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Shamli News: परिणाम देखने के लिए अखबार का घंटों करना पड़ता था इंतजार
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। माध्यमिक शिक्षा परिषद के परीक्षा परिणाम में 25 साल पहले और हाल ही के रिजल्ट में काफी बड़ा अंतर आ गया है। वर्ष 2000 के समय में तकनीक इतनी विकसित नहीं थी। पहले घंटों तक दसवीं और 12वीं कक्षा का रिजल्ट जानने को अखबारों का इंतजार किया जाता था।
अब एक क्लिक पर ही रिजल्ट सामने होता है। शहर के देशभक्त इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य विनोद कुमार वर्मा पूर्व में आने वाले रिजल्ट के संस्मरण को याद करते हुए बताते हैं कि उस समय परीक्षा परिणाम दिखाने के लिए हर गांव या कस्बों में किसी दुकान या किसी सार्वजनिक स्थान पर परीक्षा परिणाम छपा केवल एक अखबार आता था।
परीक्षा परिणाम देखने के लिए विद्यार्थियों में एक अलग ही उत्साह हुआ करता था। दुकान पर अखबार पहुंचने से पहले ही विद्यार्थियों की लाइन लगी रहती थी। इंतजार में वह कई घंटों तक वहीं खड़े रहते थे।
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अखबार आते ही दुकानदार मस्जिद व मंदिरों में एलान करवा देते थे। उस समय एक रुपये में परीक्षा परिणाम देखा जाता था, वहीं परीक्षा में फेल होने वाले छात्रों के प्रति सभी की सहानुभूति होती थी। फेल होने वालों से कोई पैसा भी नहीं लिया जाता था।
इसके साथ ही फेल होने वाले विद्यार्थियों को पास होने वाले छात्र उनके घर भी छोड़ने जाते थे। उस समय केवल 20 से 25 प्रतिशत ही परीक्षा परिणाम रहता था, लेकिन आज के समय में 95 प्रतिशत तक परीक्षा परिणाम रहता है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय तकनीकी का समय है। बोर्ड द्वारा परीक्षा परिणाम देखना काफी सरल कर दिया है। परिणाम देखने के लिए अलग-अलग प्लेटफाॅर्म विकसित किए हैं। बोर्ड द्वारा जैसे ही परिणाम घोषित किया जाता है । कुछ समय बाद ही छात्र-छात्राएं अपना परीक्षा परिणाम एक क्लिक पर देख लेते हैं। पहले अखबार में छपे परीक्षा परिणाम में त्रुटियां भी मिलती थी कि अखबार में छात्रों का रोल नंबर गलत छप जाता था, लेकिन आज के समय में गलतियां नाम मात्र को ही रहती है।
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शामली। माध्यमिक शिक्षा परिषद के परीक्षा परिणाम में 25 साल पहले और हाल ही के रिजल्ट में काफी बड़ा अंतर आ गया है। वर्ष 2000 के समय में तकनीक इतनी विकसित नहीं थी। पहले घंटों तक दसवीं और 12वीं कक्षा का रिजल्ट जानने को अखबारों का इंतजार किया जाता था।
अब एक क्लिक पर ही रिजल्ट सामने होता है। शहर के देशभक्त इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य विनोद कुमार वर्मा पूर्व में आने वाले रिजल्ट के संस्मरण को याद करते हुए बताते हैं कि उस समय परीक्षा परिणाम दिखाने के लिए हर गांव या कस्बों में किसी दुकान या किसी सार्वजनिक स्थान पर परीक्षा परिणाम छपा केवल एक अखबार आता था।
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परीक्षा परिणाम देखने के लिए विद्यार्थियों में एक अलग ही उत्साह हुआ करता था। दुकान पर अखबार पहुंचने से पहले ही विद्यार्थियों की लाइन लगी रहती थी। इंतजार में वह कई घंटों तक वहीं खड़े रहते थे।
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अखबार आते ही दुकानदार मस्जिद व मंदिरों में एलान करवा देते थे। उस समय एक रुपये में परीक्षा परिणाम देखा जाता था, वहीं परीक्षा में फेल होने वाले छात्रों के प्रति सभी की सहानुभूति होती थी। फेल होने वालों से कोई पैसा भी नहीं लिया जाता था।
इसके साथ ही फेल होने वाले विद्यार्थियों को पास होने वाले छात्र उनके घर भी छोड़ने जाते थे। उस समय केवल 20 से 25 प्रतिशत ही परीक्षा परिणाम रहता था, लेकिन आज के समय में 95 प्रतिशत तक परीक्षा परिणाम रहता है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय तकनीकी का समय है। बोर्ड द्वारा परीक्षा परिणाम देखना काफी सरल कर दिया है। परिणाम देखने के लिए अलग-अलग प्लेटफाॅर्म विकसित किए हैं। बोर्ड द्वारा जैसे ही परिणाम घोषित किया जाता है । कुछ समय बाद ही छात्र-छात्राएं अपना परीक्षा परिणाम एक क्लिक पर देख लेते हैं। पहले अखबार में छपे परीक्षा परिणाम में त्रुटियां भी मिलती थी कि अखबार में छात्रों का रोल नंबर गलत छप जाता था, लेकिन आज के समय में गलतियां नाम मात्र को ही रहती है।