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शिव शंकर की कृपा से बदल जाता मनुष्य का भाग्य बदल जाता है
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- सदाशिव मंदिर रेलपार के वार्षिकोत्सव पर शिवपुराण कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
फोटो समाचार
शामली। शिवपुराण कथा में कथा व्यास पंडित दिनेश पाठक ने कहा कि मनुष्य के भाग्य में जो नहीं है, वह आकर भी चला जाता है। बिना भाग्य के मनुष्य के जीवन कुछ भी नहीं आने वाला है। भगवान शिव शंकर बड़े भोले है, जिस पर कृपा दृष्टि कर देते हैं, उसका भाग्य बदल जाता है।
रविवार को शहर के मोहल्ला रेलपार में सिद्धपीठ प्राचीन सदा शिव मंदिर के वार्षिकोत्सव के मौके पर शिवपुराण कथा में कथा व्यास पंडित दिनेश पाठक ने शिव सती का प्रंसग सुनाया। कहा खासकर महिलाओं से गलती हो जाए तो उसे अपने पति से नहीं छिपाना चाहिए। गलती को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम वनवास के दौरान सीता हरण के बाद जंगल में सीता के विरह में मारे भटक रहे थे। भगवान शिवजी ने राम वनवास का प्रसंग सुनाया तो सती ने भगवान श्रीराम की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। मां सीता का रुप धारण करके श्रीराम के सामने प्रकट हुई तो भगवान श्रीराम ने सती को पहचानकर माता कहकर प्रणाम किया। सती ने यह बात भगवान शंकर को नहीं बताई। शंकर जी शायद माता सती को माफ कर देते। इसी कारण सती का त्याग हुआ। पति के मना करने के बावजूद अपने पति के महायज्ञ में शामिल होने चली गई। पति के अपमान को सहन नहीं कर सकी। हवन अग्नि कुंड में कूद कर प्राण त्याग दिए। इस मौके पर उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री केपी मलिक, विजय कौशिक, सुमन कौशिक, सुरेश, सचिन, राजीव, ब्रिजेश, देवेंद्र, सजय बजाज, राजू, यशपाल निर्वाल, धर्मेंद्र आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
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शामली। शिवपुराण कथा में कथा व्यास पंडित दिनेश पाठक ने कहा कि मनुष्य के भाग्य में जो नहीं है, वह आकर भी चला जाता है। बिना भाग्य के मनुष्य के जीवन कुछ भी नहीं आने वाला है। भगवान शिव शंकर बड़े भोले है, जिस पर कृपा दृष्टि कर देते हैं, उसका भाग्य बदल जाता है।
रविवार को शहर के मोहल्ला रेलपार में सिद्धपीठ प्राचीन सदा शिव मंदिर के वार्षिकोत्सव के मौके पर शिवपुराण कथा में कथा व्यास पंडित दिनेश पाठक ने शिव सती का प्रंसग सुनाया। कहा खासकर महिलाओं से गलती हो जाए तो उसे अपने पति से नहीं छिपाना चाहिए। गलती को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम वनवास के दौरान सीता हरण के बाद जंगल में सीता के विरह में मारे भटक रहे थे। भगवान शिवजी ने राम वनवास का प्रसंग सुनाया तो सती ने भगवान श्रीराम की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। मां सीता का रुप धारण करके श्रीराम के सामने प्रकट हुई तो भगवान श्रीराम ने सती को पहचानकर माता कहकर प्रणाम किया। सती ने यह बात भगवान शंकर को नहीं बताई। शंकर जी शायद माता सती को माफ कर देते। इसी कारण सती का त्याग हुआ। पति के मना करने के बावजूद अपने पति के महायज्ञ में शामिल होने चली गई। पति के अपमान को सहन नहीं कर सकी। हवन अग्नि कुंड में कूद कर प्राण त्याग दिए। इस मौके पर उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री केपी मलिक, विजय कौशिक, सुमन कौशिक, सुरेश, सचिन, राजीव, ब्रिजेश, देवेंद्र, सजय बजाज, राजू, यशपाल निर्वाल, धर्मेंद्र आदि मौजूद रहे।
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