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Shamli News: मदरसों को नोटिस देने के विरोध में जमीअल उलमा पहुंचे कलक्ट्रेट
Wed, 01 Nov 2023 06:30 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Wed, 01 Nov 2023 06:30 PM IST
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: डीएम को साैंपा ज्ञापन, नोटिस जल्द वापस लेने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले के विभिन्न स्थानों के मदरसों को दिए गए नोटिस के विरोध में जमीअत उलमा के पदाधिकारियों ने बुधवार को कलक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को ज्ञापन सौंपा। नोटिस वापस लेने की मांग की।
जमीअत उलमा के पदाधिकारियों ने कहा कि जिले में ऐसे अनेक मदरसे हैं, जिनमें निशुल्क धार्मिक शिक्षा प्रदान की जाती है तथा यह गैर सरकारी सहायता प्राप्त हैं। उक्त मदरसों में कक्षाओं का आयोजन नहीं किया जाता और न ही शिक्षा के प्रमाणपत्र वितरित किए गए हैं। मदरसे आजादी से पूर्व चले आ रहे हैं। मदरसे विद्यालयों की श्रेणी में नहीं आते। मगर कुछ मदरसों पर कुछ दिन पूर्व ही शिक्षा विभाग द्वारा यह कहते हुए नोटिस जारी किए गए कि उक्त मदरसों को मान्यता प्राप्त नहीं है, इसलिए उक्त मदरसों को तत्काल बंद किया जाए। ऐसा नहीं करने पर विभागीय कार्रवाई की बात कही।
लगातार जारी किए जा रहे नोटिस से मुस्लिम समुदाय के लोगों में आक्रोश है। निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम 2009 के संशोधित अधिनियम 2012 की धारा दो और पांच में उल्लेख किया गया है कि यह अधिनियम मुस्लिम मदरसों, वैदिक पाठशालाओं, धार्मिक संस्थाओं पर लागू नहीं होता। डीएम से नोटिस वापस लिए जाने की मांग जमीअत उलमा के पदाधिकारियों ने की।
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ज्ञापन देने वालों में मौलाना मो. ताहिर अध्यक्ष जमीअत उलमा शामली, मौलाना मो. तहसीम, मौलाना खुर्शीद, मौलाना मुस्तकीम, मौलाना इमरान, मौलाना अय्यूब, कारी इरशाद, कारी जुबैर, मौलाना नाजिम, मास्टर शाह आलम, कारी नजाकत, मौलाना आसिफ, मौलाना आकिल आदि शामिल रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले के विभिन्न स्थानों के मदरसों को दिए गए नोटिस के विरोध में जमीअत उलमा के पदाधिकारियों ने बुधवार को कलक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को ज्ञापन सौंपा। नोटिस वापस लेने की मांग की।
जमीअत उलमा के पदाधिकारियों ने कहा कि जिले में ऐसे अनेक मदरसे हैं, जिनमें निशुल्क धार्मिक शिक्षा प्रदान की जाती है तथा यह गैर सरकारी सहायता प्राप्त हैं। उक्त मदरसों में कक्षाओं का आयोजन नहीं किया जाता और न ही शिक्षा के प्रमाणपत्र वितरित किए गए हैं। मदरसे आजादी से पूर्व चले आ रहे हैं। मदरसे विद्यालयों की श्रेणी में नहीं आते। मगर कुछ मदरसों पर कुछ दिन पूर्व ही शिक्षा विभाग द्वारा यह कहते हुए नोटिस जारी किए गए कि उक्त मदरसों को मान्यता प्राप्त नहीं है, इसलिए उक्त मदरसों को तत्काल बंद किया जाए। ऐसा नहीं करने पर विभागीय कार्रवाई की बात कही।
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लगातार जारी किए जा रहे नोटिस से मुस्लिम समुदाय के लोगों में आक्रोश है। निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम 2009 के संशोधित अधिनियम 2012 की धारा दो और पांच में उल्लेख किया गया है कि यह अधिनियम मुस्लिम मदरसों, वैदिक पाठशालाओं, धार्मिक संस्थाओं पर लागू नहीं होता। डीएम से नोटिस वापस लिए जाने की मांग जमीअत उलमा के पदाधिकारियों ने की।
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ज्ञापन देने वालों में मौलाना मो. ताहिर अध्यक्ष जमीअत उलमा शामली, मौलाना मो. तहसीम, मौलाना खुर्शीद, मौलाना मुस्तकीम, मौलाना इमरान, मौलाना अय्यूब, कारी इरशाद, कारी जुबैर, मौलाना नाजिम, मास्टर शाह आलम, कारी नजाकत, मौलाना आसिफ, मौलाना आकिल आदि शामिल रहे।