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जिला उपभोक्ता फोरम ने लगाया बीमा कंपनी के शाखा प्रबंधक पर जुर्माना
Updated Thu, 14 Jun 2018 11:53 PM IST
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शामली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के शाखा प्रबंधक पर चार लाख 24 हजार 360 रुपये का जुर्माना लगाते हुए पीड़ित को एक माह में धनराशि अदा करने के निर्देश दिए है।
बुढ़ाना रोड निवासी संजय कुमार संगल ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में मेेरठ करनाल रोड स्थित नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के शाखा प्रबंधक को आरोपी बनाकर एक वाद दायर किया था। पीड़ित के अनुुुुसार वह टाटा इंडिगो गाड़ी का स्वामी हैं। इसका बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से कराया गया। बीमा पालिसी 24 फरवरी 2015 से लेकर 23 फरवरी 2016 तक अवधि थी। वाहन का बीमित घोषित मूल्य 409360 रुपये था। पीड़ित के मुताबिक 24 नवंबर 2015 को उसकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया। गाड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इसकी सूचना उसने बीमा कंपनी को दी। इसके बाद उसने क्लेम संबंधी सभी औपचारिकता विधिवत पूरी कर ली। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा सर्वेयर को घटना की जानकारी देकर जांच के लिए नियुक्त किया गया। जांच के बाद सर्वेयर ने अपनी रिपोर्ट नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को दी गई। आरोपी ने उनके वाहन को रवि कांत पुत्र राज किशोर निवासी मस्तगढ़, थानाभवन को 21 सितंबर 2015 को 463300 रुपये मे बेच दिए जाने के आधार पर क्लेम दावा निरस्त कर दिया। पीड़ित ने दलील दी थी रविकांत की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उनके बीच सौदे बाजी नही हो पाई है। बयाने के रूप में ली गई धनराशि को वापस करना पड़ा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम के चेयरमैन एसके एस यादव एवं सदस्य श्रवण कुमार ने विवाद की सुनवाई करते हुए पीड़ित को नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के शाखा प्रबंधक को बीमा क्लेम धनराशि 4 लाख 9 हजार 360 रुपये मय छह प्रतिशत ब्याज भुगतान की तिथि तक, मानसिक क्षति पांच हजार रुपये, आर्थिक एवं शारीरिक क्षति पांच हजार, वाद खर्च पांच हजार रुपये मिलाकर 4 लाख 24 हजार 360 रूपये एक माह में दिए जाने का आदेश सुनाया है।
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बुढ़ाना रोड निवासी संजय कुमार संगल ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में मेेरठ करनाल रोड स्थित नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के शाखा प्रबंधक को आरोपी बनाकर एक वाद दायर किया था। पीड़ित के अनुुुुसार वह टाटा इंडिगो गाड़ी का स्वामी हैं। इसका बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से कराया गया। बीमा पालिसी 24 फरवरी 2015 से लेकर 23 फरवरी 2016 तक अवधि थी। वाहन का बीमित घोषित मूल्य 409360 रुपये था। पीड़ित के मुताबिक 24 नवंबर 2015 को उसकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया। गाड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इसकी सूचना उसने बीमा कंपनी को दी। इसके बाद उसने क्लेम संबंधी सभी औपचारिकता विधिवत पूरी कर ली। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा सर्वेयर को घटना की जानकारी देकर जांच के लिए नियुक्त किया गया। जांच के बाद सर्वेयर ने अपनी रिपोर्ट नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को दी गई। आरोपी ने उनके वाहन को रवि कांत पुत्र राज किशोर निवासी मस्तगढ़, थानाभवन को 21 सितंबर 2015 को 463300 रुपये मे बेच दिए जाने के आधार पर क्लेम दावा निरस्त कर दिया। पीड़ित ने दलील दी थी रविकांत की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उनके बीच सौदे बाजी नही हो पाई है। बयाने के रूप में ली गई धनराशि को वापस करना पड़ा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम के चेयरमैन एसके एस यादव एवं सदस्य श्रवण कुमार ने विवाद की सुनवाई करते हुए पीड़ित को नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के शाखा प्रबंधक को बीमा क्लेम धनराशि 4 लाख 9 हजार 360 रुपये मय छह प्रतिशत ब्याज भुगतान की तिथि तक, मानसिक क्षति पांच हजार रुपये, आर्थिक एवं शारीरिक क्षति पांच हजार, वाद खर्च पांच हजार रुपये मिलाकर 4 लाख 24 हजार 360 रूपये एक माह में दिए जाने का आदेश सुनाया है।
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