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बारह हजार में बेच रहे पांच सौ का ड्रम
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गिलौला (श्रावस्ती)। गांवों में स्वच्छता लाने के लिए कूड़ेदान रखने का निर्देश डीएम ने दिया था लेकिन बारह हजार के कूड़ेदान के बजाए पांच सौ का ड्रम काट कर उसे कूड़ादान बनाया जा रहा है।
ऐसा कुछ गिलौला के केरवनिया गांव में देखने को मिला। गांव स्वच्छ रहे, इसके लिए राज्य वित्त से जिलाधिकारी दीपक मीणा ने प्रत्येक गांव में दो डस्टबिन रखवाने का निर्देश दिया था।
एक डस्टबिन में सूखा व एक में गीला कचरा डालना था लेकिन जिलाधिकारी का यह आदेश ग्राम प्रधान व सचिव के कमाई का जरिया बन गया।
अधिकृत डस्टबिन के बजाए ग्राम पंचायतों ने पुराने टूटे ड्रम को काट कर दो डस्टबिन बना दिया जिसे गांव में रख कर 24 हजार का भुगतान भी निकाल लिया।
ऐसा ही कुछ गिलौला के केरवनिया में देखने को मिला। पंचायत द्वारा यहां ड्रम को काट कर दो बना कर उसे बाहर से दो रंग में रंग दिया। इस डस्टबिन में न तो ढक्कन है और न ही इसे लटकाने की व्यवस्था।
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आधा कूड़ा ड्रम में तो आधा जमीन पर पड़ा हुआ है। इस बारे में डीपीआरओ रणविजय सिंह बताते हैं कि यदि इस तरह का डस्टबिन कहीं लगा है तो जांच कराकर इसकी रिकवरी सचिव व ग्राम प्रधान से की जाएगी।
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ऐसा कुछ गिलौला के केरवनिया गांव में देखने को मिला। गांव स्वच्छ रहे, इसके लिए राज्य वित्त से जिलाधिकारी दीपक मीणा ने प्रत्येक गांव में दो डस्टबिन रखवाने का निर्देश दिया था।
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एक डस्टबिन में सूखा व एक में गीला कचरा डालना था लेकिन जिलाधिकारी का यह आदेश ग्राम प्रधान व सचिव के कमाई का जरिया बन गया।
अधिकृत डस्टबिन के बजाए ग्राम पंचायतों ने पुराने टूटे ड्रम को काट कर दो डस्टबिन बना दिया जिसे गांव में रख कर 24 हजार का भुगतान भी निकाल लिया।
ऐसा ही कुछ गिलौला के केरवनिया में देखने को मिला। पंचायत द्वारा यहां ड्रम को काट कर दो बना कर उसे बाहर से दो रंग में रंग दिया। इस डस्टबिन में न तो ढक्कन है और न ही इसे लटकाने की व्यवस्था।
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आधा कूड़ा ड्रम में तो आधा जमीन पर पड़ा हुआ है। इस बारे में डीपीआरओ रणविजय सिंह बताते हैं कि यदि इस तरह का डस्टबिन कहीं लगा है तो जांच कराकर इसकी रिकवरी सचिव व ग्राम प्रधान से की जाएगी।