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मिर्च की खेती में मुनाफा तो दूर, लागत भी नहीं हो रही पूरी

Mon, 15 Jun 2020 11:06 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jun 2020 11:06 PM IST
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Farmers disappointed due to loss in chilli farming
कैराना के गांव नगला राई में खेत से मिर्च तोड़ता किसान। - फोटो : SHAMLI
मिर्च की खेती में घाटा होने से किसान मायूस
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कैराना/कांधला। एकतरफ लॉकडाउन तो दूसरी तरफ मौसम की मार से मिर्च की खेती किसानों को घाटा दे रही है। मिर्च की फसल तैयार करने में जितनी लागत आई है, उसे आधी कीमत भी मिलना मुश्किल है, यानि लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है। मुनाफा होना तो सपने देखने जैसी बात हो गई है। मंडी में पांच रुपये किलो तक मिर्च का भाव चल रहा है। एक बीघा मिर्च की फसल तैयार करने में करीब सात हजार रुपये की लागत आई है, जबकि बिक्री 4500 रुपये की मुश्किल से हो पाएगी। किसानों का कहना है कि आढ़ती और दुकानदारों से लिया उधार ही चुकता हो जाए तो गनीमत है। ऐसी स्थिति में घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
मंडी में जितना भाव उतना तुड़ाई का खर्चा
गांव नंगला बाग निवासी किसान जमीर ने बताया कि उसने पांच बीघा मिर्च की फसल बोई थी। लॉकडाउन की वजह से मंडी में मिर्च का खरीदार नहीं मिला। अब मंडी में मिर्च का भाव पांच रुपये प्रति किलो मिल रहा है, जबकि खेत में तुड़ाई करने का खर्च चार रुपये किलो है। बाकी लागत रही अलग। इस तरह से मिर्च की खेती में इस बार घाटा ही घाटा है। मिर्च की एक बीघा फसल में करीब सात हजार रुपये की लागत आई है। इस समय जो भाव मिल रहा है, उसे देखते हुए मुश्किल से 4500 रुपये हाथ आएंगे।
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मजबूरी में खुद तोड़नी पड़ रही मिर्च
गांव नंगलाराई निवासी किसान मोहसिन ने बताया कि उसने पांच बीघा मिर्च की फसल बोई थी। मंडी में मिर्च के दाम पांच रुपये किलो मिल रहे हैं, जबकि खेत से मिर्च तोड़ने की मजदूरी चार रुपये किलो है। अब जितनी तुड़ाई, उतने ही दाम तो बचत कैसे होगी। लागत और उनकी मेहनत अलग रही। मोहसिन का कहना है कि उसकी पत्नी ने कभी खेत से मिर्च नहीं तोड़ी, लेकिन आज मजबूरी में उसे भी खेत पर मिर्च तोड़नी पड़ रही है। इसकी वजह सही दाम न मिलना है।
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मुनाफा तो दूर लागत भी नहीं निकली
कांधला देहात निवासी किसान मदन ने बताया चार बीघा भूमि पर मिर्च की फसल बो रखी है। उन्होंने बताया कि आज मिर्च की फसल का बुरा हाल है। फसल को तैयार करने से लेकर मंडी तक ले जाने में छह रुपये किलो का खर्च आ रहा है, जबकि दाम भी इतने ही मिल रहे हैं। पिछले सालों में मिर्च के दाम 40 रुपये किलो तक थे, लेकिन आज कोई पूछने वाला नहीं है। फसल के लिए आढ़ती से जो उधार रुपये लिए थे, वह भी पूरे नहीं हो पा रहे है। दवा और बीज का उधार भी बाकी है। ऐसे में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।

ये है पैदावार की स्थिति
किसानों के मुताबिक एक बीघा जमीन में पहली बार में तुड़ाई होने पर करीब पांच क्विंटल मिर्च होती है। इसके बाद 20-20 दिन के अंतर पर दो बार में दो-दो क्विंटल मिर्च होती है। इस तरह से एक बीघा में करीब नौ क्विंटल मिर्च की पैदावार का औसत आता है। बारिश हो गई तो पैदावार कम हो जाती है। आज के मंडी में पांच रुपये प्रति किलो के भाव के हिसाब से एक बीघा में 4500 रुपये की मिर्च होने की उम्मीद है।
प्रति बीघा मिर्च की खेती की लागत
जुताई- 400 रुपये
पौध- 2000 रुपये
खाद- 600 रुपये
रोपाई - 500 रुपये
सिंचाई में डीजल - 400 रुपये
तुड़ाई - 3600 रुपये
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