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दशलक्षण पर्व में दूसरे दिन की उत्तम मार्दव धर्म की पूजा
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शामली जैन मन्दिर में दक्ष लक्षण पर्व पर पूजन करते जैन समाज के लोग
- फोटो : SHAMLI
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दूसरे दिन की उत्तम मार्दव धर्म की पूजा
शामली। तालाब रोड स्थित श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण पर्व में दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मंदिर में 13 दीप महामंडल विधान में चल रहा है। विधान के दूसरे दिन शांति धारा का पुण्य सलेक जैन को मिला। पाठ के सौधर्म इंद्र भूषण लाल जैन रहे। उत्तम मार्दव धर्म की पूजा-अर्चना की गई।
विधान आचार्य सतेंद्र जैन टीकमगढ़ ने विधि विधान से पूजा-अर्चना कराई। संगीतकार रमेशचंद्र नामदेव ने भक्ति भजन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। संयोजक वीरेश जैन ने बताया दशलक्षण पर्व के दौरान 19 सितंबर तक प्रतिदिन सुबह छह बजे अभिषेक और साढ़े छह बजे शांति धारा होगी। सात बजे पूजन विधान होगा। प्रतिदिन पाठ सुबह छह बजे से चलेगा। मौके पर अध्यक्ष सुदेश जैन, मंत्री राजेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेश जैन, पंकज जैन, विकास जैन, महेश, रोहित जैन, राहुल जैन, पवन जैन आदि रहे।
अपने अभिमान को नष्ट करना ही है मार्दव धर्म
गढ़ीपुख्ता। श्री दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र में दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की गई। मार्दव का मतलब होता है, अपने अंदर के मान को समाप्त करना। इंसान जिस मान अभिमान में अपने आप को सर्वोपरि समझता है। उस मान गुमान को समाप्त करके उस पर विजय प्राप्त करना ही मार्दव धर्म है। प्रक्षाल एवं शांति धारा के पश्चात विधि विधान से नित्य-नियम पूजा अर्चना की गई। 16 कारण और दशलक्षण धर्म की पूजा की गई। 13 दीप विधान के अंतर्गत प्रथम मेरु सुदर्शन मेरु का समापन हुआ। मौके पर अधिशासी अभियंता आरके जैन, नीरज जैन, अनिल जैन, सुदेश जैन, रेखा जैन, नीलम जैन, संगीता जैन, स्मिता जैन, रेनू जैन मौजूद रहे।
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शामली। तालाब रोड स्थित श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण पर्व में दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मंदिर में 13 दीप महामंडल विधान में चल रहा है। विधान के दूसरे दिन शांति धारा का पुण्य सलेक जैन को मिला। पाठ के सौधर्म इंद्र भूषण लाल जैन रहे। उत्तम मार्दव धर्म की पूजा-अर्चना की गई।
विधान आचार्य सतेंद्र जैन टीकमगढ़ ने विधि विधान से पूजा-अर्चना कराई। संगीतकार रमेशचंद्र नामदेव ने भक्ति भजन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। संयोजक वीरेश जैन ने बताया दशलक्षण पर्व के दौरान 19 सितंबर तक प्रतिदिन सुबह छह बजे अभिषेक और साढ़े छह बजे शांति धारा होगी। सात बजे पूजन विधान होगा। प्रतिदिन पाठ सुबह छह बजे से चलेगा। मौके पर अध्यक्ष सुदेश जैन, मंत्री राजेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेश जैन, पंकज जैन, विकास जैन, महेश, रोहित जैन, राहुल जैन, पवन जैन आदि रहे।
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अपने अभिमान को नष्ट करना ही है मार्दव धर्म
गढ़ीपुख्ता। श्री दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र में दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की गई। मार्दव का मतलब होता है, अपने अंदर के मान को समाप्त करना। इंसान जिस मान अभिमान में अपने आप को सर्वोपरि समझता है। उस मान गुमान को समाप्त करके उस पर विजय प्राप्त करना ही मार्दव धर्म है। प्रक्षाल एवं शांति धारा के पश्चात विधि विधान से नित्य-नियम पूजा अर्चना की गई। 16 कारण और दशलक्षण धर्म की पूजा की गई। 13 दीप विधान के अंतर्गत प्रथम मेरु सुदर्शन मेरु का समापन हुआ। मौके पर अधिशासी अभियंता आरके जैन, नीरज जैन, अनिल जैन, सुदेश जैन, रेखा जैन, नीलम जैन, संगीता जैन, स्मिता जैन, रेनू जैन मौजूद रहे।

शामली जैन मन्दिर में दक्ष लक्षण पर्व पर पूजन करते जैन समाज की महिलाएं- फोटो : SHAMLI
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