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एसिड अटैक पीड़िता ने किया परिवार का नाम रोशन
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
Updated Mon, 04 Dec 2017 11:25 PM IST
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पीड़िता को दिल्ली में सम्मानित करते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली शहर के मोहल्ला अंसारियान निवासी एसिड अटैक पीड़िता यासमीन मंसूरी ने परिवार का नाम रोशन कर दिया। एसिड अटैक में आंख की रोशनी गंवाने के बावजूद उसने दृढ संकल्प से अपनी पढ़ाई की। ग्रेजुएशन करने के बाद नर्सिंग कोर्स करके अब वह दिल्ली के अस्पताल में बतौर स्टाफ नर्स नौकरी कर रही है। दो दिन पूर्व ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से आयोजित समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने यासमीन को सम्मानित किया।
यासमीन को दिव्यांगजन सशक्तीकरण हेतु दृढ संकल्प शक्ति एवं निश्चय हेतु बहुदिव्यांगता वर्ग में 2017 का सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। यासमीन के पिता सलीम मंसूरी ने अमर उजाला से फोन पर बातचीत में बताया कि सात अप्रैल 2004 की रात उनकी बेटी यासमीन जब छत पर सो रही थी, तो अज्ञात लोगों ने तेजाब फेंक दिया था। उसमें यासमीन 67 प्रतिशत झुलस गई थी। इस कारण यासमीन की आंख और चेहरा खराब हो गया था।
इसके बाद भी यासमीन ने अपनी जिंदगी को मायूस नहीं बनने दिया और पढ़ाई जारी रखी। अब वह अपने परिवार के साथ नई दिल्ली के छतरपुर में रहती हैं। यहां रहते हुए उनकी बेटी यासमीन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से कला वर्ग में ग्रेजुएशन किया और जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी से नर्सिंग कोर्स पूरा किया। साथ ही मल्टीमीडिया में डिप्लोमा भी किया। इसके बाद अब वह दिल्ली के जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में स्टाफ नर्स के रूप में नौकरी कर रही है। पिता सलीम मंसूरी का कहना है कि उनकी बेटी ने संकल्प के साथअपनी जिंदगी को आगे बढ़ाया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथ से सम्मान में उसे मेडल और प्रश्सति पत्र भी मिला। इस सम्मान के मिलने से यासमीन ने परिवार का मान भी बढ़ाया है।
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यासमीन को दिव्यांगजन सशक्तीकरण हेतु दृढ संकल्प शक्ति एवं निश्चय हेतु बहुदिव्यांगता वर्ग में 2017 का सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। यासमीन के पिता सलीम मंसूरी ने अमर उजाला से फोन पर बातचीत में बताया कि सात अप्रैल 2004 की रात उनकी बेटी यासमीन जब छत पर सो रही थी, तो अज्ञात लोगों ने तेजाब फेंक दिया था। उसमें यासमीन 67 प्रतिशत झुलस गई थी। इस कारण यासमीन की आंख और चेहरा खराब हो गया था।
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इसके बाद भी यासमीन ने अपनी जिंदगी को मायूस नहीं बनने दिया और पढ़ाई जारी रखी। अब वह अपने परिवार के साथ नई दिल्ली के छतरपुर में रहती हैं। यहां रहते हुए उनकी बेटी यासमीन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से कला वर्ग में ग्रेजुएशन किया और जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी से नर्सिंग कोर्स पूरा किया। साथ ही मल्टीमीडिया में डिप्लोमा भी किया। इसके बाद अब वह दिल्ली के जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में स्टाफ नर्स के रूप में नौकरी कर रही है। पिता सलीम मंसूरी का कहना है कि उनकी बेटी ने संकल्प के साथअपनी जिंदगी को आगे बढ़ाया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथ से सम्मान में उसे मेडल और प्रश्सति पत्र भी मिला। इस सम्मान के मिलने से यासमीन ने परिवार का मान भी बढ़ाया है।
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