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सर्किल रेट से कम पर नहीं देंगे जमीन
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Tue, 25 Oct 2016 12:24 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण की टीम ने शामली बाईपास के लिए ली जाने वाली भूमि के मुआवजे का विवाद निपटाने के लिए कई स्थानों का दौरा किया। टीम ने वर्तमान स्थिति जानी और किसानों से वार्ता की। तय किए गए मुआवजे का विरोध करने वाले भू-स्वामियों ने स्पष्ट कहा कि
उन्हें सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा दिलाया जाए।
दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन के तहत शामली बाईपास बनना है। उसके लिए दिल्ली मार्ग पर बलवा गेट के पास से मुजफ्फरनगर मार्ग पर बनत और सहारनपुर मार्ग पर र्साइंधाम तक किसानों से 182 बैनामे कराए जाने हैं। उनमें से 146 बैनामे हो चुके हैं, जबकि 37 बैनामे मुआवजे की दर को लेकर पैदा हुए विवाद के कारण नहीं हो सके। इसी विवाद का निस्तारण करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण के जीएम विजय सिंह चौधरी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार शामली आए।
सोमवार को टीम ने एसडीएम एमपी सिंह, सब रजिस्ट्रार अमित कुमार, पीडब्लूडी के इंजीनियर और अन्य अधिकारियों के साथ बनत, सेंहटा और सिंभालका पहुंचकर उन किसानों की जमीनों की मौजूदा स्थिति देखी, जो किसान मुआवजे की दर का विरोध कर रहे हैं। एसडीएम एमपी सिंह ने बताया कि टीम ने मौके मुआयना किया तथा भूमि मालिकों से भी बातचीत की गई। फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है। टीम आज बलवा गांव की जमीन देखेगी और किसानों से बातचीत करेगी। इस संबंध में सुबह दस बजे किसानों और राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों की कलक्ट्रेट में बैठक भी होगी।
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कृषि और अकृषि भूमि का है मूल विवाद
शामली बाईपास के लिए ली जाने वाली भूमि में मुआवजे की दर निर्धारित करने में कृषि और अकृषि का निर्धारण मूल विवाद बना है। प्रशासन कहता है कि खरीदी जाने वाली जमीन कृषि है, जबकि भूमि स्वामी दावा करते हैं कि सरकारी रिकॉर्ड में उनकी जमीन अकृषि दर्ज है। बनत तहसील के पास फीम सिंह की भूमि भी ली जानी है। उनके परिवार के रामेश्वर कालखंडे का कहना है कि बनत बाहरी हदूद का सर्किल रेट 5500 रुपये रिकॉर्ड में है। मुआवजे की नीति के मुताबिक अकृषि भूमि खरीदने में सर्किल रेट का दोगुना, अर्थात 11100 रुपये प्रतिवर्ग गज मुआवजा मिलना चाहिए, जबकि उपसा 2800 रुपये प्रति वर्ग गज मुआवजा देना चाहती है। इसी तरह बनत के सामने ही रामनगर कॉलोनी का सर्किल रेट 6500 रुपये है, जिससे 13000 रुपये प्रति वर्ग गज मुआवजा मिलना चाहिए, मगर वहां 4200 रुपये प्रतिवर्ग गज मुआवजा देना चाहती है।
मनमानी से नहीं होने देंगे बैनामा
कम मुआवजा होने के कारण बैनामे का विरोध करने वाले भूस्वामी प्रकाशो देवी, राकेश वर्मा, अनीता देवी, सरोज, ऊषा शर्मा, शिवनारायण, सुभाष, अनुज, सत्यवती, सतीश कुमार मिठालिया एडवोकेट, रामेश्वर कालखंडे का कहना है कि प्रशासन की मनमानी से बैनामा नहीं होने देंगे। आरोप है कि जो भूमि पूर्व में अकृषि घोषित हैं और सरकारी रिकॉर्ड में भी अकृषि दर्ज हैं, उन्हें साजिश के तहत कृषि घोषित करने की कोशिश की जा रही है।
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उन्हें सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा दिलाया जाए।
दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन के तहत शामली बाईपास बनना है। उसके लिए दिल्ली मार्ग पर बलवा गेट के पास से मुजफ्फरनगर मार्ग पर बनत और सहारनपुर मार्ग पर र्साइंधाम तक किसानों से 182 बैनामे कराए जाने हैं। उनमें से 146 बैनामे हो चुके हैं, जबकि 37 बैनामे मुआवजे की दर को लेकर पैदा हुए विवाद के कारण नहीं हो सके। इसी विवाद का निस्तारण करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण के जीएम विजय सिंह चौधरी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार शामली आए।
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सोमवार को टीम ने एसडीएम एमपी सिंह, सब रजिस्ट्रार अमित कुमार, पीडब्लूडी के इंजीनियर और अन्य अधिकारियों के साथ बनत, सेंहटा और सिंभालका पहुंचकर उन किसानों की जमीनों की मौजूदा स्थिति देखी, जो किसान मुआवजे की दर का विरोध कर रहे हैं। एसडीएम एमपी सिंह ने बताया कि टीम ने मौके मुआयना किया तथा भूमि मालिकों से भी बातचीत की गई। फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है। टीम आज बलवा गांव की जमीन देखेगी और किसानों से बातचीत करेगी। इस संबंध में सुबह दस बजे किसानों और राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों की कलक्ट्रेट में बैठक भी होगी।
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कृषि और अकृषि भूमि का है मूल विवाद
शामली बाईपास के लिए ली जाने वाली भूमि में मुआवजे की दर निर्धारित करने में कृषि और अकृषि का निर्धारण मूल विवाद बना है। प्रशासन कहता है कि खरीदी जाने वाली जमीन कृषि है, जबकि भूमि स्वामी दावा करते हैं कि सरकारी रिकॉर्ड में उनकी जमीन अकृषि दर्ज है। बनत तहसील के पास फीम सिंह की भूमि भी ली जानी है। उनके परिवार के रामेश्वर कालखंडे का कहना है कि बनत बाहरी हदूद का सर्किल रेट 5500 रुपये रिकॉर्ड में है। मुआवजे की नीति के मुताबिक अकृषि भूमि खरीदने में सर्किल रेट का दोगुना, अर्थात 11100 रुपये प्रतिवर्ग गज मुआवजा मिलना चाहिए, जबकि उपसा 2800 रुपये प्रति वर्ग गज मुआवजा देना चाहती है। इसी तरह बनत के सामने ही रामनगर कॉलोनी का सर्किल रेट 6500 रुपये है, जिससे 13000 रुपये प्रति वर्ग गज मुआवजा मिलना चाहिए, मगर वहां 4200 रुपये प्रतिवर्ग गज मुआवजा देना चाहती है।
मनमानी से नहीं होने देंगे बैनामा
कम मुआवजा होने के कारण बैनामे का विरोध करने वाले भूस्वामी प्रकाशो देवी, राकेश वर्मा, अनीता देवी, सरोज, ऊषा शर्मा, शिवनारायण, सुभाष, अनुज, सत्यवती, सतीश कुमार मिठालिया एडवोकेट, रामेश्वर कालखंडे का कहना है कि प्रशासन की मनमानी से बैनामा नहीं होने देंगे। आरोप है कि जो भूमि पूर्व में अकृषि घोषित हैं और सरकारी रिकॉर्ड में भी अकृषि दर्ज हैं, उन्हें साजिश के तहत कृषि घोषित करने की कोशिश की जा रही है।