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पढ़ने लिखने की उम्र में काम के बोझ में दबा बचपन

Fri, 12 Jun 2020 11:45 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2020 11:45 PM IST
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Childhood burdened by work at the age of reading and writing
शामली। जनपद में पढ़ने लिखने की उम्र में बच्चे दुकानों, होटलों, हलवाई की दुकानों पर काम करते अक्सर देखे जाते हैं। इनमें अधिकतर बच्चे परिवार की आर्थिक तंगी की वजह से बचपन में ही काम पर लगा दिए जाते हैं। इन को काम करते देख श्रम विभाग भी कोई प्रभावी कार्रवाई नही कर पाता, जिस कारण बाल श्रम पर अंकुश नहीं लग पाता है।
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शासन के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा हर साल 13 साल तक की उम्र के बच्चों को चिह्नित कर किया जाता है। शासन की मंशा है कि ऐसे किशोरों की तलाश करें जो स्कूल नहीं आते। इनके पीछे इनकी मजबूरी है या परिवार के लोग स्कूल भेजना नहीं चाहते। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आउट ऑफ स्कूल कार्यक्रम के तहत ऐसे बच्चों को चिह्नित कर उनका स्कूल में नामांकन कराकर शिक्षा देना होता है। पिछले साल जनपद में करीब तीन हजार बच्चे चिह्नित किए गए थे। इनमें अधिकतर होटल, ढाबे, चाय, हलवाई की दुकानों पर काम करने वाले थे। इनके अलावा सड़क किनारे कूड़ा बीनने वाले और ईंट भट्ठों पर परिवार के साथ काम करते हुए मिले थे। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि पिछले साल चिह्नित किए गए अधिकतर बच्चों का नामांकन कराया गया था। इस साल फिर से आउट ऑफ स्कूल कार्यक्रम के तहत 13 साल तक के बच्चों को परिषदीय स्कूल के अध्यापकों को चिह्नित करने किए जा रहे है।
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लॉकडाउन के कारण यह कार्य बीच में थम गया था, लेकिन पिछले एक सप्ताह से इस काम में तेजी आई है। चिह्नित होने वाले बच्चों को शारदा पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। अब तक करीब 98 बच्चे चिह्नित किए जा चुके हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के जिला समन्वयक प्रशिक्षण ने बताया कि आउट ऑफ स्कूल कार्यक्रम के तहत बच्चों को चिह्नित किया जा रहा है। इन बच्चों का स्कूल में नामांकन कराया जाएगा। उधर सहायक श्रमायुक्त संतोष कुमार का कहना है कि बाल श्रम उन्मूलन हेतु सरकार ने बाल श्रमिक विद्या योजना शुरू की है। इसके अलावा बाल श्रम उन्मूलन हेतु कई योजनाएं संचालित हैं। बाल श्रम संबंधी कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर कोई शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
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