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थानाभवन में रचा गया इतिहास
शामली, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 12 Mar 2017 12:10 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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थानाभवन। विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं। जैसे ही थानाभवन सीट के नतीजे साफ हुए तो इतिहास रच गया। पहली बार ऐसा हुआ कि यहां से किसी विधायक ने लगातार दूसरी बात वापसी की हो।
थानाभवन विधान सभा सीट से भाजपा प्रत्याशी सुरेश राणा ने लगातार दूसरी बार जीतकर इतिहास रच दिया है। ये नगर के स्वतंत्र भारत के पहली नागरिक है जो पहली व दूसरी बार विधायक बने हैं। विधायक सुरेश राणा की जीत बीजेपी के फायरब्रांड नेता होने से लोगों को सुरेश राणा के मंत्री बनने की उम्मीद बन गई है।
थानाभवन निवासी सुरेश राणा ने आरएसएस के स्वयंसेवक के रूप में अपनी पहचान बनाई और इस पहचान के साथ क्षेत्र की जनता ने उन्हें जिताकर विधायक बनाया। लेकिन जीत का अंतर बहुत कम था। जिससे वे संतुष्ट नहीं थे। इसीलिए विधायक सुरेश राणा ने अपनी विधायक निधि का पूरा पैसा में लगाया। जनता के बीच रहकर एक-एक पैसा अपनी निधि से क्षेत्र के हर गांव में लगाया। यही कारण था जहां बसपा सपा, रालोद ने जातिगत आधार पर चुनावी लगाया। वहीं सुरेश राणा ने अपने काम के आधार पर चुनाव लड़ा।
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इस विधानसभा सीट पर सुरेश राणा ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। विदित रहे 1962 में रामचंद्र सिंह, 1967 में आरसी सिंह, 1969 में राव राफेखां, 1974 में मलखान सिंह, 1977 में मूलचंद, 1980 में सोमांश प्रकाश, 1985 अमीर आलम, 1989 में नकली सिहं, 1991 में सोमांश प्रकाश, 1993 में जगत सिंह, 1996 में अमीर आलम, 2000 में जगत सिंह, 2002 में किरणपाल कश्यप, 2007 राव अब्दुल वारिस के बाद 2012 में सुरेश ने जीते। उनकी जीत के बाद भाजपा के
फायर ब्रांड नेता होने के कारण उनके समर्थकों को अब उनके मंत्री बनने पर एक नये इतिहास रचने की उम्मीद है। समर्थकों का मानना है कि अब राणा का कद और बढ़ेगा। दूसरी आैर अन्य प्रतिद्वंदियों में मुकाबले में पीछे रहने का मलाल रहा और वे समीक्षा करते रहे।
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थानाभवन विधान सभा सीट से भाजपा प्रत्याशी सुरेश राणा ने लगातार दूसरी बार जीतकर इतिहास रच दिया है। ये नगर के स्वतंत्र भारत के पहली नागरिक है जो पहली व दूसरी बार विधायक बने हैं। विधायक सुरेश राणा की जीत बीजेपी के फायरब्रांड नेता होने से लोगों को सुरेश राणा के मंत्री बनने की उम्मीद बन गई है।
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थानाभवन निवासी सुरेश राणा ने आरएसएस के स्वयंसेवक के रूप में अपनी पहचान बनाई और इस पहचान के साथ क्षेत्र की जनता ने उन्हें जिताकर विधायक बनाया। लेकिन जीत का अंतर बहुत कम था। जिससे वे संतुष्ट नहीं थे। इसीलिए विधायक सुरेश राणा ने अपनी विधायक निधि का पूरा पैसा में लगाया। जनता के बीच रहकर एक-एक पैसा अपनी निधि से क्षेत्र के हर गांव में लगाया। यही कारण था जहां बसपा सपा, रालोद ने जातिगत आधार पर चुनावी लगाया। वहीं सुरेश राणा ने अपने काम के आधार पर चुनाव लड़ा।
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इस विधानसभा सीट पर सुरेश राणा ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। विदित रहे 1962 में रामचंद्र सिंह, 1967 में आरसी सिंह, 1969 में राव राफेखां, 1974 में मलखान सिंह, 1977 में मूलचंद, 1980 में सोमांश प्रकाश, 1985 अमीर आलम, 1989 में नकली सिहं, 1991 में सोमांश प्रकाश, 1993 में जगत सिंह, 1996 में अमीर आलम, 2000 में जगत सिंह, 2002 में किरणपाल कश्यप, 2007 राव अब्दुल वारिस के बाद 2012 में सुरेश ने जीते। उनकी जीत के बाद भाजपा के
फायर ब्रांड नेता होने के कारण उनके समर्थकों को अब उनके मंत्री बनने पर एक नये इतिहास रचने की उम्मीद है। समर्थकों का मानना है कि अब राणा का कद और बढ़ेगा। दूसरी आैर अन्य प्रतिद्वंदियों में मुकाबले में पीछे रहने का मलाल रहा और वे समीक्षा करते रहे।