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श्री बाबा नाग देवता मंदिर पहुंचे श्रद्धालु
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श्री बाबा नाग देवता मंदिर पहुंचे श्रद्धालु
गढ़ीपुख्ता। गांव हथछौया में श्री बाबा नाग देवता मंदिर पर नाग पंचमी के अवसर पर हवन-पूजन कर प्रसाद वितरण किया गया। पंडित राजपाल शास्त्री ने विधि-विधान पूर्वक हवन कराया। श्रद्धालुओं ने श्री बाबा नाग देवता पर दूध, गंगाजल व प्रसाद चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते हुए सुख शांति के लिए मनोकामना की। इसके बाद श्रद्धालुओं ने खीर का प्रसाद ग्रहण किया।
हथछौया निवासी पल्ला सैनी भगत ने बताया कि करीब सवा सौ वर्ष पहले हथछौया जंगल सीमा में भाट्टू गांव निकट बंजर भूमि पर पेड़ व झाड़ियां खड़ी थीं। हमारे पूर्वजों ने जंगल में पेड़ झाड़ियों को साफ करने के लिए बंजर भूमि में आग लगा दी थी, जिसमें नाग-नागिन का जोड़ा था। जो जलकर मर गए थे। इसके बाद हमारे पूर्वजों को रात दिन सांप दिखाई देने लगे। पंडितों से इस समस्या के लिए उपाय पूछा तो उन्होंने देव स्थान बनाने की सलाह दी। हमारे पूर्वजों ने श्री बाबा नाग देवता का देव स्थान उसी बंजर भूमि पर बना दिया था। 70 वर्ष पहले चकबंदी के बाद हथछौया-बुंटा मार्ग पर हमारे पूर्वजों की जमीन आ गई थी, जिसके बाद हमारे पूर्वजों ने श्री बाबा नाग देवता का देव स्थान हथछौया-बुंटा मार्ग पर विधि-विधान पूर्वक बना दिया। गांव में क्षेत्र के लोग आसपास के जिलों के साथ हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली के लोग श्री बाबा नाग देवता मंदिर पर आते हैं। नाग पंचमी के दिन श्रद्धालु श्री बाबा नाग देवता की पूजा करते हैं और भंडारे का आयोजन किया जाता है। वहां सच्चे मन से पूजा करने वालों की सभी मनोकामना पूरी होती है। इस दौरान हुकुम सिंह, संजय सैनी, सुरेंद्र, ऋषिपाल, विनय सैनी, प्रवीण सैनी आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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गढ़ीपुख्ता। गांव हथछौया में श्री बाबा नाग देवता मंदिर पर नाग पंचमी के अवसर पर हवन-पूजन कर प्रसाद वितरण किया गया। पंडित राजपाल शास्त्री ने विधि-विधान पूर्वक हवन कराया। श्रद्धालुओं ने श्री बाबा नाग देवता पर दूध, गंगाजल व प्रसाद चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते हुए सुख शांति के लिए मनोकामना की। इसके बाद श्रद्धालुओं ने खीर का प्रसाद ग्रहण किया।
हथछौया निवासी पल्ला सैनी भगत ने बताया कि करीब सवा सौ वर्ष पहले हथछौया जंगल सीमा में भाट्टू गांव निकट बंजर भूमि पर पेड़ व झाड़ियां खड़ी थीं। हमारे पूर्वजों ने जंगल में पेड़ झाड़ियों को साफ करने के लिए बंजर भूमि में आग लगा दी थी, जिसमें नाग-नागिन का जोड़ा था। जो जलकर मर गए थे। इसके बाद हमारे पूर्वजों को रात दिन सांप दिखाई देने लगे। पंडितों से इस समस्या के लिए उपाय पूछा तो उन्होंने देव स्थान बनाने की सलाह दी। हमारे पूर्वजों ने श्री बाबा नाग देवता का देव स्थान उसी बंजर भूमि पर बना दिया था। 70 वर्ष पहले चकबंदी के बाद हथछौया-बुंटा मार्ग पर हमारे पूर्वजों की जमीन आ गई थी, जिसके बाद हमारे पूर्वजों ने श्री बाबा नाग देवता का देव स्थान हथछौया-बुंटा मार्ग पर विधि-विधान पूर्वक बना दिया। गांव में क्षेत्र के लोग आसपास के जिलों के साथ हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली के लोग श्री बाबा नाग देवता मंदिर पर आते हैं। नाग पंचमी के दिन श्रद्धालु श्री बाबा नाग देवता की पूजा करते हैं और भंडारे का आयोजन किया जाता है। वहां सच्चे मन से पूजा करने वालों की सभी मनोकामना पूरी होती है। इस दौरान हुकुम सिंह, संजय सैनी, सुरेंद्र, ऋषिपाल, विनय सैनी, प्रवीण सैनी आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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