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Shamli News: आजादी के 78 साल बाद भी बदहाल है सोंता रसूलपुर
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संवाद न्यूज एजेंसी
थानाभवन। देश को आजाद हुए 78 साल हो गए, लेकिन थानाभवन क्षेत्र का मुस्लिम बाहुल्य गांव सोंता रसूलपुर अब भी विकास की राह देख रहा है। गांव की सड़कें कीचड़ और गंदगी से भरी पड़ी हैं। इससे लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। ईदगाह जाने वाली मुख्य सड़क तो इतनी बदहाल है कि उस पर पैदल निकलना भी नामुमकिन हो चुका है। गांव की आबादी करीब 16 हजार है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब बच्चों ने तिरंगा यात्रा व प्रभात फेरी निकाली तो उन्हें भी कीचड़ के बीच से जाना पड़ा। गांव में प्रवेश करने के लिए चाहे हिन्ड तिराहे से कैड़ी गांव की ओर या फिर हरड़ गांव की ओर से, तीनों ही रास्तों पर पानी, कीचड़ और कूड़े-कचरे का ढेर लगा रहता है। ग्रामवासी गुलफाम का कहना है कि हमने बार-बार शिकायतें कीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
राव नदीम ने बताया कि ईदगाह की ओर जाने वाली सड़क पर गंदगी और बदबू का साम्राज्य है, जिससे नमाजियों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
वहीं सुलेमान का कहना है कि गांव में प्रवेश के तीनों रास्ते टूटे और बदहाल हैं, जिन पर गंदगी का अंबार लगा रहता है।
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थानाभवन। देश को आजाद हुए 78 साल हो गए, लेकिन थानाभवन क्षेत्र का मुस्लिम बाहुल्य गांव सोंता रसूलपुर अब भी विकास की राह देख रहा है। गांव की सड़कें कीचड़ और गंदगी से भरी पड़ी हैं। इससे लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। ईदगाह जाने वाली मुख्य सड़क तो इतनी बदहाल है कि उस पर पैदल निकलना भी नामुमकिन हो चुका है। गांव की आबादी करीब 16 हजार है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब बच्चों ने तिरंगा यात्रा व प्रभात फेरी निकाली तो उन्हें भी कीचड़ के बीच से जाना पड़ा। गांव में प्रवेश करने के लिए चाहे हिन्ड तिराहे से कैड़ी गांव की ओर या फिर हरड़ गांव की ओर से, तीनों ही रास्तों पर पानी, कीचड़ और कूड़े-कचरे का ढेर लगा रहता है। ग्रामवासी गुलफाम का कहना है कि हमने बार-बार शिकायतें कीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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राव नदीम ने बताया कि ईदगाह की ओर जाने वाली सड़क पर गंदगी और बदबू का साम्राज्य है, जिससे नमाजियों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
वहीं सुलेमान का कहना है कि गांव में प्रवेश के तीनों रास्ते टूटे और बदहाल हैं, जिन पर गंदगी का अंबार लगा रहता है।