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शहर में जाम से मुक्ति के लिए शुरू हुआ काम
Fri, 07 Jun 2019 10:54 PM IST
NAVEEN GUPTA
amarujala
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Published by: NAVEEN GUPTA
Updated Fri, 07 Jun 2019 10:54 PM IST
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- फोटो : amarujala
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शहर में जाम की समस्या बेहद गंभीर है। शुगर मिल के सीजन में तो बुरा हाल हो जाता है। शहर के अंदर दो रेलवे फाटक है। यदि ये बंद हो जाएं तो समस्या ओर गहरा जाती है। इस समस्या के समाधान के लिए शहर की अग्रवाल मित्र मंडल संस्था द्वारा करीब एक साल पहले शुरू किए गए प्रयासों के बाद अब रेलवे ने शहर के दोनों रेलवे फाटकों पर अंडर पास बनाने के संबंध में साइट रिपोर्ट मांगी है। स्थानीय तकनीकी टीम ने ये रिपोर्ट तैयार कर रेलवे को भेज दी है।
ये है शहर की बड़ी समस्या
शामली जिला सीमा से हरियाणा के दो बड़े शहर पानीपत और करनाल जुड़ा हैं। शहर के अंदर से ही मेरठ-करनाल-पानीपत और दिल्ली-सहारनपुर हाईवे भी गुजरता है। शहर के अंदर ही करनाल और दिल्ली हाईवे पर दो रेलवे फाटक भी हैं। दोनों फाटक दिल्ली-सहारनपुर, टपरी हरिद्वार रेलवे रूट पर हैं। एक ट्रेन के गुजरने पर दोनों फाटक बंद होते हैं। ऐसे में शहर के अंदर करीब 20 मिनट ट्रैफिक रुका रहता है। गन्ने के सीजन में तो जाम का बहुत बुरा हाल हो जाता है। कुछ दिन पहले ही जाम में एंबुलेंस के फंसने की वजह से एक किशोरी की उपचार में हुई देरी के कारण मौत हो गई थी।
जून 2018 में शुरू हुए थे प्रयास
अग्रवाल मित्र मंडल संस्था के अनुज बंसल ने बताया कि उनकी संस्था ने जून 2018 में शामली रेलवे डिविजन अभियंता एसके सप्रा से मिलकर पूरे प्रकरण की जानकारी दी थी। तय हुआ था कि दोनों रेलवे फाटकों के दोनों तरफ तीन मीटर के अंडरपास बनाए जा सकते हैं। इनमें चार और दोपहिया हल्के वाहन गुजर सकते हैं। इससे काफी हद तक जाम से निजात मिलेगी।
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संस्था ने दिए थे मजबूत तर्क
संस्था ने रेलवे को काफी मजबूत तर्क दिए थे। बताया था कि सहारनपुर से आने वाली रेलगाड़ी जब हिंड रेलवे हाल्ट पहुंचती है तभी शहर के अंदर पड़ने वाला धीमानपुरा रेलवे फाटक बंद कर दिया जाता है। ट्रेन को हिंड से शामली पहुंचने में करीब 15 मिनट लगते है। कभी कभी तो ये समय अधिक भी हो जाता है। इतनी देर में शहर के अंदर दोनों तरफ लंबा जाम लगा रहता है। यही हालत मेरठ-करनाल मार्ग पर पड़ने वाले रेलवे फाटक की रहती है। जबकि रेलवे के नियमानुसार फाटक बंद करने का अधिकतम समय 10 मिनट से अधिक नहीं होना चाहिए। ये भी तर्क दिया गया था कि दोनों फाटकों के पास रेलवे की काफी जमीन भी पड़ी है। ऐसे में जमीन संबंधी व्यवहारिक दिक्कत भी नहीं आएगी।
रेलगाड़ियों का होता है संचालन
दिल्ली-सहारनपुर, टपरी हरिद्वार रेलवे रूट पर करीब 28 रेलगाडियों का संचालन होता है। रेलमार्ग के दोहरीकरण और विद्युतीकरण का कार्य भी तेजी से चल रहा है। इसलिए इस रूट पर ट्रेनों की संख्या भविष्य में ओर अधिक बढ़ सकती है।
आबादी और धार्मिक इमारतों के चलते पुल संभव नहीं
संस्था ने रेलवे अफसरों को बताया था कि रेल फाटकों पर ओवरब्रिज निर्माण संभव नहीं है। क्योंकि शहर के अंदर धीमानपुरा रेलवे फाटक से कुछ ही दूर एक धार्मिक स्थल है। साथ ही शहर की आबादी भी पड़ती है। व्यापारी भी यहां ओवरब्रिज का विरोध कर चुके हैं। इसी वजह से यहां अंडर पास ही सबसे बेहतर विकल्प है।
दिल्ली डिविजन को भेजी साइट रिपोर्ट
अग्रवाल मित्र मंडल संस्था के अनुज बंसल ने बताया कि उनकी संस्था के सुझाव पर रेलवे ने स्थानीय अधिकारियों से रिपोर्ट मांग ली है। रेलवे के एक मंडल स्तरीय तकनीकी अधिकारी ने बताया कि दिल्ली डिविजन द्वारा अग्रवाल मित्र मंडल संस्था के प्रस्ताव पर साइट रिपोर्ट मांगी है।
तीन मीनार ऊंचाई वाले अंडर पास
दोनों फाटकों पर तीन तीन मीटर ऊंचाई वाले अंडर पास बनाने का प्रस्ताव है। जिस पर दोनों जगहों पर तकनीकी टीम के साथ मौका मुआयना कर साइट रिपोर्ट तैयार की गई। नक्शे आदि बनाकर दिल्ली डिवीजन को भेज दिए गए है। रेलवे द्वारा ही इसमें आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। तीन मीटर गहराई वाले अंडर पास के लिए भी करीब 60 मीटर जगह चाहिए। यदि काम शुरू हुआ तो रेलवे द्वारा अंडर पास बनाया जाएगा और लोकनिर्माण विभाग द्वारा दोनों तरफ अप्रोच रोड बनाई जाएगी।
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ये है शहर की बड़ी समस्या
शामली जिला सीमा से हरियाणा के दो बड़े शहर पानीपत और करनाल जुड़ा हैं। शहर के अंदर से ही मेरठ-करनाल-पानीपत और दिल्ली-सहारनपुर हाईवे भी गुजरता है। शहर के अंदर ही करनाल और दिल्ली हाईवे पर दो रेलवे फाटक भी हैं। दोनों फाटक दिल्ली-सहारनपुर, टपरी हरिद्वार रेलवे रूट पर हैं। एक ट्रेन के गुजरने पर दोनों फाटक बंद होते हैं। ऐसे में शहर के अंदर करीब 20 मिनट ट्रैफिक रुका रहता है। गन्ने के सीजन में तो जाम का बहुत बुरा हाल हो जाता है। कुछ दिन पहले ही जाम में एंबुलेंस के फंसने की वजह से एक किशोरी की उपचार में हुई देरी के कारण मौत हो गई थी।
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जून 2018 में शुरू हुए थे प्रयास
अग्रवाल मित्र मंडल संस्था के अनुज बंसल ने बताया कि उनकी संस्था ने जून 2018 में शामली रेलवे डिविजन अभियंता एसके सप्रा से मिलकर पूरे प्रकरण की जानकारी दी थी। तय हुआ था कि दोनों रेलवे फाटकों के दोनों तरफ तीन मीटर के अंडरपास बनाए जा सकते हैं। इनमें चार और दोपहिया हल्के वाहन गुजर सकते हैं। इससे काफी हद तक जाम से निजात मिलेगी।
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संस्था ने दिए थे मजबूत तर्क
संस्था ने रेलवे को काफी मजबूत तर्क दिए थे। बताया था कि सहारनपुर से आने वाली रेलगाड़ी जब हिंड रेलवे हाल्ट पहुंचती है तभी शहर के अंदर पड़ने वाला धीमानपुरा रेलवे फाटक बंद कर दिया जाता है। ट्रेन को हिंड से शामली पहुंचने में करीब 15 मिनट लगते है। कभी कभी तो ये समय अधिक भी हो जाता है। इतनी देर में शहर के अंदर दोनों तरफ लंबा जाम लगा रहता है। यही हालत मेरठ-करनाल मार्ग पर पड़ने वाले रेलवे फाटक की रहती है। जबकि रेलवे के नियमानुसार फाटक बंद करने का अधिकतम समय 10 मिनट से अधिक नहीं होना चाहिए। ये भी तर्क दिया गया था कि दोनों फाटकों के पास रेलवे की काफी जमीन भी पड़ी है। ऐसे में जमीन संबंधी व्यवहारिक दिक्कत भी नहीं आएगी।
रेलगाड़ियों का होता है संचालन
दिल्ली-सहारनपुर, टपरी हरिद्वार रेलवे रूट पर करीब 28 रेलगाडियों का संचालन होता है। रेलमार्ग के दोहरीकरण और विद्युतीकरण का कार्य भी तेजी से चल रहा है। इसलिए इस रूट पर ट्रेनों की संख्या भविष्य में ओर अधिक बढ़ सकती है।
आबादी और धार्मिक इमारतों के चलते पुल संभव नहीं
संस्था ने रेलवे अफसरों को बताया था कि रेल फाटकों पर ओवरब्रिज निर्माण संभव नहीं है। क्योंकि शहर के अंदर धीमानपुरा रेलवे फाटक से कुछ ही दूर एक धार्मिक स्थल है। साथ ही शहर की आबादी भी पड़ती है। व्यापारी भी यहां ओवरब्रिज का विरोध कर चुके हैं। इसी वजह से यहां अंडर पास ही सबसे बेहतर विकल्प है।
दिल्ली डिविजन को भेजी साइट रिपोर्ट
अग्रवाल मित्र मंडल संस्था के अनुज बंसल ने बताया कि उनकी संस्था के सुझाव पर रेलवे ने स्थानीय अधिकारियों से रिपोर्ट मांग ली है। रेलवे के एक मंडल स्तरीय तकनीकी अधिकारी ने बताया कि दिल्ली डिविजन द्वारा अग्रवाल मित्र मंडल संस्था के प्रस्ताव पर साइट रिपोर्ट मांगी है।
तीन मीनार ऊंचाई वाले अंडर पास
दोनों फाटकों पर तीन तीन मीटर ऊंचाई वाले अंडर पास बनाने का प्रस्ताव है। जिस पर दोनों जगहों पर तकनीकी टीम के साथ मौका मुआयना कर साइट रिपोर्ट तैयार की गई। नक्शे आदि बनाकर दिल्ली डिवीजन को भेज दिए गए है। रेलवे द्वारा ही इसमें आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। तीन मीटर गहराई वाले अंडर पास के लिए भी करीब 60 मीटर जगह चाहिए। यदि काम शुरू हुआ तो रेलवे द्वारा अंडर पास बनाया जाएगा और लोकनिर्माण विभाग द्वारा दोनों तरफ अप्रोच रोड बनाई जाएगी।