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गठबंधन में सीट गई, तो बदलनी पड़ेगी रणनीति
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Thu, 12 Jan 2017 12:30 AM IST
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netaji
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शामली। सपा और कांग्रेस में गठबंधन की अटकलों ने घोषित प्रत्याशियों की टेंशन बढ़ा दी है। गठबंधन फाइनल हुआ, तो प्रत्याशियों को अपनी राहें बदलनी होंगी। चर्चा है कि यदि शामली सीट गठबंधन में कांग्रेस के खाते में गई, तो सपा प्रत्याशी मनीष चौहान चुनाव मैदान में निर्दलीय भी उतर सकते हैं।
दरअसल, समाजवादी पार्टी ने शामली जिले की तीनों सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हुए हैं। शामली सीट से मनीष चौहान, थानाभवन से किरणपाल कश्यप और कैराना सीट से मौजूदा विधायक नाहिद हसन प्रत्याशी हैं। तीनों ही सीटों पर सपा प्रत्याशी अपनी चुनाव तैयारी में लगे हुए हैं, मगर कांग्रेस और सपा के बीच आगामी विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन की अटकलों ने प्रत्याशियों को दुविधा में डाल दिया है। चर्चा है कि गठबंधन में शामली सीट कांग्रेस को मिल सकती है।
क्योंकि शामली सीट पर कांग्रेस के पंकज मलिक मौजूदा विधायक हैं। सपा प्रत्याशी मनीष चौहान काफी समय से चुनाव तैयारी में लगे हैं। यदि यह सीट कांग्रेस को मिली, तो मनीष के हाथ मायूसी लगेगी, जिस कारण लंबे समय से की जा रही तैयारी पर भी पानी फिर जाएगा। वहीं, मनीष चौहान के पिता वीरेंद्र सिंह सपा एमएलसी होने के साथ ही लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं। सपा एमएलसी वीरेंद्र सिंह का कहना है कि अभी गठबंधन हुआ नहीं है, लिहाजा कोई फैसला लेना जल्दबाजी है।
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हालांकि कई दशक से हम राजनीति कर रहे हैं। समर्थक उनसे कहते हैं कि यदि सीट कांग्रेस को मिलेगी, तब भी चुनाव लड़ना है। उनका कहना है कि यदि गठबंधन हुआ और शामली सीट सपा को नहीं मिली, तभी निर्णय लिया जाएगा कि निर्दलीय चुनाव लड़ा जाए या नहीं।
उधर, थानाभवन सीट को लेकर भी यही स्थिति बनी हुई है। गठबंधन में कांग्रेस और सपा के अलावा रालोद भी शामिल हुआ, तो थानाभवन सीट रालोद के खाते में जा सकती है। यदि ऐसा हुआ, तो सपा प्रत्याशी किरणपाल कश्यप के चुनाव लड़ने का मन बदलना पड़ सकता है।
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दरअसल, समाजवादी पार्टी ने शामली जिले की तीनों सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हुए हैं। शामली सीट से मनीष चौहान, थानाभवन से किरणपाल कश्यप और कैराना सीट से मौजूदा विधायक नाहिद हसन प्रत्याशी हैं। तीनों ही सीटों पर सपा प्रत्याशी अपनी चुनाव तैयारी में लगे हुए हैं, मगर कांग्रेस और सपा के बीच आगामी विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन की अटकलों ने प्रत्याशियों को दुविधा में डाल दिया है। चर्चा है कि गठबंधन में शामली सीट कांग्रेस को मिल सकती है।
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क्योंकि शामली सीट पर कांग्रेस के पंकज मलिक मौजूदा विधायक हैं। सपा प्रत्याशी मनीष चौहान काफी समय से चुनाव तैयारी में लगे हैं। यदि यह सीट कांग्रेस को मिली, तो मनीष के हाथ मायूसी लगेगी, जिस कारण लंबे समय से की जा रही तैयारी पर भी पानी फिर जाएगा। वहीं, मनीष चौहान के पिता वीरेंद्र सिंह सपा एमएलसी होने के साथ ही लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं। सपा एमएलसी वीरेंद्र सिंह का कहना है कि अभी गठबंधन हुआ नहीं है, लिहाजा कोई फैसला लेना जल्दबाजी है।
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हालांकि कई दशक से हम राजनीति कर रहे हैं। समर्थक उनसे कहते हैं कि यदि सीट कांग्रेस को मिलेगी, तब भी चुनाव लड़ना है। उनका कहना है कि यदि गठबंधन हुआ और शामली सीट सपा को नहीं मिली, तभी निर्णय लिया जाएगा कि निर्दलीय चुनाव लड़ा जाए या नहीं।
उधर, थानाभवन सीट को लेकर भी यही स्थिति बनी हुई है। गठबंधन में कांग्रेस और सपा के अलावा रालोद भी शामिल हुआ, तो थानाभवन सीट रालोद के खाते में जा सकती है। यदि ऐसा हुआ, तो सपा प्रत्याशी किरणपाल कश्यप के चुनाव लड़ने का मन बदलना पड़ सकता है।