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Shamli News: गर्भवती महिलाओं की समय पर कराएं जांच, लापरवाही पड़ेगी भारी
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राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस :
सीएचसी पर हर महीने के चार दिन एचआरपी डे पर होती है गर्भवती महिलाओं की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव कराने और जच्चा-बच्चा की देखभाल के लिए समय-समय पर जांच करानी चाहिए। इसमें लापरवाही भारी पड़ सकती है। सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की जांच व उपचार की निशुल्क सुविधा उपलब्ध है।
हर वर्ष 11 अप्रैल को राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है। गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए सभी सीएचसी पर हर महीने की पहली, नौ, 16 और 24 तारीख को उच्च जोखिम दिवस (एचआरपी डे) मनाया जाता है। सीएचसी शामली में हर महीने एचआरपी डे पर लगभग 200 गर्भवती महिलाओं की जांच होती है। इनमें 20 से ज्यादा महिलाएं उच्च जोखिम गर्भावस्था की श्रेणी में होती हैं।
सात ग्राम से कम हीमोग्लोबीन वाली महिलाओं को आयरन सुक्रोज और रक्त चढ़ाया जाता है। सात से 10 ग्राम के बीच हीमोग्लोबीन होने पर दवा और विशेष देखभाल की सलाह दी जाती है। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा भी निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।
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महिला चिकित्सक डॉ. सानिया ने बताया कि गर्भवती महिलाओं की समय-समय पर जांच करानी चाहिए। चिकित्सक की सलाह से उपचार व सावधानी बरतनी चाहिए। इसमें लापरवाही गर्भवती महिला व बच्चे की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। गर्भवती महिलाओं को खानपान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।
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सीएचसी पर हर महीने के चार दिन एचआरपी डे पर होती है गर्भवती महिलाओं की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव कराने और जच्चा-बच्चा की देखभाल के लिए समय-समय पर जांच करानी चाहिए। इसमें लापरवाही भारी पड़ सकती है। सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की जांच व उपचार की निशुल्क सुविधा उपलब्ध है।
हर वर्ष 11 अप्रैल को राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है। गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए सभी सीएचसी पर हर महीने की पहली, नौ, 16 और 24 तारीख को उच्च जोखिम दिवस (एचआरपी डे) मनाया जाता है। सीएचसी शामली में हर महीने एचआरपी डे पर लगभग 200 गर्भवती महिलाओं की जांच होती है। इनमें 20 से ज्यादा महिलाएं उच्च जोखिम गर्भावस्था की श्रेणी में होती हैं।
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सात ग्राम से कम हीमोग्लोबीन वाली महिलाओं को आयरन सुक्रोज और रक्त चढ़ाया जाता है। सात से 10 ग्राम के बीच हीमोग्लोबीन होने पर दवा और विशेष देखभाल की सलाह दी जाती है। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा भी निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।
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महिला चिकित्सक डॉ. सानिया ने बताया कि गर्भवती महिलाओं की समय-समय पर जांच करानी चाहिए। चिकित्सक की सलाह से उपचार व सावधानी बरतनी चाहिए। इसमें लापरवाही गर्भवती महिला व बच्चे की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। गर्भवती महिलाओं को खानपान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।