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-कैकेई ने मांगे दो वरदान, भरत का राज तिलक, श्रीराम सीता और लक्ष्मण संग चले बनवास-
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भरत का राजतिलक, श्रीराम, सीता और लक्ष्मण संग चले वनवास
श्री हनुमान धाम पर 53वां श्रीरामलीला महोत्सव, दर्शकों की उमड़ने लगी भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। श्री हनुमान धाम के श्री रामलीला रंगमंच में 53वें श्री रामलीला महोत्सव में श्री अनंत भक्ति प्रकाश मंडल मथुरा के कलाकारों ने श्रीराम वनवास मार्मिक लीला का शानदार मंचन किया। श्रीरामलीला महोत्सव में दर्शकों की भीड़ उमड़ने लगी हैं।
श्री हनुमान धाम के श्री रामलीला रंगमंच में श्री रामलीला महोत्सव में राजा दशरथ महर्षि विश्वामित्र से श्रीराम को राजतिलक करने के संबंध में विमर्श करते हैं। इसके पश्चात राजा दशरथ श्रीराम के राजतिलक की घोषणा कर देते हैं। इससे अयोध्या की जनता इससे खुश है। वहीं, दूसरी ओर कैकेई की दासी मंथरा श्रीराम के राजतिलक की घोषणा के बारे मेें बताती है। मंथरा श्रीराम के स्थान पर भरत को राजा बनाने की सलाह कैकेई को देती है।
दासी मंथरा कैकेई को राजा से दो वरदान मांगने की सलाह देती है। मंथरा की सलाह पर रानी कैकेई कोप भवन में चली जाती है। राजा दशरथ रानी कैकेई के राजमहल में आते हैं। वहां पर रानी कैकेई को कोपभवन में होने की जानकारी राजा दशरथ को मिलती है। इस पर कोप भवन में रानी कैकेई से मिलते हैं। रानी कैकेई पहले वरदान में भरत को राजतिलक और दूसरे में श्रीराम को 14 वर्ष में वनवास मांगती हैं। जिसे सुनकर राजा दशरथ रानी को समझाने का प्रयास करते हैं परंतु नाकाम रहते हैं।
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राजा दशरथ बेहोश हो जाते हैं। महामंत्री सुमंत और गुरु वशिष्ठ को बुलाया जाता है। उनके कहने पर श्रीराम को रानी कैकेई के महल में बुलाया जाता है। यहां श्रीराम को पूरे घटना क्रम की जानकारी दी जाती है। इस पर श्रीराम वन जाना स्वीकार कर लेते हैं। वन जाने की अनुमति के लिए श्रीराम मां कौशल्या मिलते हैं। लक्ष्मण और सीता भी वन जाने की हठ करते हैं। आज्ञा पाकर तीनों वन जाने के लिए राजा दशरथ से आशीर्वाद लेते हैं। राजा दशरथ के आदेश पर महामंत्री सुमंत श्रीराम, सीता और लक्ष्मण को लेकर वन के प्रस्थान करते हैं।
इस अवसर पर हनुमान धाम के प्रधान सलिल द्विवेदी, सचिव राजकुमार मित्तल, मंत्री रमेश धीमान, पुनीत द्विवेदी, रामलीला महोत्सव सचिव प्रतीक अग्रवाल, व्यवस्था प्रमुख शरद द्विवेदी, कोषाध्यक्ष जोगेंद्र पाल सेठी, कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र कांबोज, सुशील संगल, दीपक सैनी, बृजमोहन शर्मा, राजकुमार मलिक, आदेश शर्मा, दिनेश पाठक आदि मौजूद रहे।
वनवासी हुए श्रीराम-लक्ष्मण और सीता
कैराना। गोशाला भवन में चल रहे श्री रामलीला महोत्सव में श्रीराम वनवास की लीला दिखाई गई। गोशाला भवन में चल रहे श्री रामलीला महोत्सव में महाराजा दशरथ श्रीराम का राज्य सौंपकर राजतिलक पर विमर्श करते हैं। गुरु वशिष्ठ से आज्ञा लेकर महाराजा दशरथ मंत्री सुमन को आदेश देते हैं। वहीं, महारानी कैकेई के महल में जाती है। वहां मंथरा वरदान के बारे में उन्हें याद दिलाती है। इस पर कैकेई ने राम को 14 वर्ष का वनवास और भरत को राजतिलक के वरदान मांगे। श्रीराम, सीता माता और लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के लिए वन चले जाते है। राम का अभिनय रोहित, लक्ष्मण का तुषार वर्मा, सीता का सागर मित्तल, दशरथ का रामअवतार मित्तल, कैकेई का सागर, मंथरा का सनी, कौशल्या का डॉ. सुशील और सुमंत का अरविंद मित्तल ने किया। संवाद
केवट संवाद की लीला देख भाव विभोर हुए श्रद्धालु
कांधला। पंजाबी धर्मशाला मे श्रीरामलीला कमेटी की ओर से निषाद भेंट और केवट संवाद की मार्मिक लीला का मंचन किया गया। श्रीराम वन गमन करते हुए अपने मित्र निषादराज से मिले। भगवान श्रीराम ने पत्नी सीता व लक्ष्मण समेत गंगा पार कराने का केवट स अनुरोध करते हैं। केवट श्री राम के चरण पखार कर तीनों को गंगापार ले जाते हैं। वहां पर भगवान श्रीराम माता सीता से मुद्रिका लेकर केवट को पार उतराई देते हैं। इस पर केवट मुद्रिका को लेने से इनकार कर देता है। भगवान को भक्ति भाव से भवसागर से पार लगाने का वरदान मांगते हैं। श्रीरामलीला महोत्सव में सर्वेश वर्मा, नवीन वर्मा, रंजन शर्मा, प्रदीप सिंघल, विष्णु शर्मा, राहुल सैनी, सहित अन्य कलाकारों ने अभिनय किया। संवाद
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श्री हनुमान धाम पर 53वां श्रीरामलीला महोत्सव, दर्शकों की उमड़ने लगी भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। श्री हनुमान धाम के श्री रामलीला रंगमंच में 53वें श्री रामलीला महोत्सव में श्री अनंत भक्ति प्रकाश मंडल मथुरा के कलाकारों ने श्रीराम वनवास मार्मिक लीला का शानदार मंचन किया। श्रीरामलीला महोत्सव में दर्शकों की भीड़ उमड़ने लगी हैं।
श्री हनुमान धाम के श्री रामलीला रंगमंच में श्री रामलीला महोत्सव में राजा दशरथ महर्षि विश्वामित्र से श्रीराम को राजतिलक करने के संबंध में विमर्श करते हैं। इसके पश्चात राजा दशरथ श्रीराम के राजतिलक की घोषणा कर देते हैं। इससे अयोध्या की जनता इससे खुश है। वहीं, दूसरी ओर कैकेई की दासी मंथरा श्रीराम के राजतिलक की घोषणा के बारे मेें बताती है। मंथरा श्रीराम के स्थान पर भरत को राजा बनाने की सलाह कैकेई को देती है।
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दासी मंथरा कैकेई को राजा से दो वरदान मांगने की सलाह देती है। मंथरा की सलाह पर रानी कैकेई कोप भवन में चली जाती है। राजा दशरथ रानी कैकेई के राजमहल में आते हैं। वहां पर रानी कैकेई को कोपभवन में होने की जानकारी राजा दशरथ को मिलती है। इस पर कोप भवन में रानी कैकेई से मिलते हैं। रानी कैकेई पहले वरदान में भरत को राजतिलक और दूसरे में श्रीराम को 14 वर्ष में वनवास मांगती हैं। जिसे सुनकर राजा दशरथ रानी को समझाने का प्रयास करते हैं परंतु नाकाम रहते हैं।
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राजा दशरथ बेहोश हो जाते हैं। महामंत्री सुमंत और गुरु वशिष्ठ को बुलाया जाता है। उनके कहने पर श्रीराम को रानी कैकेई के महल में बुलाया जाता है। यहां श्रीराम को पूरे घटना क्रम की जानकारी दी जाती है। इस पर श्रीराम वन जाना स्वीकार कर लेते हैं। वन जाने की अनुमति के लिए श्रीराम मां कौशल्या मिलते हैं। लक्ष्मण और सीता भी वन जाने की हठ करते हैं। आज्ञा पाकर तीनों वन जाने के लिए राजा दशरथ से आशीर्वाद लेते हैं। राजा दशरथ के आदेश पर महामंत्री सुमंत श्रीराम, सीता और लक्ष्मण को लेकर वन के प्रस्थान करते हैं।
इस अवसर पर हनुमान धाम के प्रधान सलिल द्विवेदी, सचिव राजकुमार मित्तल, मंत्री रमेश धीमान, पुनीत द्विवेदी, रामलीला महोत्सव सचिव प्रतीक अग्रवाल, व्यवस्था प्रमुख शरद द्विवेदी, कोषाध्यक्ष जोगेंद्र पाल सेठी, कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र कांबोज, सुशील संगल, दीपक सैनी, बृजमोहन शर्मा, राजकुमार मलिक, आदेश शर्मा, दिनेश पाठक आदि मौजूद रहे।
वनवासी हुए श्रीराम-लक्ष्मण और सीता
कैराना। गोशाला भवन में चल रहे श्री रामलीला महोत्सव में श्रीराम वनवास की लीला दिखाई गई। गोशाला भवन में चल रहे श्री रामलीला महोत्सव में महाराजा दशरथ श्रीराम का राज्य सौंपकर राजतिलक पर विमर्श करते हैं। गुरु वशिष्ठ से आज्ञा लेकर महाराजा दशरथ मंत्री सुमन को आदेश देते हैं। वहीं, महारानी कैकेई के महल में जाती है। वहां मंथरा वरदान के बारे में उन्हें याद दिलाती है। इस पर कैकेई ने राम को 14 वर्ष का वनवास और भरत को राजतिलक के वरदान मांगे। श्रीराम, सीता माता और लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के लिए वन चले जाते है। राम का अभिनय रोहित, लक्ष्मण का तुषार वर्मा, सीता का सागर मित्तल, दशरथ का रामअवतार मित्तल, कैकेई का सागर, मंथरा का सनी, कौशल्या का डॉ. सुशील और सुमंत का अरविंद मित्तल ने किया। संवाद
केवट संवाद की लीला देख भाव विभोर हुए श्रद्धालु
कांधला। पंजाबी धर्मशाला मे श्रीरामलीला कमेटी की ओर से निषाद भेंट और केवट संवाद की मार्मिक लीला का मंचन किया गया। श्रीराम वन गमन करते हुए अपने मित्र निषादराज से मिले। भगवान श्रीराम ने पत्नी सीता व लक्ष्मण समेत गंगा पार कराने का केवट स अनुरोध करते हैं। केवट श्री राम के चरण पखार कर तीनों को गंगापार ले जाते हैं। वहां पर भगवान श्रीराम माता सीता से मुद्रिका लेकर केवट को पार उतराई देते हैं। इस पर केवट मुद्रिका को लेने से इनकार कर देता है। भगवान को भक्ति भाव से भवसागर से पार लगाने का वरदान मांगते हैं। श्रीरामलीला महोत्सव में सर्वेश वर्मा, नवीन वर्मा, रंजन शर्मा, प्रदीप सिंघल, विष्णु शर्मा, राहुल सैनी, सहित अन्य कलाकारों ने अभिनय किया। संवाद