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Shamli News: जांचों के नाम पर वसूली करने में लैब टेक्नीशियन समेत तीन को हटाया
Wed, 29 Jan 2025 12:32 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Wed, 29 Jan 2025 12:32 AM IST
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शामली। जिला अस्पताल में काला पीलिया, खून और अन्य जांचों के नाम पर अवैध वसूली करने के मामले में डीएम के निर्देश पर सीएमएस ने लैब टेक्नीशियन, इंटर्न, लैब अटेंडेंट पर कार्रवाई की है। लैब टेक्नीशियन, अटेंडेंट को लैब से हटाकर इमरजेंसी में तैनात किया गया है। वहीं इंटर्न को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। चार और कर्मचारी विभागीय अधिकारियों के रडार पर है। जिला अस्पताल में चल रहे अवैध वसूली के खेल का अमर उजाला ने खबरें प्रकाशित कर खुलासा किया था।
जिला अस्पताल में जांच के नाम पर वसूली को लेकर अमर उजाला ने 9 जनवरी से लेकर 12 जनवरी तक अभियान चलाया। जिसमें अस्पताल कर्मचारियों और प्राइवेट लैब के लोगों की मिलीभगत का खुलासा किया। तमाम टेस्ट कराने और तुरंत ही रिपोर्ट देने के नाम पर यह खेल चल रहा था। यहां 500 से 600 रुपये देने पर बिना लाइन में लगे ही सिटी स्कैन भी कराया जा रहा था।
जिलाधिकारी अरविंद चौहान ने पूरे मामले का ब्योरा तलब जांच के निर्देश दिए। सीएमएस डाॅ. किशोर आहूजा ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। सीएमएस ने बताया कि कमेटी की जांच में सामने आया है कि लैब में तैनात इंटर्न मुरसलीन, लैब अटेंडेंट बादल, लैब टेक्नीशियन विशाल की मिलीभगत से वसूली का खेल चल रहा था। जांचों के नाम पर 200 से 300 रुपये लिए जा रहे थे। जांच में सामने आया है कि जो मरीज रुपये दे देते थे, उनकी जांच रिपोर्ट तुरंत ही दे दी जाती थी जबकि अन्य की जांच रिपोर्ट एक से दो दिन में दी जाती थी।
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दो दलाल और चार कर्मचारी रडार पर
सीएमएस ने बताया कि जांच में सामने आया है कि प्राइवेट लैब के दो दलाल भी अस्पताल में आकर मरीजों की हेपेटाइटिस बी, फुल बॉडी की जांच के नाम पर 1500 से लेकर 2500 रुपये लेते थे। दोनों दलालों को चिह्नित किया गया है। इसके अलावा अस्पताल के ही चार और कर्मचारी रडार पर है, जिनकी भूमिका की जांच कराई जा रही है। मामले में जो भी कर्मचारी शामिल मिलता है उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जिला अस्पताल में सभी तरह की जांचें निशुल्क होती है। लोगों को रुपये देने वालों की सूचना विभागीय अधिकारियों को देनी चाहिए।मरीजों से अवैध वसूली प्रकरण में जिला अस्पताल के जो भी कर्मचारी लिप्त है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
अरविंद चौहान, जिलाधिकारी शामली
आखिर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं
वसूली में लिप्त लैब टेक्नीशियन, लैब अटेंडेंट को लैब से हटाकर इमरजेंसी में तो तैनात कर दिया गया। मगर उनके खिलाफ कोई कड़ा एक्शन अधिकारियों ने नहीं लिया है। सवाल यह उठता है कि जांच में खुलासा होने पर भी आखिर कड़ी कार्रवाई कर्मचारियों के खिलाफ क्यों नहीं की गई।
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जिला अस्पताल में जांच के नाम पर वसूली को लेकर अमर उजाला ने 9 जनवरी से लेकर 12 जनवरी तक अभियान चलाया। जिसमें अस्पताल कर्मचारियों और प्राइवेट लैब के लोगों की मिलीभगत का खुलासा किया। तमाम टेस्ट कराने और तुरंत ही रिपोर्ट देने के नाम पर यह खेल चल रहा था। यहां 500 से 600 रुपये देने पर बिना लाइन में लगे ही सिटी स्कैन भी कराया जा रहा था।
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जिलाधिकारी अरविंद चौहान ने पूरे मामले का ब्योरा तलब जांच के निर्देश दिए। सीएमएस डाॅ. किशोर आहूजा ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। सीएमएस ने बताया कि कमेटी की जांच में सामने आया है कि लैब में तैनात इंटर्न मुरसलीन, लैब अटेंडेंट बादल, लैब टेक्नीशियन विशाल की मिलीभगत से वसूली का खेल चल रहा था। जांचों के नाम पर 200 से 300 रुपये लिए जा रहे थे। जांच में सामने आया है कि जो मरीज रुपये दे देते थे, उनकी जांच रिपोर्ट तुरंत ही दे दी जाती थी जबकि अन्य की जांच रिपोर्ट एक से दो दिन में दी जाती थी।
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दो दलाल और चार कर्मचारी रडार पर
सीएमएस ने बताया कि जांच में सामने आया है कि प्राइवेट लैब के दो दलाल भी अस्पताल में आकर मरीजों की हेपेटाइटिस बी, फुल बॉडी की जांच के नाम पर 1500 से लेकर 2500 रुपये लेते थे। दोनों दलालों को चिह्नित किया गया है। इसके अलावा अस्पताल के ही चार और कर्मचारी रडार पर है, जिनकी भूमिका की जांच कराई जा रही है। मामले में जो भी कर्मचारी शामिल मिलता है उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जिला अस्पताल में सभी तरह की जांचें निशुल्क होती है। लोगों को रुपये देने वालों की सूचना विभागीय अधिकारियों को देनी चाहिए।मरीजों से अवैध वसूली प्रकरण में जिला अस्पताल के जो भी कर्मचारी लिप्त है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
अरविंद चौहान, जिलाधिकारी शामली
आखिर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं
वसूली में लिप्त लैब टेक्नीशियन, लैब अटेंडेंट को लैब से हटाकर इमरजेंसी में तो तैनात कर दिया गया। मगर उनके खिलाफ कोई कड़ा एक्शन अधिकारियों ने नहीं लिया है। सवाल यह उठता है कि जांच में खुलासा होने पर भी आखिर कड़ी कार्रवाई कर्मचारियों के खिलाफ क्यों नहीं की गई।