{"_id":"57683d4a4f1c1bd773b48532","slug":"pressing-political-issue-of-payment-at-little-charade","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजनीतिक नूरा कुश्ती में दबा भुगतान का मुद्दा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजनीतिक नूरा कुश्ती में दबा भुगतान का मुद्दा
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Tue, 21 Jun 2016 12:30 AM IST
विज्ञापन
sugar cane (file photo)
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शामली। पलायन प्रकरण का राग क्या छिड़ा, गन्ना बेल्ट का असली मुद्दा ही भुला दिया। क्षेत्र के किसान त्रस्त हैं गन्ना मूल्य भुगतान न होने की वजह से। इसके बावजूद राजनीतिक पार्टियां इसे मुद्दा नहीं बना रही। हर राजनीतिक पार्टी पलायन प्रकरण पर उलझी हुई हैं।
जिले में अपर दोआब शुगर मिल शामली, बजाज हिन्दुस्तान शुगर मिल थानाभवन और सुपीरियर फूड्स प्राइवेट लिमिटेड मिल ऊन पर किसानों का करीब 293 करोड़ 16 लाख रुपये बकाया है।
पलायन प्रकरण उठने से पूर्व में गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही थी। भाकियू ने कलक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन किया था, तो रालोद ने शामली शुगर मिल का घेराव किया था। भाजपा नेता भी गन्ना मूल्य भुगतान दिलाने की मांग कर रहे थे, मगर कैराना पलायन प्रकरण उठने के बाद गन्ना मूल्य भुगतान का मुद्दा दबा दिया गया। देश दुनिया में कैराना पलायन ही छाया हुआ है, मगर क्षेत्र के किसानों की पीड़ा किसी को नजर नहीं आ रही।
विज्ञापन
पलायन के नाम पर किसानों की समस्या पीछे छोड़ दी गई, मगर भारतीय किसान यूनियन चुप नहीं बैठेगी। गन्ना मूल्य भुगतान दिलाने के लिए नए सिरे से आंदोलन की तैयारी की जाएगी। - कुलदीप पंवार, प्रदेश प्रवक्ता भाकियू
क्षेत्र के किसानों की सबसे बड़ी समस्या गन्ना मूल्य भुगतान है। पैसा न मिलने के कारण किसानों की दुर्दशा हुई। भाजपा और सपा पलायन के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंक रही हैं तथा हिन्दू मुस्लिमों को लड़ाने की साजिश की जा रही है। - बाबा सूरजमल, बतीसा खाप
बकाया गन्ना मूल्य की स्थिति
मिल बकाया गन्ना खरीद
शामली 135 करोड़ 80 लाख 80.97 लाख क्विंटल
ऊन 68 करोड़ 10 लाख 34.42 लाख क्विंटल
थानाभवन 125 करोड़ 49 लाख 77.72 लाख क्विंटल
कुल 293 करोड़ 16 लाख 193.11 लाख क्विंटल
राजनीतिक दलों को क्षेत्र के किसानों की कतई चिंता नहीं है। यदि चिंता होती तो पलायन के नाम पर इतना बखेड़ा खड़ा नहीं करते। जानबूझकर पलायन प्रकरण को हवा दी गई, ताकि किसानों की आवाज दबा दी जाए। - जितेंद्र सिंह हुड्डा, किसान
बच्चों की पढ़ाई से लेकर शादी ब्याह के खर्च में पैसे की जरूरत होती है। किसानों ने पसीने की कमाई मिल मालिकों को दे दी, मगर अब राजनीतिक दल पलायन के नाम पर किसानों के मुद्दे को भटकाने में लगे हैं। - राजपाल सिंह, किसान
विज्ञापन
जिले में अपर दोआब शुगर मिल शामली, बजाज हिन्दुस्तान शुगर मिल थानाभवन और सुपीरियर फूड्स प्राइवेट लिमिटेड मिल ऊन पर किसानों का करीब 293 करोड़ 16 लाख रुपये बकाया है।
विज्ञापन
पलायन प्रकरण उठने से पूर्व में गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही थी। भाकियू ने कलक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन किया था, तो रालोद ने शामली शुगर मिल का घेराव किया था। भाजपा नेता भी गन्ना मूल्य भुगतान दिलाने की मांग कर रहे थे, मगर कैराना पलायन प्रकरण उठने के बाद गन्ना मूल्य भुगतान का मुद्दा दबा दिया गया। देश दुनिया में कैराना पलायन ही छाया हुआ है, मगर क्षेत्र के किसानों की पीड़ा किसी को नजर नहीं आ रही।
विज्ञापन
पलायन के नाम पर किसानों की समस्या पीछे छोड़ दी गई, मगर भारतीय किसान यूनियन चुप नहीं बैठेगी। गन्ना मूल्य भुगतान दिलाने के लिए नए सिरे से आंदोलन की तैयारी की जाएगी। - कुलदीप पंवार, प्रदेश प्रवक्ता भाकियू
क्षेत्र के किसानों की सबसे बड़ी समस्या गन्ना मूल्य भुगतान है। पैसा न मिलने के कारण किसानों की दुर्दशा हुई। भाजपा और सपा पलायन के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंक रही हैं तथा हिन्दू मुस्लिमों को लड़ाने की साजिश की जा रही है। - बाबा सूरजमल, बतीसा खाप
बकाया गन्ना मूल्य की स्थिति
मिल बकाया गन्ना खरीद
शामली 135 करोड़ 80 लाख 80.97 लाख क्विंटल
ऊन 68 करोड़ 10 लाख 34.42 लाख क्विंटल
थानाभवन 125 करोड़ 49 लाख 77.72 लाख क्विंटल
कुल 293 करोड़ 16 लाख 193.11 लाख क्विंटल
राजनीतिक दलों को क्षेत्र के किसानों की कतई चिंता नहीं है। यदि चिंता होती तो पलायन के नाम पर इतना बखेड़ा खड़ा नहीं करते। जानबूझकर पलायन प्रकरण को हवा दी गई, ताकि किसानों की आवाज दबा दी जाए। - जितेंद्र सिंह हुड्डा, किसान
बच्चों की पढ़ाई से लेकर शादी ब्याह के खर्च में पैसे की जरूरत होती है। किसानों ने पसीने की कमाई मिल मालिकों को दे दी, मगर अब राजनीतिक दल पलायन के नाम पर किसानों के मुद्दे को भटकाने में लगे हैं। - राजपाल सिंह, किसान