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गांव में जुटते गए लोग, बढ़ता गया गुस्सा
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शामली क्षेत्र के गांव लांक में बीएसएफ के अधिकारी से जानकारी लेते ग्रामीण
- फोटो : SHAMLI
गांव में जुटते गए लोग, बढ़ता गया गुस्सा
शामली। घटना के चौथे दिन बीएसएफ जवान विकास कुमार का शव उनके गांव लांक पहुंचा। उनके शरीर पर चोट के निशान देख परिजनों ने अंतिम संस्कार से इंकार कर दिया। गांव में लोगों की भीड़ जुटती गई और दिन चढ़ने के साथ ही लोगों का आक्रोश भी बढ़ता गया। ग्रामीण जवान को शहीद का दर्जा देने और शव का फिर से पोस्टमार्टम कराने की मांग पर अड़ गए। डीएम और एसपी ने दोबारा पोस्टमार्टम कराने का परिजनों और ग्रामीणों को आश्वासन दिया। अधिकारियों के गांव से जाते ही ग्रामीण फिर भड़क उठे और हंगामा करते हुए शव को नहीं उठने दिया। ग्रामीणों ने भाजपा के जनप्रतिनिधियों के नहीं आने पर भी रोष जताया।
बीएसएफ जवान विकास कुमार का शव गांव आते ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। विभिन्न राजनीतिक दलों के अलावा गठवाला खाप के चौधरी बाबा हरिकिशन मलिक के पुत्र राजेंद्र मलिक, भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत समेत अन्य गण्यमान्य लोग पहुंच गए। गांव के ही श्री सनातन धर्म संस्कृत पाठशाला में पंचायत शुरू हो गई और इसमें विकास कुमार को शहीद का दर्जा देने की मांग जोरशोर से उठाई गई।
गठवाला खाप से राजेंद्र मलिक ने कहा कि यह पूरे क्षेत्र के सम्मान का विषय है। विकास कुमार को शहीद का दर्जा दिया जाए। चेतावनी दी कि गई यदि दो बजे से पहले उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो शव लेकर कलक्ट्रेट पहुंच जाएंगे। पूर्व विधायक किरनपाल कश्यप, सुधाकर कश्यप, देशराज भनेड़ा, वीर सिंह मलिक, रणधावा मलिक, योगेंद्र चेयरमैन, लांक थांबेदार राजवीर मलिक, लोकेंद्र लांक, जगवीर फौजी, पप्पू मलिक आदि ने भी बीएसएफ जवान को शहीद का दर्जा उठाने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई।
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रालोद नेता राजन जावला, विक्रांत जावला के अलावा सोनू मलिक, सुनील मलिक कुड़ाना ने भी गांव में पहुंचकर जवान के पिता से बात की। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि यह उनके क्षेत्र की दुखद घटना है। वह इस मसले में ऊपरी स्तर पर बात करेंगे।
विकास कुमार पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के सीमानगर में तैनात थे और रविवार रात गोली लगने से उनकी मौत हो गई। बीएसएफ एसआई अनंद कुमार दलाल फ्लाइट से जवान का शव दिल्ली लाए। जहां से साथी एसआई, जवान के निरंजन रेड्डी, जेवी रेड्डी आदि अपने वाहन से शव लेकर सुबह 6.20 बजे लांक आए। शव को देखते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
पत्नी ने जताई हत्या की आशंका,
प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया
जवान विकास कुमार की पत्नी पंपा मेहता ने बताया कि उसे शुरू में पति की मौत की सूचना नहीं दी गई। बाद में बताया गया कि उसने आत्महत्या की है। वह नदिया पहुंची तो वहां शव को देखने नहीं दिया। अलग फ्लाइट से अपने एक साल के बेटे, भाइयों व मां के साथ गांव आई है। यहीं पर अपने पति के शव को देख सकी। 2018 में जब से उनकी शादी हुई, तभी से अधिकारी उनसे नाराज थे। विकास को प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति के पैरों और हाथों के अंगुठों के नाखून खींचे गए हैं और शरीर पर चोटों के निशान हैं। उनकी हत्या हुई है। पिता भंवर सिंह ने भी हत्या का शक जताया।
डीएम-एसपी के जाते ही फिर भड़के ग्रामीण
दोपहर करीब 12.30 बजे डीएम जसजीत कौर और एसपी विनीत जायसवाल गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की मांग पर दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आश्वासन दिया। कहा कि पश्चिमी बंगाल में हुए पोस्टमार्टम रिपोर्ट मंगाई जा रही है। उसके आने के बाद पोस्टमार्टम होगा। तब तक शव को फ्रीजर में सुरक्षित में रखवा दिया जाएगा। इस आश्वासन पर सभी शांत हो गए, लेकिन डीएम, एसपी के जाते ही फिर उग्र हो उठे और जवान को शहीद का दर्जा देने की मांग करते हुए शव को नहीं उठने दिया।
2018 में राष्ट्रपति को पत्र लिख जताई थी आशंका
शामली। जवान के पिता ने 19 जून 2018 को राष्ट्रपति से की शिकायत में कहा था कि उसके पुत्र के प्रति विभागीय अधिकारियों द्वारा षड्यंत्र किया जा रहा है। उसके मकान बनवाने के लिए गांव आने को छुट्टी भी नहीं दी गई थी। उन्होंने बेटे के साथ अप्रिय घटना की आशंका जताई थी। इसके अलावा भी कई शिकायतें कीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सीएम के नाम डीएम को दिया प्रार्थनापत्र
भंवर सिंह ने सीएम के नाम एक प्रार्थनापत्र डीएम, एसपी को दिया, जिसमें कहा गया है कि उन्हें व पुत्रवधू को पूर्ण आशंका है कि उनके पुत्र की साजिशन हत्या हुई है। नाखून गायब होने तथा चोटों के निशान से शक और प्रबल होता है। घटना का संज्ञान लेकर न्याय दिलाया जाए।
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ये रहीं प्रमुख मांगें...
- विकास कुमार को शहीद का दर्जा मिले।
- पुन: चिकित्सकों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया जाए।
- केंद्र की विश्वसनीय एजेंसी (सीबीआई) से जांच कराई जाए।
- विभाग के दोषी अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट हो।
- शहीद के परिवार के एक सदस्य को नौकरी मिले।
- परिवार को अधिकतम मुआवजा दिया जाए।
- शहीद की पत्नी को बीएसएफ अधिकारियों द्वारा परेशान न किया जाए तथा उसका तबादला निकट किया जाए।
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शामली। घटना के चौथे दिन बीएसएफ जवान विकास कुमार का शव उनके गांव लांक पहुंचा। उनके शरीर पर चोट के निशान देख परिजनों ने अंतिम संस्कार से इंकार कर दिया। गांव में लोगों की भीड़ जुटती गई और दिन चढ़ने के साथ ही लोगों का आक्रोश भी बढ़ता गया। ग्रामीण जवान को शहीद का दर्जा देने और शव का फिर से पोस्टमार्टम कराने की मांग पर अड़ गए। डीएम और एसपी ने दोबारा पोस्टमार्टम कराने का परिजनों और ग्रामीणों को आश्वासन दिया। अधिकारियों के गांव से जाते ही ग्रामीण फिर भड़क उठे और हंगामा करते हुए शव को नहीं उठने दिया। ग्रामीणों ने भाजपा के जनप्रतिनिधियों के नहीं आने पर भी रोष जताया।
बीएसएफ जवान विकास कुमार का शव गांव आते ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। विभिन्न राजनीतिक दलों के अलावा गठवाला खाप के चौधरी बाबा हरिकिशन मलिक के पुत्र राजेंद्र मलिक, भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत समेत अन्य गण्यमान्य लोग पहुंच गए। गांव के ही श्री सनातन धर्म संस्कृत पाठशाला में पंचायत शुरू हो गई और इसमें विकास कुमार को शहीद का दर्जा देने की मांग जोरशोर से उठाई गई।
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गठवाला खाप से राजेंद्र मलिक ने कहा कि यह पूरे क्षेत्र के सम्मान का विषय है। विकास कुमार को शहीद का दर्जा दिया जाए। चेतावनी दी कि गई यदि दो बजे से पहले उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो शव लेकर कलक्ट्रेट पहुंच जाएंगे। पूर्व विधायक किरनपाल कश्यप, सुधाकर कश्यप, देशराज भनेड़ा, वीर सिंह मलिक, रणधावा मलिक, योगेंद्र चेयरमैन, लांक थांबेदार राजवीर मलिक, लोकेंद्र लांक, जगवीर फौजी, पप्पू मलिक आदि ने भी बीएसएफ जवान को शहीद का दर्जा उठाने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई।
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रालोद नेता राजन जावला, विक्रांत जावला के अलावा सोनू मलिक, सुनील मलिक कुड़ाना ने भी गांव में पहुंचकर जवान के पिता से बात की। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि यह उनके क्षेत्र की दुखद घटना है। वह इस मसले में ऊपरी स्तर पर बात करेंगे।
विकास कुमार पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के सीमानगर में तैनात थे और रविवार रात गोली लगने से उनकी मौत हो गई। बीएसएफ एसआई अनंद कुमार दलाल फ्लाइट से जवान का शव दिल्ली लाए। जहां से साथी एसआई, जवान के निरंजन रेड्डी, जेवी रेड्डी आदि अपने वाहन से शव लेकर सुबह 6.20 बजे लांक आए। शव को देखते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
पत्नी ने जताई हत्या की आशंका,
प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया
जवान विकास कुमार की पत्नी पंपा मेहता ने बताया कि उसे शुरू में पति की मौत की सूचना नहीं दी गई। बाद में बताया गया कि उसने आत्महत्या की है। वह नदिया पहुंची तो वहां शव को देखने नहीं दिया। अलग फ्लाइट से अपने एक साल के बेटे, भाइयों व मां के साथ गांव आई है। यहीं पर अपने पति के शव को देख सकी। 2018 में जब से उनकी शादी हुई, तभी से अधिकारी उनसे नाराज थे। विकास को प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति के पैरों और हाथों के अंगुठों के नाखून खींचे गए हैं और शरीर पर चोटों के निशान हैं। उनकी हत्या हुई है। पिता भंवर सिंह ने भी हत्या का शक जताया।
डीएम-एसपी के जाते ही फिर भड़के ग्रामीण
दोपहर करीब 12.30 बजे डीएम जसजीत कौर और एसपी विनीत जायसवाल गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की मांग पर दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आश्वासन दिया। कहा कि पश्चिमी बंगाल में हुए पोस्टमार्टम रिपोर्ट मंगाई जा रही है। उसके आने के बाद पोस्टमार्टम होगा। तब तक शव को फ्रीजर में सुरक्षित में रखवा दिया जाएगा। इस आश्वासन पर सभी शांत हो गए, लेकिन डीएम, एसपी के जाते ही फिर उग्र हो उठे और जवान को शहीद का दर्जा देने की मांग करते हुए शव को नहीं उठने दिया।
2018 में राष्ट्रपति को पत्र लिख जताई थी आशंका
शामली। जवान के पिता ने 19 जून 2018 को राष्ट्रपति से की शिकायत में कहा था कि उसके पुत्र के प्रति विभागीय अधिकारियों द्वारा षड्यंत्र किया जा रहा है। उसके मकान बनवाने के लिए गांव आने को छुट्टी भी नहीं दी गई थी। उन्होंने बेटे के साथ अप्रिय घटना की आशंका जताई थी। इसके अलावा भी कई शिकायतें कीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सीएम के नाम डीएम को दिया प्रार्थनापत्र
भंवर सिंह ने सीएम के नाम एक प्रार्थनापत्र डीएम, एसपी को दिया, जिसमें कहा गया है कि उन्हें व पुत्रवधू को पूर्ण आशंका है कि उनके पुत्र की साजिशन हत्या हुई है। नाखून गायब होने तथा चोटों के निशान से शक और प्रबल होता है। घटना का संज्ञान लेकर न्याय दिलाया जाए।
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ये रहीं प्रमुख मांगें...
- विकास कुमार को शहीद का दर्जा मिले।
- पुन: चिकित्सकों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया जाए।
- केंद्र की विश्वसनीय एजेंसी (सीबीआई) से जांच कराई जाए।
- विभाग के दोषी अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट हो।
- शहीद के परिवार के एक सदस्य को नौकरी मिले।
- परिवार को अधिकतम मुआवजा दिया जाए।
- शहीद की पत्नी को बीएसएफ अधिकारियों द्वारा परेशान न किया जाए तथा उसका तबादला निकट किया जाए।

शामली क्षेत्र के गांव लांक में डीएम एसपी के सामने ब्यान देने जाती जवान की पत्नी पंपा देवी- फोटो : SHAMLI

शामली क्षेत्र के गांव लांक में जवान के घर पर घटना की जानकारी लेने जाते डीएम एसपी- फोटो : SHAMLI

शामली क्षेत्र के गांव लांक में बीएसएफ जवान के घर पर लगी भीड़।- फोटो : SHAMLI