{"_id":"5fcbd9538ebc3ecfdf3a3b26","slug":"a-concrete-plan-could-not-be-made-to-solve-the-jam-shamli-news-mrt5142619169","type":"story","status":"publish","title_hn":"जाम के समाधान को नहीं बन सकी ठोस योजना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जाम के समाधान को नहीं बन सकी ठोस योजना
विज्ञापन
शामली धीमानपुरा मार्ग पर लगा जाम
- फोटो : SHAMLI
शामली। शहर में जाम की प्रमुख वजह मिल में आने वाले गन्ना वाहन भी है। गन्ना सीजन शुरू होते ही शहर में जाम के हालात बने रहते हैं। यह समस्या हर साल बनती है, लेकिन आज तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका। जाम के समाधान को बनने वाली योजनाएं कागजों तक सिमटकर रह जाती हैं।
शहर में जाम की समस्या तो वैसे पूरे साल ही रहती है, लेकिन गन्ने का सीजन शुरू होते ही यह समस्या और बढ़ जाती है। आबादी के बीच शुगर मिल आने के कारण गन्ना ढुलाई के वाहन चारों तरफ से शहर के बीच सड़कों से होकर जाते हैं। हर साल गन्ना वाहनों से लगने वाले जाम के समाधान को लेकर पुलिस-प्रशासन के साथ बैठक होती है और योजनाएं बनती हैं, लेकिन उसका असर धरातल पर नजर नहीं आता। इसके चलते जाम का स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका।
--------
गन्ना वाहनों से यहां लगता है जाम
शहर में गन्ने के वाहन चारों ओर से आते हैं। झिंझाना रोड, कैराना रोड, दिल्ली रोड, बुढ़ाना रोड, मुजफ्फरनगर रोड , सहारनपुर रोड और कुड़ाना रोड, भैंसवाल, गढ़ीपुख्ता रोड से गन्ने से लदे ट्रैक्टर-ट्राली और बुग्गियां आती हैं। इनका आवागमन रात-दिन रहता है। शहर के मुख्य मार्ग से होते हुए गन्ना लदे वाहन शुगर मिल तक पहुंचते हैं। इस दौरान जाम लग जाता है। कई बार तो वाहनों की कतार इतनी लंबी हो जाती है कि पूरा शहर ही जाम की चपेट में आ जाता है। एंबुलेंस और स्कूली वाहन तक भी जाम में फंसे रहते हैं।
विज्ञापन
--------
व्यापारी उठा चुके जाम का मुद्दा
शामली। गन्ना सीजन शुरू होने से पहले कलक्ट्रेट में डीएम जसजीत कौर और तत्कालीन एसपी नित्यानंद राय ने मिल अधिकारियों, व्यापारियों के साथ बैठक ली थी। बैठक में व्यापारियों ने गन्ना वाहनों से लगने वाले जाम का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया था। व्यापारियों ने कहा था कि जाम के कारण कारोबार प्रभावित होने से आवागमन में असुविधा होती है। उन्होंने इस दौरान कई सुझाव भी दिए थे, लेकिन मिल की तरफ से सुझावों पर कोई अमल नहीं हुआ
------------
जाम से निपटने को दिए गए थे ये सुझाव
- शहर के बाहर गन्ना यार्ड बनाया जाए।
- मिल का ब्रेक डाउन होने पर गन्ना वाहनों को शहर से बाहर रोकने की व्यवस्था हो।
- गन्ना वाहनों को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मियों के साथ मिल के सुरक्षा गार्ड लगाए जाएं।
- शहर के बाहर के मुख्य मार्गों पर गन्ना वाहनों को टोकन देने की व्यवस्था हो।
- पेराई क्षमता के अनुसार गन्ने का इंडेंट जारी किया जाए।
--
ये बोले व्यापारी
जब से मिल चलती है तब से गन्ने का जाम अक्सर लगा रहता है, इससे कारोबार पूरी तरह ठप हो जाता है। इसका समाधान होना चाहिए। - शिवचरण वालिया, लोहा व्यापारी।
गन्ने के जाम की समस्या एक दिन की नहीं, यह तो रोज की बात हो गई। प्रशासन भी कुछ नहीं कर रहा है। इसका ठोस समाधान होना चाहिए। - सुशील कुमार, स्पेयर पार्ट्स व्यापारी।
शहर में पहले से ही जाम रहता है, मिल चलता है तो व्यापार चौपट हो जाता है। भीड़ में लोग निकल नहीं पाते, इसके चलते ग्राहक दुकान तक नहीं आ पाते। - विशाल गौतम, दवा व्यापारी।
जाम की समस्या शहर में पुरानी है। ऊपर से यह मिल शहर के बीच में आ गया। गन्ने की ढुलाई शहर के बीच से होती है, जिस कारण जाम की समस्या बनी रहती है। अधिकारियों का इसका अल निकालना चाहिए। - अजय कुमार, रेडीमेड गारमेंट व्यापारी।
विज्ञापन
शहर में जाम की समस्या तो वैसे पूरे साल ही रहती है, लेकिन गन्ने का सीजन शुरू होते ही यह समस्या और बढ़ जाती है। आबादी के बीच शुगर मिल आने के कारण गन्ना ढुलाई के वाहन चारों तरफ से शहर के बीच सड़कों से होकर जाते हैं। हर साल गन्ना वाहनों से लगने वाले जाम के समाधान को लेकर पुलिस-प्रशासन के साथ बैठक होती है और योजनाएं बनती हैं, लेकिन उसका असर धरातल पर नजर नहीं आता। इसके चलते जाम का स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका।
विज्ञापन
--------
गन्ना वाहनों से यहां लगता है जाम
शहर में गन्ने के वाहन चारों ओर से आते हैं। झिंझाना रोड, कैराना रोड, दिल्ली रोड, बुढ़ाना रोड, मुजफ्फरनगर रोड , सहारनपुर रोड और कुड़ाना रोड, भैंसवाल, गढ़ीपुख्ता रोड से गन्ने से लदे ट्रैक्टर-ट्राली और बुग्गियां आती हैं। इनका आवागमन रात-दिन रहता है। शहर के मुख्य मार्ग से होते हुए गन्ना लदे वाहन शुगर मिल तक पहुंचते हैं। इस दौरान जाम लग जाता है। कई बार तो वाहनों की कतार इतनी लंबी हो जाती है कि पूरा शहर ही जाम की चपेट में आ जाता है। एंबुलेंस और स्कूली वाहन तक भी जाम में फंसे रहते हैं।
विज्ञापन
--------
व्यापारी उठा चुके जाम का मुद्दा
शामली। गन्ना सीजन शुरू होने से पहले कलक्ट्रेट में डीएम जसजीत कौर और तत्कालीन एसपी नित्यानंद राय ने मिल अधिकारियों, व्यापारियों के साथ बैठक ली थी। बैठक में व्यापारियों ने गन्ना वाहनों से लगने वाले जाम का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया था। व्यापारियों ने कहा था कि जाम के कारण कारोबार प्रभावित होने से आवागमन में असुविधा होती है। उन्होंने इस दौरान कई सुझाव भी दिए थे, लेकिन मिल की तरफ से सुझावों पर कोई अमल नहीं हुआ
------------
जाम से निपटने को दिए गए थे ये सुझाव
- शहर के बाहर गन्ना यार्ड बनाया जाए।
- मिल का ब्रेक डाउन होने पर गन्ना वाहनों को शहर से बाहर रोकने की व्यवस्था हो।
- गन्ना वाहनों को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मियों के साथ मिल के सुरक्षा गार्ड लगाए जाएं।
- शहर के बाहर के मुख्य मार्गों पर गन्ना वाहनों को टोकन देने की व्यवस्था हो।
- पेराई क्षमता के अनुसार गन्ने का इंडेंट जारी किया जाए।
--
ये बोले व्यापारी
जब से मिल चलती है तब से गन्ने का जाम अक्सर लगा रहता है, इससे कारोबार पूरी तरह ठप हो जाता है। इसका समाधान होना चाहिए। - शिवचरण वालिया, लोहा व्यापारी।
गन्ने के जाम की समस्या एक दिन की नहीं, यह तो रोज की बात हो गई। प्रशासन भी कुछ नहीं कर रहा है। इसका ठोस समाधान होना चाहिए। - सुशील कुमार, स्पेयर पार्ट्स व्यापारी।
शहर में पहले से ही जाम रहता है, मिल चलता है तो व्यापार चौपट हो जाता है। भीड़ में लोग निकल नहीं पाते, इसके चलते ग्राहक दुकान तक नहीं आ पाते। - विशाल गौतम, दवा व्यापारी।
जाम की समस्या शहर में पुरानी है। ऊपर से यह मिल शहर के बीच में आ गया। गन्ने की ढुलाई शहर के बीच से होती है, जिस कारण जाम की समस्या बनी रहती है। अधिकारियों का इसका अल निकालना चाहिए। - अजय कुमार, रेडीमेड गारमेंट व्यापारी।