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Shamli News: गाड़ी से हर महीने एक से पांच हजार रुपये तक होती थी एंट्री के नाम पर वसूली

Mon, 07 Aug 2023 12:31 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Aug 2023 12:31 AM IST
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Every month one to five thousand rupees were recovered from the vehicle in the name of entry
- हर महीने लाखों रुपये सरकारी राजस्व का पहुंचाया जा रहा था नुकसान
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। एआरटीओ की गाड़ी में जीपीएस डिवाइस लगाने के प्रकरण की जांच में यह सामने आया है कि जिले में एंट्री के नाम पर प्रति गाड़ी उसकी लोडिंग क्षमता के अनुसार हर महीने एक हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक की वसूली की जाती थी। अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर हर महीने लाखों रुपये सरकारी राजस्व का नुकसान पहुंचाया जाता रहा है।
एआरटीओ शामली की गाड़ी में जीपीएस डिवाइस लगाने के मामले में पकड़ा गया आरोपी सूफियान ट्रांसपोर्ट का कार्य करता है। इसके चलते उसका एआरटीओ कार्यालय से संपर्क बना रहता है। एआरटीओ रात को जब ओवरलोडिंग गाड़ियों की चेकिंग को निकलते थे, तो उनकी लोकेशन को लीक कर दी जाती थी। लोकेशन की जानकारी एआरटीओ के चालक व उससे जुड़े लोग सूफियान व आजम को देते थे।
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पुलिस के मुताबिक सूफियान व आजम अलग अलग ग्रुप में इस धंधे को अंजाम दे रहे थे। जिस मार्ग पर एआरटीओ चेकिंग करते थे, उस समय दूसरे मार्गों की ओवलोडिंग गाड़ी की एंट्री करा दी जाती थी। जब एआरटीओ दूसरे मार्ग पर जाते थे, तो पहले वाले मार्ग की ओवरलोडिंग गाड़ी निकाली जाती थी। लोकेशन लीक करने के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जाता था। इसके अलावा यह भी सामने आया है कि जब एआरटीओ चेकिंग के लिए निकलते हैं, तो इस धंधे से जुड़े लोग बाइक पर सवार लोग उनकी लोकेशन पर नजर रखते थे।
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बताया गया है कि यह धंधा नया न होकर पिछले काफी समय से चल रहा था। गाड़ी में माल की लोडिंग क्षमता के अनुसार एंट्री के नाम पर वसूली की जाती थी। छोटी से लेकर बड़ी गाड़ी के अलग-अलग रेट तय किए गए थे। इस तरह से एक हजार रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक प्रति गाड़ी से हर महीने एंट्री के नाम पर वसूली होती थी। पुलिस ने इसका तो खुलासा किया कि गाड़ियों की एंट्री कर उसे पास कराने के नाम पर पैसे लिए जाते थे, लेकिन इसका खुलासा नहीं किया कि एंट्री के नाम पर कितने रुपये लिए जाते थे।
इस धंधे में हर महीने कोड वर्ड को बदल दिया जाता था। जिस गाड़ी की एंट्री होती थी, उसकी लिस्ट बनाई जाती थी और उन गाड़ियों के चालकों को भी कोड वर्ड बताए जाते थे। जैसे ही चालक कोड वर्ड बताता था, उसे एंट्री देकर गाड़ी को पास कराया जाता था। इस तरह से विभाग के संपर्क में रहने वाले और इस वसूली के इस धंधे को करने वाले लोगों का नेटवर्क मिलकर सरकार को हर महीने लाखों रुपये राजस्व की चपत लगा रहा था। एआरटीओ रोहित राजपूत का कहना है कि एंट्री के नाम पर वसूली का मामला उनकी जानकारी में नहीं है। उनकी गाड़ी में जीपीएस लगाने का मामला सामने आने पर उन्होंने पुलिस को इस मामले से अवगत करा दिया था।
बड़े माफियाओं तक नहीं पहुंच पाई पुलिस
शामली। ओवरलोड गाड़ियों से एंट्री के नाम पर वसूली करना बड़ी बात है। इससे भी बड़ी बात ये है कि एआरटीओ की लोकेशन की जानकारी के लिए उनकी गाड़ी में जीपीएस डिवाइस लगाना। पुलिस ने अभी तक भले ही इस मामले में छह लोगों को शामिल होने का खुलासा किया हो, लेकिन इस धंधे के पीछे किसी बड़े माफिया का भी संरक्षण हो सकता है, जिसकी शह पर यह धंधा चल रहा था। हालांकि पुलिस इस प्रकरण में अभी तक किसी बड़े माफिया का नाम प्रकाश में न आने की बात कह रही है।

पहले भी लगाई जा चुकी जीपीएस
शामली। एआरटीओ की गाड़ी में जीपीएस पहले भी लगाई जा चुकी है, लेकिन उसे बाद में हटा लिया गया था। इसकी जानकारी किसी अधिकारी को नहीं मिल पाई थी। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है। इससे माना जा रहा है कि यह खेल नया न होकर पुराना चल रहा है। एआरटीओ रोहित राजपूत ने बताया कि उनकी भी जानकारी में आया कि पुलिस की पूछताछ में इससे पहले भी उनकी गाड़ी में जीपीएस लगाने की बात सामने आई है, लेकिन उस समय इसकी जानकारी नहीं हो पाई थी। इस बार सभासद के आवास पर लगे सीसीटीवी कैमरे में यह मामला कैद होने से यह मामला खुलकर सामने आ गया।
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