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हौसले के दम पर आसमान में उड़ान भर रहीं सृष्टि
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सृष्टि वर्मा
- फोटो : shamli
हौसले के दम पर आसमान में उड़ान भर रहीं सृष्टि
शामली, कैराना। सृष्टि वर्मा ने अपने हौसले से अपनी मां के सपने को साकार कर दिया। पिता की मौत के बाद सृष्टि और उसके भाई के सामने पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो गया था। मगर मां ने कर्ज लेकर भी उनकी पढ़ाई पूरी कराई। अब सृष्टि फ्लाइंग लेफ्टिनेंट हैं और भाई भी सेना में भर्ती की तैयारी कर रहा है।
कस्बे के मोहल्ला राजेंद्र कालोनी निवासी फ्लाइंग लेफ्टिनेंट सृष्टि वर्मा चार साल पहले दिल्ली में एमएससी कर रही थी। उस समय सृष्टि का छोटा भाई अर्पित कक्षा 11 का छात्र था। अचानक समय ने करवट बदली और सृष्टि के पिता अशोक वर्मा का निधन हो गया। पिता की मौत पर सृष्टि टूट गई थी। सृष्टि की मां बालेश गृहिणी थी, जबकि इकलौता छोटा भाई भी कमाने लायक नहीं था। ऐसे में सृष्टि को अपनी पढ़ाई की चिंता सताने लगी। पिता की मौत के बाद उनके स्थान पर मां बालेश को ऊंचागांव सोसाइटी में 12 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी मिल गई। इसी से घर का खर्च और सृष्टि व अर्पित की पढ़ाई का खर्च चला।
सृष्टि और मां बालेश ने हिम्मत नहीं हारी और रिश्तेदारों व अन्य लोगों से कर्ज लेकर दोनों की शिक्षा जारी रखी। एमएससी पूरी करने के बाद उन्होंने वायुसेना में जाने के लिए तैयारी शुरू कर दी। दिसंबर 2018 में हैदराबाद में ट्रेनिंग पूरी कर वह फ्लाइंग लेफ्टिनेंट बन गईं। सृष्टि का भाई अर्पित भी बीकॉम करने के बाद सेना में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रहा है। सृष्टि की मां बालेश ने बताया कि उनकी बेटी ने फ्लाइंग लेफ्टिनेंट बनकर पढ़ाई के समय लिया सारा कर्ज उतार दिया है। उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है।
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शामली, कैराना। सृष्टि वर्मा ने अपने हौसले से अपनी मां के सपने को साकार कर दिया। पिता की मौत के बाद सृष्टि और उसके भाई के सामने पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो गया था। मगर मां ने कर्ज लेकर भी उनकी पढ़ाई पूरी कराई। अब सृष्टि फ्लाइंग लेफ्टिनेंट हैं और भाई भी सेना में भर्ती की तैयारी कर रहा है।
कस्बे के मोहल्ला राजेंद्र कालोनी निवासी फ्लाइंग लेफ्टिनेंट सृष्टि वर्मा चार साल पहले दिल्ली में एमएससी कर रही थी। उस समय सृष्टि का छोटा भाई अर्पित कक्षा 11 का छात्र था। अचानक समय ने करवट बदली और सृष्टि के पिता अशोक वर्मा का निधन हो गया। पिता की मौत पर सृष्टि टूट गई थी। सृष्टि की मां बालेश गृहिणी थी, जबकि इकलौता छोटा भाई भी कमाने लायक नहीं था। ऐसे में सृष्टि को अपनी पढ़ाई की चिंता सताने लगी। पिता की मौत के बाद उनके स्थान पर मां बालेश को ऊंचागांव सोसाइटी में 12 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी मिल गई। इसी से घर का खर्च और सृष्टि व अर्पित की पढ़ाई का खर्च चला।
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सृष्टि और मां बालेश ने हिम्मत नहीं हारी और रिश्तेदारों व अन्य लोगों से कर्ज लेकर दोनों की शिक्षा जारी रखी। एमएससी पूरी करने के बाद उन्होंने वायुसेना में जाने के लिए तैयारी शुरू कर दी। दिसंबर 2018 में हैदराबाद में ट्रेनिंग पूरी कर वह फ्लाइंग लेफ्टिनेंट बन गईं। सृष्टि का भाई अर्पित भी बीकॉम करने के बाद सेना में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रहा है। सृष्टि की मां बालेश ने बताया कि उनकी बेटी ने फ्लाइंग लेफ्टिनेंट बनकर पढ़ाई के समय लिया सारा कर्ज उतार दिया है। उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है।
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