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वातावरण में धूल बनी सांस के मरीजों के लिए मुसीबत
Updated Thu, 14 Jun 2018 11:53 PM IST
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दमा के मरीजों के लिए मुसीबत बना मौसम
शामली। पिछले दो दिनों से जिले का वातावरण धूल भरा है। दूर तक सड़क पर धूल नजर आ रही है। यह धूल अब मरीजों के लिए अब परेशानी पैदा कर रही है। लोग बीमार हो रहे हैं। यही कारण है शामली अस्पताल में बृहस्पतिवार को मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिला। उधर, इस धूल भरे वातावरण में सबसे ज्यादा परेशानी टीबी, अस्थमा के मरीजों को होने लगी। बृहस्पतिवार को शामली सीएचसी में मरीजों की संख्या देखने को मिली। डाक्टर अनुपम सक्सेना का कहना है कि यह धूल मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। खासकर सांस संबंधी मरीजों के लिए जहर है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ता है, जिससे फेफड़े संक्रमित हो जाते हैं। अस्थमा और दिल के रोगियों के साथ बच्चों को भी बचाकर रखना चाहिए। डाक्टरों का कहना है कि धूल मरीजों के लिए बुरी है। ऐसे वातावरण में स्वस्थ इंसान भी बीमार हो जाता है। सीएचसी प्रभारी डॉक्टर रमेश चंद्रा ने कहा कि दो दिनों में अस्पताल में टीबी और अस्थमा के मरीज देखने को मिले हैं, अस्पताल में मरीज आ रहे हैं, ये मौसम का ही असर है, दो दिनों से दस प्रतिशत से अधिक मरीज सांस संबंधित आए है
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शामली। पिछले दो दिनों से जिले का वातावरण धूल भरा है। दूर तक सड़क पर धूल नजर आ रही है। यह धूल अब मरीजों के लिए अब परेशानी पैदा कर रही है। लोग बीमार हो रहे हैं। यही कारण है शामली अस्पताल में बृहस्पतिवार को मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिला। उधर, इस धूल भरे वातावरण में सबसे ज्यादा परेशानी टीबी, अस्थमा के मरीजों को होने लगी। बृहस्पतिवार को शामली सीएचसी में मरीजों की संख्या देखने को मिली। डाक्टर अनुपम सक्सेना का कहना है कि यह धूल मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। खासकर सांस संबंधी मरीजों के लिए जहर है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ता है, जिससे फेफड़े संक्रमित हो जाते हैं। अस्थमा और दिल के रोगियों के साथ बच्चों को भी बचाकर रखना चाहिए। डाक्टरों का कहना है कि धूल मरीजों के लिए बुरी है। ऐसे वातावरण में स्वस्थ इंसान भी बीमार हो जाता है। सीएचसी प्रभारी डॉक्टर रमेश चंद्रा ने कहा कि दो दिनों में अस्पताल में टीबी और अस्थमा के मरीज देखने को मिले हैं, अस्पताल में मरीज आ रहे हैं, ये मौसम का ही असर है, दो दिनों से दस प्रतिशत से अधिक मरीज सांस संबंधित आए है