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जीवित व्यापारी की सत्यापन में हो गई ‘मौत’
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Mon, 27 Jun 2016 11:11 PM IST
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योगेंद्र सेठी।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली में कांधला से पलायन करने वालों की सूची के सत्यापन में बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। सत्यापन करने वाली टीम ने सूची में शामिल चार लोगों को मृत बताया था, जिनमें से एक व्यक्ति ने दावा किया है कि वह जीवित है और सत्यापन करने वालों ने उसे किसी साजिश के तहत मृत दर्शा दिया है। वह एक साल से दिल्ली के उत्तमनगर में रहकर कपड़ों का व्यापार कर रहा है।
गौरतलब है कि भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने कैराना के बाद कांधला से 63 परिवारों के पलायन की सूची जारी की थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर सूची का सत्यापन करने के लिए चार टीमें लगाई गई थीं। टीमों ने डोर टू डोर जाकर सूची का सत्यापन किया, जिसके बाद सत्यापन की फाइनल रिपोर्ट तैयार करा डीएम को सौंपी थी।
उसमें प्रशासन ने दावा किया था कि कांधला से किसी ने भी दहशत के कारण पलायन नहीं किया। अधिकांश लोग अपने बेहतर रोजगार और बच्चों की शिक्षा के लिए कस्बा कांधला से दूसरे शहरों में जाकर शिफ्ट हो गए। सूची में शामिल सतीश मित्तल निवासी कानूनगोयान, योगेंद्र सेठी कानूनगोयान, सावन पंजाबी टीचर कॉलोनी और मोहल्ला रामनगर निवासी संसार सिंह को सत्यापन रिपोर्ट में मृत दर्शाया गया था। इनमें से योगेंद्र सेठी को उसके रिश्तेदारों ने कॉल करके बताया कि प्रशासनिक स्तर पर हुई जांच में तुम्हें मृत दर्शाया गया है।
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यह मालूम चलने पर योगेंद्र सेठी परेशान हो गए। सोमवार को वह कांधला पहुंचे। योगेंद्र का आरोप है कि जांच टीम ने किसी दबाव में आकर साजिश के तहत उन्हें मृत दर्शाया है, जबकि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनका कहना है कि बिगड़ती कानून व्यवस्था और खराब माहौल के कारण ही कांधला कस्बा छोड़कर एक साल पूर्व जाना पड़ा था। अब वह दिल्ली के उत्तमनगर इलाके में कपड़ों का व्यापार करते हैं तथा परिवार भी वहीं अपने साथ रखते हैं।
योगेंद्र ने बताया कि वह कांधला में किराना की दुकान करते थे। उनके मकान में दो बार चोरी हुई थी। उधर, सूची का सत्यापन करने वाली टीम में शामिल राधेश्याम का कहना है कि जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है।
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गौरतलब है कि भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने कैराना के बाद कांधला से 63 परिवारों के पलायन की सूची जारी की थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर सूची का सत्यापन करने के लिए चार टीमें लगाई गई थीं। टीमों ने डोर टू डोर जाकर सूची का सत्यापन किया, जिसके बाद सत्यापन की फाइनल रिपोर्ट तैयार करा डीएम को सौंपी थी।
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उसमें प्रशासन ने दावा किया था कि कांधला से किसी ने भी दहशत के कारण पलायन नहीं किया। अधिकांश लोग अपने बेहतर रोजगार और बच्चों की शिक्षा के लिए कस्बा कांधला से दूसरे शहरों में जाकर शिफ्ट हो गए। सूची में शामिल सतीश मित्तल निवासी कानूनगोयान, योगेंद्र सेठी कानूनगोयान, सावन पंजाबी टीचर कॉलोनी और मोहल्ला रामनगर निवासी संसार सिंह को सत्यापन रिपोर्ट में मृत दर्शाया गया था। इनमें से योगेंद्र सेठी को उसके रिश्तेदारों ने कॉल करके बताया कि प्रशासनिक स्तर पर हुई जांच में तुम्हें मृत दर्शाया गया है।
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यह मालूम चलने पर योगेंद्र सेठी परेशान हो गए। सोमवार को वह कांधला पहुंचे। योगेंद्र का आरोप है कि जांच टीम ने किसी दबाव में आकर साजिश के तहत उन्हें मृत दर्शाया है, जबकि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनका कहना है कि बिगड़ती कानून व्यवस्था और खराब माहौल के कारण ही कांधला कस्बा छोड़कर एक साल पूर्व जाना पड़ा था। अब वह दिल्ली के उत्तमनगर इलाके में कपड़ों का व्यापार करते हैं तथा परिवार भी वहीं अपने साथ रखते हैं।
योगेंद्र ने बताया कि वह कांधला में किराना की दुकान करते थे। उनके मकान में दो बार चोरी हुई थी। उधर, सूची का सत्यापन करने वाली टीम में शामिल राधेश्याम का कहना है कि जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है।