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चरस तस्कर चाचा-भतीजे को 12 साल का कारावास
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कैराना। चरस तस्कर चाचा-भतीजे पर दोष सिद्ध पाए जाने पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) सुबोध सिंह ने मुजरिमों को 12 साल का कठोर कारावास और एक-एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 2-2 साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक कुमार पुंडीर ने बताया कि 30 नवंबर 2011 की रात 10 बजे कैराना पुलिस ने रामड़ा चौराहे से मुखबिर की सूचना पर मेहरद्दीन निवासी नंगला राई को 1.75 किग्रा चरस व मेहरद्दीन के चाचा इंतजार को 1.50 किग्रा चरस के साथ गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया था। जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। बाद में जमानत कराने के बाद दोनों मुजरिम तीन साल तक अदालत से फरार रहे। जिस पर अदालत ने दोनो के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी करने के साथ ही जमानतियों के विरुद्ध कार्रवाई की थी।
तीन साल तक फरार रहने के बाद दोनों मुजरिम कोर्ट में पेश हुए थे। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाह पेश किए गए। शनिवार को दोनों पक्षों की दलील सुनने व पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) सुबोध सिंह ने मुजरिम मेहरद्दीन व इंतजार को 12-12 साल का कठोर कारावास व 1-1 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जेल में बीताई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक कुमार पुंडीर ने बताया कि 30 नवंबर 2011 की रात 10 बजे कैराना पुलिस ने रामड़ा चौराहे से मुखबिर की सूचना पर मेहरद्दीन निवासी नंगला राई को 1.75 किग्रा चरस व मेहरद्दीन के चाचा इंतजार को 1.50 किग्रा चरस के साथ गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया था। जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। बाद में जमानत कराने के बाद दोनों मुजरिम तीन साल तक अदालत से फरार रहे। जिस पर अदालत ने दोनो के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी करने के साथ ही जमानतियों के विरुद्ध कार्रवाई की थी।
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तीन साल तक फरार रहने के बाद दोनों मुजरिम कोर्ट में पेश हुए थे। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाह पेश किए गए। शनिवार को दोनों पक्षों की दलील सुनने व पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) सुबोध सिंह ने मुजरिम मेहरद्दीन व इंतजार को 12-12 साल का कठोर कारावास व 1-1 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जेल में बीताई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी।
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