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रटने की पद्धति को छोड़कर एक्टिविटी से विद्यार्थियों को करें शिक्षित
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शामली। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान से संबद्ध सरस्वती शिशु विद्या मंदिर जूनियर हाई स्कूल शामली में तीन दिवसीय प्रधानाचार्य कार्य योजना बैठक के दूसरे दिन पश्चिमी उप्र के विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर विद्या भारती के प्रांतीय संगठन मंत्री तपन कुमार ने प्रधानाचार्यों से कहा कि प्रधानाचार्यों से कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को ध्यान में रखते हुए वर्तमान समय में शिक्षा नीति में परिवर्तन करते हुए छात्रों को शिक्षा उपलब्ध कराएं।
शनिवार को आयोजित बैठक में तपन कुमार ने कहा कि किस प्रकार से हम पढ़ाएं कि वह भली-भांति हमारी बात को समझे और पढ़ाई में पीछे न रहे, इसके लिए हमें एक्टिविटी के द्वारा विद्यार्थियों को शिक्षित करना है। रटने की पद्धति को छोड़कर बस्ते का बोझ कैसे कम हो, इसके विषय में हमें नए नए साधनों से बच्चों को शिक्षित करना है। इससे वे खेल खेल में शिक्षा ग्रहण करें। क्योंकि बच्चा एक्टिविटी और खेल की भाषा में कम समय में अधिक सीख पाता है। वर्तमान समय में रटने व रटाने की पद्धति से चल रहे शिक्षण कार्य को बदलने की जरूरत है। क्रिया आधारित और छात्र केंद्रित शिक्षण विधि अपनाकर नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षण कार्यों को लागू करें, जिससे छात्रों का सर्वांगीण विकास होगा और वह नए-नए ज्ञान से परिचित होंगे। इस अवसर पर प्रांतीय शैक्षिक प्रमुख महेशचंद शर्मा, शिशु शिक्षा समिति पश्चिमी उप्र के प्रदेश निरीक्षक शिवकुमार शर्मा, भारतीय शिक्षा समिति के प्रदेश मंत्री अरुण कुमार खंडेलवाल, शिशु शिक्षा समिति के मंत्री सुबोध चंद शर्मा आदि ने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर प्रधानाचार्य आनंद शर्मा, रविंद्र कुमार, संजय कुमार सैनी ,प्रकाशवीर, आचार्य प्रवेश कुमार शर्मा, रविंद्र कुमार, आशीष जैन, मुकेश कुमार ,सुधीर कुमार, आदेश धीमान, रामकुमार, योगेश कुमार गोविल, शिवकुमार धीमान व संजीव बालियान आदि मौजूद रहे।
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शनिवार को आयोजित बैठक में तपन कुमार ने कहा कि किस प्रकार से हम पढ़ाएं कि वह भली-भांति हमारी बात को समझे और पढ़ाई में पीछे न रहे, इसके लिए हमें एक्टिविटी के द्वारा विद्यार्थियों को शिक्षित करना है। रटने की पद्धति को छोड़कर बस्ते का बोझ कैसे कम हो, इसके विषय में हमें नए नए साधनों से बच्चों को शिक्षित करना है। इससे वे खेल खेल में शिक्षा ग्रहण करें। क्योंकि बच्चा एक्टिविटी और खेल की भाषा में कम समय में अधिक सीख पाता है। वर्तमान समय में रटने व रटाने की पद्धति से चल रहे शिक्षण कार्य को बदलने की जरूरत है। क्रिया आधारित और छात्र केंद्रित शिक्षण विधि अपनाकर नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षण कार्यों को लागू करें, जिससे छात्रों का सर्वांगीण विकास होगा और वह नए-नए ज्ञान से परिचित होंगे। इस अवसर पर प्रांतीय शैक्षिक प्रमुख महेशचंद शर्मा, शिशु शिक्षा समिति पश्चिमी उप्र के प्रदेश निरीक्षक शिवकुमार शर्मा, भारतीय शिक्षा समिति के प्रदेश मंत्री अरुण कुमार खंडेलवाल, शिशु शिक्षा समिति के मंत्री सुबोध चंद शर्मा आदि ने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर प्रधानाचार्य आनंद शर्मा, रविंद्र कुमार, संजय कुमार सैनी ,प्रकाशवीर, आचार्य प्रवेश कुमार शर्मा, रविंद्र कुमार, आशीष जैन, मुकेश कुमार ,सुधीर कुमार, आदेश धीमान, रामकुमार, योगेश कुमार गोविल, शिवकुमार धीमान व संजीव बालियान आदि मौजूद रहे।
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