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Shamli News: विद्युत सखी बन स्वरोजगार की राह पर जिले की 92 महिलाएं
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हर माह लाखों रुपये का बकाया बिल जमा करा रहीं ग्रामीण महिलाएं, जल्द होंगी सम्मानित
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी जिले की महिलाएं अब विद्युत सखी बनकर न सिर्फ स्वरोजगार की राह पर आगे बढ़ रही हैं, बल्कि अपने गांवों में बिजली विभाग की बड़ी चुनौती को भी हल कर रही हैं। जिले की 92 महिलाएं आज ऊर्जा निगम के बकाया बिलों की वसूली में अहम योगदान दे रही हैं।
बिजली विभाग के पास बिल वसूली के पर्याप्त संसाधन नहीं थे। इस कमी को दूर करने के लिए ऊर्जा निगम और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ने मिलकर यह नवाचार शुरू किया। महिलाओं ने इस कार्य को चुनौती मानकर स्वीकार किया और दक्ष विद्युत सखियां बनकर साबित कर दिया कि कोई भी काम असंभव नहीं है।
एनआरएलएम मैनेजर पंकज कुमार ने बताया कि कई महिलाएं आज हर माह 8 से 10 लाख रुपये तक का बिल जमा करा रही हैं। वहीं, हसनपुर की अनिता, बंतीखेड़ा की राशिदा, झारखेड़ी की सोनिया, तितरवाड़ा की प्रियंका और कौशल जैसी महिलाएं तो 10 से 20 लाख रुपये तक का बकाया बिल हर माह जमा करा रही हैं।
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प्रियंका का कहना है कि उन्हें सौ रुपये पर एक प्रतिशत तक कमीशन मिलता है। यह न सिर्फ उनकी आमदनी का जरिया बन गया है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार की राह दिखा रहा है। मैनेजर ने कहा कि सराहनीय कार्य करने वाली सखियों को जल्द ही सम्मानित किया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी जिले की महिलाएं अब विद्युत सखी बनकर न सिर्फ स्वरोजगार की राह पर आगे बढ़ रही हैं, बल्कि अपने गांवों में बिजली विभाग की बड़ी चुनौती को भी हल कर रही हैं। जिले की 92 महिलाएं आज ऊर्जा निगम के बकाया बिलों की वसूली में अहम योगदान दे रही हैं।
बिजली विभाग के पास बिल वसूली के पर्याप्त संसाधन नहीं थे। इस कमी को दूर करने के लिए ऊर्जा निगम और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ने मिलकर यह नवाचार शुरू किया। महिलाओं ने इस कार्य को चुनौती मानकर स्वीकार किया और दक्ष विद्युत सखियां बनकर साबित कर दिया कि कोई भी काम असंभव नहीं है।
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एनआरएलएम मैनेजर पंकज कुमार ने बताया कि कई महिलाएं आज हर माह 8 से 10 लाख रुपये तक का बिल जमा करा रही हैं। वहीं, हसनपुर की अनिता, बंतीखेड़ा की राशिदा, झारखेड़ी की सोनिया, तितरवाड़ा की प्रियंका और कौशल जैसी महिलाएं तो 10 से 20 लाख रुपये तक का बकाया बिल हर माह जमा करा रही हैं।
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प्रियंका का कहना है कि उन्हें सौ रुपये पर एक प्रतिशत तक कमीशन मिलता है। यह न सिर्फ उनकी आमदनी का जरिया बन गया है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार की राह दिखा रहा है। मैनेजर ने कहा कि सराहनीय कार्य करने वाली सखियों को जल्द ही सम्मानित किया जाएगा।