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चार लोगों ने ली जैन मुनि दीक्षा, चंडीगढ़ में होगा सम्मान
Updated Sat, 02 Dec 2017 10:58 PM IST
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शामली में शोभायात्रा निकाली
शामली (शामली)। शहर के जैन समाज के चार लोगों ने दीक्षा ग्रहण करने का संकल्प लिया, जिसके चलते उन्हें 10 दिसंबर को चंड़ीगढ़ में होने वाले दीक्षा समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
शनिवार को शामली की दिगंबर जैन धर्मशाला में सुमित, सुनील, सुशील और कुसुमलता ने जैन मुनि दीक्षा ग्रहण करने का संकल्प लिया है। इसके चलते चारों दीक्षार्थियों को 10 दिसंबर को चंडीगढ़ में होने वाले मुनि दीक्षार्थी समारोह में आचार्य 108 सुंदर सागर जी महाराज के सानिध्य में तिलक, गोदभराई और सम्मान किया जाएगा, जिसके उपलक्ष्य में जैन धर्मशाला से शहर में शोभायात्रा निकाली गई। समाज के सभी लोगों ने दीक्षार्थी/साधकों के मोक्ष वर्ण के प्रति बढ़ने का अनुमोदन किया और उनके ज्ञान, ध्यान और चरित्र में वृद्धि की कामना की। इसके बाद दीक्षार्थियों ने सभी प्राणियों के प्रति क्षोभ, जन्म व्यवहार के लिए क्षमा मांगकर अपने मन को निर्मल करते हुए साधना के मार्ग को अंगीकार करते हुए अनुमति मांगी। कुसुम लता और उनके पति सुशील कुमार शुरू से ही साधना मार्ग के प्रति अग्रसर रहे है, जिसके बाद सभी साधकों ने उनके मंगलमय जीवन की कामना की प्रार्थना की।
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शामली (शामली)। शहर के जैन समाज के चार लोगों ने दीक्षा ग्रहण करने का संकल्प लिया, जिसके चलते उन्हें 10 दिसंबर को चंड़ीगढ़ में होने वाले दीक्षा समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
शनिवार को शामली की दिगंबर जैन धर्मशाला में सुमित, सुनील, सुशील और कुसुमलता ने जैन मुनि दीक्षा ग्रहण करने का संकल्प लिया है। इसके चलते चारों दीक्षार्थियों को 10 दिसंबर को चंडीगढ़ में होने वाले मुनि दीक्षार्थी समारोह में आचार्य 108 सुंदर सागर जी महाराज के सानिध्य में तिलक, गोदभराई और सम्मान किया जाएगा, जिसके उपलक्ष्य में जैन धर्मशाला से शहर में शोभायात्रा निकाली गई। समाज के सभी लोगों ने दीक्षार्थी/साधकों के मोक्ष वर्ण के प्रति बढ़ने का अनुमोदन किया और उनके ज्ञान, ध्यान और चरित्र में वृद्धि की कामना की। इसके बाद दीक्षार्थियों ने सभी प्राणियों के प्रति क्षोभ, जन्म व्यवहार के लिए क्षमा मांगकर अपने मन को निर्मल करते हुए साधना के मार्ग को अंगीकार करते हुए अनुमति मांगी। कुसुम लता और उनके पति सुशील कुमार शुरू से ही साधना मार्ग के प्रति अग्रसर रहे है, जिसके बाद सभी साधकों ने उनके मंगलमय जीवन की कामना की प्रार्थना की।
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