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नहीं हुआ शामली विकास प्राधिकरण का गठन
ब्यूरो/अमर उजाला, शामली
Updated Fri, 24 Mar 2017 12:50 AM IST
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विकास की हकीकत।
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शामली।जिला बनने के छह साल बाद भी अलग से शामली-कैराना-ऊन-थानाभवन विकास प्राधिकरण का गठन नहीं हो पाया है। जिससे कारण शामली को विकसित करने के लिए मास्टर प्लान नहीं बन सका। प्राधिकरण की शामली महायोजना एवं सीमा का विस्तार भी अधर में लटका है। जिले के विधायकों, राज्य मंत्रियों और मुख्यमंत्री से लोगों की उम्मीद है कि जिले के सुनियोजित विकास के लिए इस ओर ध्यान दिया जाएगा।
21 नवंबर 1996 को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मुजफ्फरनगर जिला मुख्यालय एवं उसके बड़े कस्बों शामली, बुढ़ाना, खतौली को शामिल करते हुए मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण का गठन किया गया था। जिसकी उत्तर प्रदेश शासन के आवास अनुभाग द्वारा अधिसूचना जारी की गई थी। इसका उद्देश्य मुजफ्फरनगर के साथ-साथ शामली का भी सुनियोजित विकास करना था। तीन मार्च 2003 को शासन ने कैराना, कांधला नगरपालिका परिषद को विकास प्राधिकरण में शामिल करने की अधिसूचना जारी की थी। 28 सितंबर 2011 को उतर प्रदेश शासन ने मुजफ्फरनगर जिले की शामली, कैराना तहसील को मिलाकर शामली को जिला बना दिया।
छह सालो में अभी तक उत्तर प्रदेश शासन ने इस जिले के लिए विकास प्राधिकरण का गठन नहीं किया है। विकास प्राधिकरण की सीमा विस्तार के लिए गोहरनी, मुंडेट, भैसवाल, गोहरनी, खेड़ीकरमू, टिटौली, बधेव, लिलौन, कंडेला, सिंभालका, कुड़ाना समेत बारह गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, आज तक सीमा विस्तार के लिए उत्तर प्रदेश शासन से स्वीकृति नहीं मिल पाई है। जबकि मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण का पूरा फोकस मुजफ्फरनगर जिले पर रहता है। शामली, कैराना, कांधला आदि कस्बों के सुनियोजित विकास के लिए बाईपास, सेक्टर, जोन, रोड, पार्क, कॉलोनियों का लेआउट स्वीकृत नहीं हो पाया है। इतना ही नहीं बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी लोगों को उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
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फाइलों में दब गई शामली विकास महायोजना
मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण द्वारा 2000 के दशक में शामली के सुनियोजित विकास के लिए शामली विकास महायोजना तैयार करके शासन को भेजी थी, लेकिन इस पर अमल नहीं हो सका। मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विनोद कुमार यदुवंशी का कहना है कि शामली विकास महायोजना शासन को भेजी गई थी। महायोजना पर आपत्तियां आने के बाद बारह गांवों की सीमा विस्तार का सुझाव दिया गया था। शासन से महायोजना स्वीकृत होने के बाद इसके लागू किया जाएगा। नया जिला बनाए जाने के बाद नया विकास प्राधिकरण बनाना शासन की जिम्मेदारी है। नए विकास कार्यों की योजना तैयार करने पर शासन ने पाबंदी लगा दी है।
चालीस अनाधिकृत, सिर्फ दो कॉलोनी स्वीकृत
जिला बनने के बाद शामली शहर में जमीन के दाम आसमान पर चढ़ गए। प्राइवेट कॉलोनियां विकसित हो रही हैं। मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के तहत शामली शहर में सिर्फ पानीपत रोड पर स्थित रामपुरम फेस एक, फेस दो और एसटी तिराहे पर प्रकाश कुंज स्वीकृत है। शामली जिला बनने के बाद मास्टर प्लान न बनने का लाभ उठाकर शहर के चारों ओर प्राइवेट बिल्डरों ने अनाधिकृत कॉलोनियां काटकर अंधाधुंध निर्माण कर दिया। कैराना- पानीपत रोड वीआईपी बन गया है, जहां पर बैंक्वेट हॉल, रेस्टोरेंट, होटल, शोरूम, स्कूल-कालेज, औद्योगिक संस्थान बिना मानचित्र के ही बना दिए गए। प्राधिकरण के नियमों का कोई पालन नहीं किया जा रहा है। मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता एवं कार्यालय प्रभारी सुशील शर्मा ने बताया कि शिव विहार एआरटीओ ऑफिस के सामने अंकित विहार, दयानंद नगर, मेरठ-करनाल मार्ग, बरखडी रोड, भैसवाल-गढ़ीपुख्ता रोड, पानीपत-खटीमा मार्ग समेत शहर में करीब चालीस अनाधिकृत आवासीय कॉलोनियां विकसित हो गई हैं।
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21 नवंबर 1996 को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मुजफ्फरनगर जिला मुख्यालय एवं उसके बड़े कस्बों शामली, बुढ़ाना, खतौली को शामिल करते हुए मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण का गठन किया गया था। जिसकी उत्तर प्रदेश शासन के आवास अनुभाग द्वारा अधिसूचना जारी की गई थी। इसका उद्देश्य मुजफ्फरनगर के साथ-साथ शामली का भी सुनियोजित विकास करना था। तीन मार्च 2003 को शासन ने कैराना, कांधला नगरपालिका परिषद को विकास प्राधिकरण में शामिल करने की अधिसूचना जारी की थी। 28 सितंबर 2011 को उतर प्रदेश शासन ने मुजफ्फरनगर जिले की शामली, कैराना तहसील को मिलाकर शामली को जिला बना दिया।
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छह सालो में अभी तक उत्तर प्रदेश शासन ने इस जिले के लिए विकास प्राधिकरण का गठन नहीं किया है। विकास प्राधिकरण की सीमा विस्तार के लिए गोहरनी, मुंडेट, भैसवाल, गोहरनी, खेड़ीकरमू, टिटौली, बधेव, लिलौन, कंडेला, सिंभालका, कुड़ाना समेत बारह गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, आज तक सीमा विस्तार के लिए उत्तर प्रदेश शासन से स्वीकृति नहीं मिल पाई है। जबकि मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण का पूरा फोकस मुजफ्फरनगर जिले पर रहता है। शामली, कैराना, कांधला आदि कस्बों के सुनियोजित विकास के लिए बाईपास, सेक्टर, जोन, रोड, पार्क, कॉलोनियों का लेआउट स्वीकृत नहीं हो पाया है। इतना ही नहीं बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी लोगों को उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
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फाइलों में दब गई शामली विकास महायोजना
मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण द्वारा 2000 के दशक में शामली के सुनियोजित विकास के लिए शामली विकास महायोजना तैयार करके शासन को भेजी थी, लेकिन इस पर अमल नहीं हो सका। मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विनोद कुमार यदुवंशी का कहना है कि शामली विकास महायोजना शासन को भेजी गई थी। महायोजना पर आपत्तियां आने के बाद बारह गांवों की सीमा विस्तार का सुझाव दिया गया था। शासन से महायोजना स्वीकृत होने के बाद इसके लागू किया जाएगा। नया जिला बनाए जाने के बाद नया विकास प्राधिकरण बनाना शासन की जिम्मेदारी है। नए विकास कार्यों की योजना तैयार करने पर शासन ने पाबंदी लगा दी है।
चालीस अनाधिकृत, सिर्फ दो कॉलोनी स्वीकृत
जिला बनने के बाद शामली शहर में जमीन के दाम आसमान पर चढ़ गए। प्राइवेट कॉलोनियां विकसित हो रही हैं। मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के तहत शामली शहर में सिर्फ पानीपत रोड पर स्थित रामपुरम फेस एक, फेस दो और एसटी तिराहे पर प्रकाश कुंज स्वीकृत है। शामली जिला बनने के बाद मास्टर प्लान न बनने का लाभ उठाकर शहर के चारों ओर प्राइवेट बिल्डरों ने अनाधिकृत कॉलोनियां काटकर अंधाधुंध निर्माण कर दिया। कैराना- पानीपत रोड वीआईपी बन गया है, जहां पर बैंक्वेट हॉल, रेस्टोरेंट, होटल, शोरूम, स्कूल-कालेज, औद्योगिक संस्थान बिना मानचित्र के ही बना दिए गए। प्राधिकरण के नियमों का कोई पालन नहीं किया जा रहा है। मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता एवं कार्यालय प्रभारी सुशील शर्मा ने बताया कि शिव विहार एआरटीओ ऑफिस के सामने अंकित विहार, दयानंद नगर, मेरठ-करनाल मार्ग, बरखडी रोड, भैसवाल-गढ़ीपुख्ता रोड, पानीपत-खटीमा मार्ग समेत शहर में करीब चालीस अनाधिकृत आवासीय कॉलोनियां विकसित हो गई हैं।