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मासूम की किलकारी से भी नहीं पसीजा मां का दिल
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Mon, 06 Jun 2016 12:08 AM IST
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शामली। ‘लबों पे उसके कभी बददुआ नहीं होती, बस एक मां है जो मुझसे खफा नहीं होती...।’ मशहूर शायर मुनव्वर राणा की ये पंक्तियां मां और उसके बच्चे के बीच ममता, प्यार, और त्याग की अनूठी तस्वीर पेश करती है। मगर रविवार को शामली पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एक मां का जो रूप देखा, उससे हर कोई हैरान रह गया।
सात माह की मासूम बिटिया को रोती बिलखती हालत में कुर्सी पर छोड़कर महिला चली गई। ममता की मूरत कही जाने वाली मां का दिल जरा भी नहीं पसीजा कि वह फूल सी बच्ची को गले से लगा ले। लोग यही सोचते रह गए कि यह महिला पत्थर दिल थी या फिर उसकी इतनी बड़ी मजबूरी कि बिटिया को साथ भी न ले जा सके।
कालेज में पढ़ने वाली एक युवती ने युवक से प्रेम-प्रसंग के चलते 2014 में अपनी मर्जी से शादी की। दोनों की शादी को उनके परिजनों ने स्वीकार कर लिया और हंसी खुशी से रहने लगे। महिला ने एक बेटी को जन्म दिया। उसके बाद दोनों में झगड़ा शुरू हो गया। युवती के पिता ने कोतवाली में शिकायत की तो मामला परिवार परामर्श केंद्र में पहुंचा। रविवार को इस मामले में सुनवाई की तिथि निर्धारित थी। इसके चलते दोनों अपने अपने परिजनों के साथ एसपी आफिस पर पहुंच गए।
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सुनवाई तो हुई लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया। इसी दौरान महिला ने गुस्से में आकर सात माह की बेटी को कुर्सी पर पटका और चल दी। परिवार परामर्श केंद्र वालों ने समझाया कि यह तुम्हारी बेटी है, लेकिन महिला नहीं मानी। गर्मी के चलते मासूम बेटी कुर्सी पर जाती हुई मां की ओर देखकर किलकारियां मारने लगी। लेकिन इस पर परिवार परामर्श केंद्र वालों ने बेटी के पिता को समझाया। काफी देर बाद बाप से अपनी बेटी को गले लगाकर उसके लिए दूध का इंतजाम कराया, लेकिन मां की बेरुखी और ममत्व की आस में मासूम रोती रही।
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सात माह की मासूम बिटिया को रोती बिलखती हालत में कुर्सी पर छोड़कर महिला चली गई। ममता की मूरत कही जाने वाली मां का दिल जरा भी नहीं पसीजा कि वह फूल सी बच्ची को गले से लगा ले। लोग यही सोचते रह गए कि यह महिला पत्थर दिल थी या फिर उसकी इतनी बड़ी मजबूरी कि बिटिया को साथ भी न ले जा सके।
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कालेज में पढ़ने वाली एक युवती ने युवक से प्रेम-प्रसंग के चलते 2014 में अपनी मर्जी से शादी की। दोनों की शादी को उनके परिजनों ने स्वीकार कर लिया और हंसी खुशी से रहने लगे। महिला ने एक बेटी को जन्म दिया। उसके बाद दोनों में झगड़ा शुरू हो गया। युवती के पिता ने कोतवाली में शिकायत की तो मामला परिवार परामर्श केंद्र में पहुंचा। रविवार को इस मामले में सुनवाई की तिथि निर्धारित थी। इसके चलते दोनों अपने अपने परिजनों के साथ एसपी आफिस पर पहुंच गए।
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सुनवाई तो हुई लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया। इसी दौरान महिला ने गुस्से में आकर सात माह की बेटी को कुर्सी पर पटका और चल दी। परिवार परामर्श केंद्र वालों ने समझाया कि यह तुम्हारी बेटी है, लेकिन महिला नहीं मानी। गर्मी के चलते मासूम बेटी कुर्सी पर जाती हुई मां की ओर देखकर किलकारियां मारने लगी। लेकिन इस पर परिवार परामर्श केंद्र वालों ने बेटी के पिता को समझाया। काफी देर बाद बाप से अपनी बेटी को गले लगाकर उसके लिए दूध का इंतजाम कराया, लेकिन मां की बेरुखी और ममत्व की आस में मासूम रोती रही।