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विशेषज्ञ चिकित्सकों के बिना ओमिक्रॉन से होगा मुकाबला
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शामली। कोरोना की तीसरी लहर की संभावना के चलते स्वास्थ्य विभाग तैयारी पूरी होने का दावा कर रहा है, लेकिन जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। कोरोना से बचाव व उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति न होने से संसाधनों का भी समुचित उपयोग नहीं हो पाता। कोरोना की दूसरी लहर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण गंभीर मरीजों को सहारनपुर व मेरठ अस्पतालों में रेफर करना पड़ा था।
कोरोना की दूसरी लहर ने जिले में कहर बरपाया था। जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से मरीजों की जान खतरे में रही थी। हालत गंभीर होने पर कोरोना के मरीजों को यहां उपचार नहीं मिल सका। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण ज्यादातर मरीजों को सहारनपुर व मेरठ मेडिकल में रेफर किया गया था। मरीजों की मौत होने की वजह चिकित्सकों की कमी भी माना गया था। अब कोरोना की तीसरी लहर की संभावना जताई गई है, लेकिन चिकित्सकों की कमी लगभग पहले की तरह ही है। जिला अस्पताल में न निश्चेतक है, न बाल रोग विशेषज्ञ और न ही महिला रोग विशषज्ञ है। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण अस्पताल में मौजूद संसाधनों का समुचित इस्तेमाल नहीं हो पाएगा।
पीकू वार्ड तैयार, बाल रोग विशेषज्ञ की जरूरत
जिला अस्पताल में कोरोना की तीसरी लहर की संभावना के चलते 50 बैड का पीकू वार्ड तैयार किया गया है, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। इसके अलावा न निश्चेतक है और न ही महिला रोग विशेषज्ञ है। ऐसे में बिना चिकित्सक के कोरोना की तीसरी लहर से बचाव व उपचार के लिए की गई तैयारी अधूरी है।
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26 वेंटिलेटर उपलब्ध, चलाने को प्रशिक्षित चिकित्सक नहीं
जिला अस्पताल में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान शासन स्तर से 26 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे। वेंटीलेटर चलाने के लिए प्रशिक्षित चिकित्सक न होने से चार-पांच वेंटिलेटर ही सेफ मोड में चलाए गए थे। अभी तक जिला अस्पताल में वेंटिलेटर चलाने के लिए प्रशिक्षित चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हुई है।
ये है जिला अस्पताल में चिकित्सकों की स्थिति
गांव मुंडेट के निकट पूर्वी यमुना नहर किनारे पिछले साल 2020 में जिला संयुक्त चिकित्सालय का भवन बनकर तैयार हो गया था। इस भवन में कोविड एल-2 अस्पताल चालू किया गया था। शासन स्तर से जिला अस्पताल के लिए 12 महिला चिकित्सक, 22 पुरुष चिकित्सक और 66 पैरा मेडिकल स्टाफ के पद स्वीकृत किए गए, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हो पाई। इस साल 16 अगस्त से जिला अस्पताल में जिला स्तर से दो चिकित्सकों की नियुक्ति कर ओपीडी चालू की गई। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आसिफ को दो माह पहले बाराबंकी से स्थानांतरण कर जिला अस्पताल में भेजा गया। वह हाल ही में ज्वाइन कर चले गए। हाल ही में ईएनटी सर्जन नेहा शर्मा की नियुक्ति हुई जबकि सहारनपुर से नेत्र सर्जन के रूप में डॉ. एसके जैन का पुन: नियोजन किया गया। इसके अलावा अस्पताल में दो संविदाकर्मी चिकित्सक हरजीत सिंह व अभिनव चतुर्वेदी, दो ईएमओ डॉ. इंतजार व डॉ. इलताफ और एक निश्चेतक डॉ. बिजेंद्र कुमार और आठ फार्मासिस्ट की ही तैनाती कुछ दिन पूर्व ही की गई है।
कोट
जिला अस्पताल में स्वीकृत पदों पर चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति के लिए शासन को पत्राचार कर डिमांड भेजी जा चुकी है। दो दिन पहले ही 30 स्टाफ नर्स और छह नर्सिंग सिस्टर की डिमांड का पत्र शासन को भेजा गया है। कोरोना की तीसरी लहर की संभावना को लेकर जिला अस्पताल में मरीजों के उपचार व बचाव की तैयारी पूरी कर ली गई है।
- डॉ. सफल कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल।
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कोरोना की दूसरी लहर ने जिले में कहर बरपाया था। जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से मरीजों की जान खतरे में रही थी। हालत गंभीर होने पर कोरोना के मरीजों को यहां उपचार नहीं मिल सका। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण ज्यादातर मरीजों को सहारनपुर व मेरठ मेडिकल में रेफर किया गया था। मरीजों की मौत होने की वजह चिकित्सकों की कमी भी माना गया था। अब कोरोना की तीसरी लहर की संभावना जताई गई है, लेकिन चिकित्सकों की कमी लगभग पहले की तरह ही है। जिला अस्पताल में न निश्चेतक है, न बाल रोग विशेषज्ञ और न ही महिला रोग विशषज्ञ है। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण अस्पताल में मौजूद संसाधनों का समुचित इस्तेमाल नहीं हो पाएगा।
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पीकू वार्ड तैयार, बाल रोग विशेषज्ञ की जरूरत
जिला अस्पताल में कोरोना की तीसरी लहर की संभावना के चलते 50 बैड का पीकू वार्ड तैयार किया गया है, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। इसके अलावा न निश्चेतक है और न ही महिला रोग विशेषज्ञ है। ऐसे में बिना चिकित्सक के कोरोना की तीसरी लहर से बचाव व उपचार के लिए की गई तैयारी अधूरी है।
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26 वेंटिलेटर उपलब्ध, चलाने को प्रशिक्षित चिकित्सक नहीं
जिला अस्पताल में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान शासन स्तर से 26 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे। वेंटीलेटर चलाने के लिए प्रशिक्षित चिकित्सक न होने से चार-पांच वेंटिलेटर ही सेफ मोड में चलाए गए थे। अभी तक जिला अस्पताल में वेंटिलेटर चलाने के लिए प्रशिक्षित चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हुई है।
ये है जिला अस्पताल में चिकित्सकों की स्थिति
गांव मुंडेट के निकट पूर्वी यमुना नहर किनारे पिछले साल 2020 में जिला संयुक्त चिकित्सालय का भवन बनकर तैयार हो गया था। इस भवन में कोविड एल-2 अस्पताल चालू किया गया था। शासन स्तर से जिला अस्पताल के लिए 12 महिला चिकित्सक, 22 पुरुष चिकित्सक और 66 पैरा मेडिकल स्टाफ के पद स्वीकृत किए गए, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हो पाई। इस साल 16 अगस्त से जिला अस्पताल में जिला स्तर से दो चिकित्सकों की नियुक्ति कर ओपीडी चालू की गई। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आसिफ को दो माह पहले बाराबंकी से स्थानांतरण कर जिला अस्पताल में भेजा गया। वह हाल ही में ज्वाइन कर चले गए। हाल ही में ईएनटी सर्जन नेहा शर्मा की नियुक्ति हुई जबकि सहारनपुर से नेत्र सर्जन के रूप में डॉ. एसके जैन का पुन: नियोजन किया गया। इसके अलावा अस्पताल में दो संविदाकर्मी चिकित्सक हरजीत सिंह व अभिनव चतुर्वेदी, दो ईएमओ डॉ. इंतजार व डॉ. इलताफ और एक निश्चेतक डॉ. बिजेंद्र कुमार और आठ फार्मासिस्ट की ही तैनाती कुछ दिन पूर्व ही की गई है।
कोट
जिला अस्पताल में स्वीकृत पदों पर चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति के लिए शासन को पत्राचार कर डिमांड भेजी जा चुकी है। दो दिन पहले ही 30 स्टाफ नर्स और छह नर्सिंग सिस्टर की डिमांड का पत्र शासन को भेजा गया है। कोरोना की तीसरी लहर की संभावना को लेकर जिला अस्पताल में मरीजों के उपचार व बचाव की तैयारी पूरी कर ली गई है।
- डॉ. सफल कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल।