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मांगे थे तीन लाइसेंस, मिलीं चार गोलियां
ब्यूराो /अमर उजाला, शामली
Updated Sat, 18 Feb 2017 11:59 PM IST
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muder
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। कुख्यात मुकीम काला गैंग के बदमाशों द्वारा दुकान पर पहुंचकर लूट करने और रंगदारी मांगे जाने के बाद खाद व्यापारी आदेश सैनी का परिवार दहशत में आ गया था। परिवार के तीन सदस्यों ने शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन किया। पुलिस प्रशासन ने उन्हें शस्त्र लाइसेंस तो नहीं दिया।
शनिवार को जब व्यापारी आदेश सैनी की हत्या की जानकारी कांधला में उनके पड़ोसियों और अन्य व्यापारियों को हुई, तो हर कोई यही बात कह रहा था कि पुलिस प्रशासन की निगाह में ऐसे लोग पात्र नहीं होते, जिन्हें वास्तव में लाइसेंसी शस्त्र और गनर की आवश्यकता होती है। बता दें कि जिले में 5568 लोगों के पास शस्त्र लाइसेंस है।
रसूखदार लोग अपनी राजनीतिक पहुंच का फायदा उठाकर लाइसेंस बनवा लेते हैं, मगर जरूरतमंद लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। आंखों पर पक्षपात का चश्मा लगाने वाली व्यवस्था ने शायद इसी वजह से कांधला निवासी खाद व्यापारी आदेश सैनी के परिवार का एक भी शस्त्र लाइसेंस नहीं बना।
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आदेश सैनी के भाई तरूण सैनी ने बताया कि उन्होंने अपने और पत्नी सीता सैनी (सभासद) तथा आदेश सैनी की पत्नी बबीता सैनी के नाम से शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। कई बार थाने से रिपोर्ट लगवाकर प्रशासन को भेजी गई, बावजूद इसके किसी भी फाइल को मंजूरी नहीं मिली।
आदेश की मौत पर हर आंख हुई नम
कांधला। खाद व्यापारी आदेश सैनी की हत्या पर कांधला कस्बे में शोक व्याप्त हो गया। पोस्टमार्टम के बाद शाम को आदेश का शव कांधला पहुंचा, जिसके बाद गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। शनिवार को दिन भर आदेश सैनी के घर पर लोगों की आवाजाही लगी रही। हर किसी की जुबां पर पीड़ित परिवार के लिए दर्दभरी संवेदना थी। परिजनों का कहना था कि आदेश सैनी का किसी से झगड़ा नहीं हुआ। एक टांग पर पोलियो का प्रभाव होने के बावजूद वह हमेशा परिवार की तरक्की के बारे में ही सोचता रहता था। इसी वजह से कारोबार भी फैला लिया था। शनिवार शाम जब आदेश सैनी का शव कांधला पहुंचा, तो नरेश सैनी, अरविन्द सैनी प्रधान, व्यापारी नेता ईश्वर दयाल कंसल, सचिन गोयल, पूर्व ब्लाक प्रमुख सत्यबीर सिंह, बल्लू आढ़ती, आशुतोष पांडेय, शाहरूख राज, जाहिद राज, दिनेश, बालेश्वर सैनी, देवेंद्र और राजीव शर्मा लोग पीड़ित परिवार के घर पहुंचे।
रोते रोते बेहोश हो गई आदेश की बेटी
कांधला। आदेश सैनी का शव जब कांधला में उनके आवास पर लाया गया, तो परिवार के लोग फूट फूटकर रोने लगे। उनकी बडी बेटी आयुषी बिलखते हुए अपने पापा को पुकार रही थी। इस बीच वह कई बार बेहोश तक हो गई। इस कारण डाक्टर को भी बुलाना पड़ा।
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शनिवार को जब व्यापारी आदेश सैनी की हत्या की जानकारी कांधला में उनके पड़ोसियों और अन्य व्यापारियों को हुई, तो हर कोई यही बात कह रहा था कि पुलिस प्रशासन की निगाह में ऐसे लोग पात्र नहीं होते, जिन्हें वास्तव में लाइसेंसी शस्त्र और गनर की आवश्यकता होती है। बता दें कि जिले में 5568 लोगों के पास शस्त्र लाइसेंस है।
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रसूखदार लोग अपनी राजनीतिक पहुंच का फायदा उठाकर लाइसेंस बनवा लेते हैं, मगर जरूरतमंद लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। आंखों पर पक्षपात का चश्मा लगाने वाली व्यवस्था ने शायद इसी वजह से कांधला निवासी खाद व्यापारी आदेश सैनी के परिवार का एक भी शस्त्र लाइसेंस नहीं बना।
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आदेश सैनी के भाई तरूण सैनी ने बताया कि उन्होंने अपने और पत्नी सीता सैनी (सभासद) तथा आदेश सैनी की पत्नी बबीता सैनी के नाम से शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। कई बार थाने से रिपोर्ट लगवाकर प्रशासन को भेजी गई, बावजूद इसके किसी भी फाइल को मंजूरी नहीं मिली।
आदेश की मौत पर हर आंख हुई नम
कांधला। खाद व्यापारी आदेश सैनी की हत्या पर कांधला कस्बे में शोक व्याप्त हो गया। पोस्टमार्टम के बाद शाम को आदेश का शव कांधला पहुंचा, जिसके बाद गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। शनिवार को दिन भर आदेश सैनी के घर पर लोगों की आवाजाही लगी रही। हर किसी की जुबां पर पीड़ित परिवार के लिए दर्दभरी संवेदना थी। परिजनों का कहना था कि आदेश सैनी का किसी से झगड़ा नहीं हुआ। एक टांग पर पोलियो का प्रभाव होने के बावजूद वह हमेशा परिवार की तरक्की के बारे में ही सोचता रहता था। इसी वजह से कारोबार भी फैला लिया था। शनिवार शाम जब आदेश सैनी का शव कांधला पहुंचा, तो नरेश सैनी, अरविन्द सैनी प्रधान, व्यापारी नेता ईश्वर दयाल कंसल, सचिन गोयल, पूर्व ब्लाक प्रमुख सत्यबीर सिंह, बल्लू आढ़ती, आशुतोष पांडेय, शाहरूख राज, जाहिद राज, दिनेश, बालेश्वर सैनी, देवेंद्र और राजीव शर्मा लोग पीड़ित परिवार के घर पहुंचे।
रोते रोते बेहोश हो गई आदेश की बेटी
कांधला। आदेश सैनी का शव जब कांधला में उनके आवास पर लाया गया, तो परिवार के लोग फूट फूटकर रोने लगे। उनकी बडी बेटी आयुषी बिलखते हुए अपने पापा को पुकार रही थी। इस बीच वह कई बार बेहोश तक हो गई। इस कारण डाक्टर को भी बुलाना पड़ा।