरी बार पहुंचे सदन
कभी बलरामपुर रही श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र में पंडित अटल बिहारी बाजपेई, सुभद्रा जोशी, चंद्रभाल मणि त्रिपाठी, नानजी देश मुख, महंत दीप नारायण, मुन्न खां, सत्यदेव सिंह, रिजवान जहीर, डॉ. विनय कुमार पांडेय व दद्दन मिश्र तक सभी दोबारा चुनाव मैदान में उतरे। इनमें लगातार दूसरी बार सदन में पहुंचने का मौका सिर्फ महंत दीप नारायण व सत्यदेव सिंह को ही मिला। शेष सभी को लगातार दोबारा जीत का मौका नहीं मिला। बृज भूषण सिंह दोबारा कैसरगंज लोकसभा सीट से लड़ कर सदन पहुंचने में सफल रहे।
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पहले बलरामपुर अब श्रावस्ती लोकसभा में जीत हार का यह खेल कोई नया नहीं है। यहां से पहली बार जनसंघ से चुन कर सदन पहुंचे पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न पंडित अटल बिहारी बाजपेई को दूसरी बार हार का मुंह देखना पड़ा। वहीं भारतीय लोक दल के संस्थापक रहे नानाजी देशमुख को भी दूसरी बार शिकस्त खानी पड़ी। कांग्रेस की कद्दावर नेता रही सुभद्रा जोशी, कांग्रेस के ही चंद्रभाल मणि त्रिपाठी, महंत दीप नारायण को भी जीत व हार का स्वाद चखना पड़ा।
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इनके बाद मुन्न खां को शिकस्त दे सदन पहुंचे भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यदेव सिंह लगातार दो बार सांसद रहे। जिन्हें बाद में सपा के रिजवान जहीर के हाथों मात खानी पड़ी। रिजवान जहीर को भाजपा के बृज भूषण शरण सिंह के हाथों शिकास्त मिली। इसके बाद हुए परिसिमन में श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र बनी इस सीट पर कांग्रेस के डॉ. विनय कुमार पांडे ने अपनी जीत दर्ज कराई। जिन्हें भाजपा के दद्दन मिश्रा ने शिकास्त दी।
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1957 से लेकर 2019 तक के इस सफर में प्रत्याशी तो कई मैदान में उतरे, लेकिन मतदाताओं ने कभी भी बसपा पर भरोसा नहीं जताया, और न ही पिछड़ी जाति अथवा किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति को अपना रहनुमा ही चुना। सत्रहवीं लोकसभा के लिए हुए इस चुनाव में सभी रिकॉर्ड टूट गए। इस सीट पर जहां पहली बार गठबंधन से बसपा ने अपना खाता खोला। वहीं पहली बार पिछड़े वर्ग के प्रत्याशी रहे राम शिरोमणि वर्मा पर आस्था जताते हुए मतदाताओं ने उन्हें अपना रहनुमा चुना।
दो प्रत्याशी ही लगातार दूसरी बार पहुंचे सदन
कभी बलरामपुर रही श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र में पंडित अटल बिहारी बाजपेई, सुभद्रा जोशी, चंद्रभाल मणि त्रिपाठी, नानजी देश मुख, महंत दीप नारायण, मुन्न खां, सत्यदेव सिंह, रिजवान जहीर, डॉ. विनय कुमार पांडेय व दद्दन मिश्र तक सभी दोबारा चुनाव मैदान में उतरे। इनमें लगातार दूसरी बार सदन में पहुंचने का मौका सिर्फ महंत दीप नारायण व सत्यदेव सिंह को ही मिला। शेष सभी को लगातार दोबारा जीत का मौका नहीं मिला। बृज भूषण सिंह दोबारा कैसरगंज लोकसभा सीट से लड़ कर सदन पहुंचने में सफल रहे।