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बच्चों को परीक्षा देने से रोका
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Sun, 11 Dec 2016 12:00 AM IST
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शामली। शहर के कैराना रोड स्थित रायल पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले कुछ बच्चों के अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि ठंडी के यूनिफार्म पहनकर न आने पर बच्चों को कंप्यूटर की परीक्षा से रोक दिया और ठंड के मौसम में कमरे के बाहर खड़ा कर दिया। उधर, स्कूल प्रबंधन ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
कस्बा कांधला निवासी अमित अग्रवाल ने बताया कि उनकी बेटी रायल पब्लिक स्कूल में कक्षा 10 वीं में पढ़ती है।
शनिवार को कंप्यूटर की परीक्षा होनी थी। उन्होंने बताया कि स्कूल स्टाफ ने उनकी बेटी के साथ ही कुछ अन्य छात्र छात्राओं को कमरे से बाहर निकालकर खड़ा कर दिया और परीक्षा में भी नहीं बैठने दिया। उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन शैक्षिक सत्र के बीच में यूनिफार्म चेंज करने का दबाव बना रहा है तथा दूसरी यूनिफार्म पहनकर न आने पर रिजल्ट रोकने की धमकी तक दी जा रही हैं।
उधर, इस बारे में स्कूल प्रधानाचार्य शिवानी कंडोला तथा मैनेजर अमरदीप मलिक का कहना है कि किसी भी बच्चे को परीक्षा से रोका नहीं गया। उन्होंने बताया कि बीच सत्र में यूनिफार्म में बदलाव का आरोप भी गलत है। सर्दी का मौसम होने के कारण बच्चों को गर्म यूनिफार्म पहनकर आने के लिए कहा जाता है, जो बच्चे कोट के स्थान पर जैकेट पहनकर आते हैं, उन्हें टोका जाता है। उनका कहना है कि अभिभावकों का आरोप झूठा और बेबुनियाद है।
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कस्बा कांधला निवासी अमित अग्रवाल ने बताया कि उनकी बेटी रायल पब्लिक स्कूल में कक्षा 10 वीं में पढ़ती है।
शनिवार को कंप्यूटर की परीक्षा होनी थी। उन्होंने बताया कि स्कूल स्टाफ ने उनकी बेटी के साथ ही कुछ अन्य छात्र छात्राओं को कमरे से बाहर निकालकर खड़ा कर दिया और परीक्षा में भी नहीं बैठने दिया। उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन शैक्षिक सत्र के बीच में यूनिफार्म चेंज करने का दबाव बना रहा है तथा दूसरी यूनिफार्म पहनकर न आने पर रिजल्ट रोकने की धमकी तक दी जा रही हैं।
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उधर, इस बारे में स्कूल प्रधानाचार्य शिवानी कंडोला तथा मैनेजर अमरदीप मलिक का कहना है कि किसी भी बच्चे को परीक्षा से रोका नहीं गया। उन्होंने बताया कि बीच सत्र में यूनिफार्म में बदलाव का आरोप भी गलत है। सर्दी का मौसम होने के कारण बच्चों को गर्म यूनिफार्म पहनकर आने के लिए कहा जाता है, जो बच्चे कोट के स्थान पर जैकेट पहनकर आते हैं, उन्हें टोका जाता है। उनका कहना है कि अभिभावकों का आरोप झूठा और बेबुनियाद है।
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