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अंबर पर तो वो ही उड़ेंगे जिनके अपने पर होंगे
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Tue, 01 Nov 2016 11:38 PM IST
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Mushaira
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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झिंझाना। दरगाह हजरत इमाम साहब के 850वें उर्स में आल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमें देश के विख्यात शायरों ने शिरकत कर अपने कलाम पेश किए। मुशायरे का आगाज नगर पालिका परिषद् शामली के चेयरमैन अरविन्द संगल नगर पंचायत अध्यक्ष झिंझाना हाजी सरफराज खान
नवागंतुक थाना प्रभारी कुलदीप सिंह ने संयुक्त रूप से शमा रोशन कर किया।
दरगाह हजरत इमाम महमूद सब्ज्वारी पर उर्स में सोमवार रात आल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमे ंदेश के प्रसिद्ध शायरों ने अपने कलाम पेश कर समां बांधे रखा।
शायर खुर्शीद हैदर ने अपने कलाम पेश करते हुए सुनाया कि ‘गैर परों पर उड़ सकते हैं हद से हद दीवारों तक, अंबर पर तो वोही उड़ेंगे जिनके अपने पर होंगे’, प्रदीप मायूस ने सुनाया कि वफा के सामने जालिम के तीर जितने थे, कमान छोड़ गए बेनजीर जितने थे, गो बादशाहों को तो खा गया गुरूर मगर, बुलंदियों पर है काबिज फकीर जितने थे, नवाजिस खान बुटराड़वी ने सुनाया कि मुसीबतों में भी आंखों को तर नहीं देखा, अजीब शख्स है ऐसा जिगर नहीं देखा।
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वसीम राजुपुरी ने सुनाया कि पहनकर आज जो खुद्दारी के चश्मे निकलते हैं, वहां पर बैठते थे कल जहां जूते निकलते हैं, मोहतरमा शाइस्ता सना ने सुनाया की ये जिंदगी अजब अंदाज से गुजरने लगी, बिछड़ गई मैं जो तुझसे तो रोज मरने लगी, जहाज देवबंदी ने सुनाया कि बेगम की अपनी नोच चुटिया भी आ गया, वो देश की डुबो कर लुटिया भी आ गया, हम दीग्रीय बगल में लिए फिर रहे है और, एक चाय वाला घूम के दुनिया भी आ गया। मुशायरे में दूर दूर से आए दर्जनों शायरों ने भी अपने कलाम पेश कर रातभर शमा बांधे रखा।
मुशायरे की निजामत अल्तमस अब्बास व सदारत चेयरमैन हाजी सरफराज खान ने की। इस दौरान पूर्व चेयरमैन राकेश गोयल आशीष मित्तल, विनोद संगल, सुनील बंसल, सभासद नौशाद कुरैशी, सरवर अंसारी, सरफराज शाह, असलम कुरैशी, दिलदार सैनी, गुलाब सैनी आदि मौजूद रहे।
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नवागंतुक थाना प्रभारी कुलदीप सिंह ने संयुक्त रूप से शमा रोशन कर किया।
दरगाह हजरत इमाम महमूद सब्ज्वारी पर उर्स में सोमवार रात आल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमे ंदेश के प्रसिद्ध शायरों ने अपने कलाम पेश कर समां बांधे रखा।
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शायर खुर्शीद हैदर ने अपने कलाम पेश करते हुए सुनाया कि ‘गैर परों पर उड़ सकते हैं हद से हद दीवारों तक, अंबर पर तो वोही उड़ेंगे जिनके अपने पर होंगे’, प्रदीप मायूस ने सुनाया कि वफा के सामने जालिम के तीर जितने थे, कमान छोड़ गए बेनजीर जितने थे, गो बादशाहों को तो खा गया गुरूर मगर, बुलंदियों पर है काबिज फकीर जितने थे, नवाजिस खान बुटराड़वी ने सुनाया कि मुसीबतों में भी आंखों को तर नहीं देखा, अजीब शख्स है ऐसा जिगर नहीं देखा।
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वसीम राजुपुरी ने सुनाया कि पहनकर आज जो खुद्दारी के चश्मे निकलते हैं, वहां पर बैठते थे कल जहां जूते निकलते हैं, मोहतरमा शाइस्ता सना ने सुनाया की ये जिंदगी अजब अंदाज से गुजरने लगी, बिछड़ गई मैं जो तुझसे तो रोज मरने लगी, जहाज देवबंदी ने सुनाया कि बेगम की अपनी नोच चुटिया भी आ गया, वो देश की डुबो कर लुटिया भी आ गया, हम दीग्रीय बगल में लिए फिर रहे है और, एक चाय वाला घूम के दुनिया भी आ गया। मुशायरे में दूर दूर से आए दर्जनों शायरों ने भी अपने कलाम पेश कर रातभर शमा बांधे रखा।
मुशायरे की निजामत अल्तमस अब्बास व सदारत चेयरमैन हाजी सरफराज खान ने की। इस दौरान पूर्व चेयरमैन राकेश गोयल आशीष मित्तल, विनोद संगल, सुनील बंसल, सभासद नौशाद कुरैशी, सरवर अंसारी, सरफराज शाह, असलम कुरैशी, दिलदार सैनी, गुलाब सैनी आदि मौजूद रहे।