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Shamli News: जिले में 2601 बच्चों को नहीं लगा डिप्थीरिया से बचाव का टीका, आज से चलेगा अभियान
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- जिले के 40 सरकारी, निजी विद्यालयों और मदरसों में लगाए जाएंगे टीकाकरण सत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले में डिप्थीरिया यानि गलघोंटू से बचाव के लगने वाले टीके से छूटे हुए 2601 बच्चे मिले हैं। छूटे हुए बच्चों को टीके लगाने के लिए एक जुलाई से विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा। इसमें जिले के 40 विद्यालयों में सत्र आयोजित कर छूटे हुए कक्षा पांच और दस में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को टीडी (टेटनस और डिप्थीरिया) के टीके लगाए जाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 10 और 16 साल के 2601 विद्यार्थियों को चिह्नित किया है, जिन्हें टीडी का टीका नहीं लगा है। छूटे हुए विद्यार्थियों को टीके लगाने के लिए शुक्रवार से विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. करन चौधरी ने बताया कि जिले के 40 सरकारी, निजी स्कूलों और मदरसों में कक्षा पांच में पढ़ने वाले 896 विद्यार्थी चिह्नित किए गए हैं। इन्हें टीडी 10 का टीका लगाया जाएगा। कक्षा 10 में पढ़ने वाले 1705 विद्यार्थियों को चिन्हित किया गया हैं। इन्हें टीडी 16 का टीका लगाया जाएगा। जिन विद्यार्थियों को टीका लगना है, वे खाली पेट न आए और टीका लगने के आधा घंटा बाद तक कुछ न खाएं। बुखार होने पर पैरासिटामोल की गोली ले और दर्द होने पर ठंडी सिकाई कर सकते हैं। शासन की गाइड लाइन के अनुसार टीकाकरण 31 अगस्त तक किया जाना है, लेकिन उनकी कोशिश है कि 15 अगस्त तक टीकाकरण का कार्य पूरा कर लिया जाए।
- क्या है डिप्थीरिया
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. करन चौधरी ने बताया कि उन्होंने बताया कि डिप्थीरिया एक संक्रामक जीवाणु रोग है, जो कॉरिनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से फैलती है और मुख्य रूप से नाक और गले को प्रभावित करती है। इससे सांस लेने और निगलने में कठिनाई होती है। डिप्थीरिया से सुरक्षा के लिए बच्चों को पहला टीका 6 सप्ताह में, दूसरा 10 सप्ताह और तीसरा 14 सप्ताह पर लगाया जाता है। इसके बाद पहला बूस्टर डेढ़ वर्ष, दूसरा पांच वर्ष, तीसरा 10 वर्ष और चौथा 16 वर्ष की उम्र में दिया जाता है। उ
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- लक्षण :
- गले में खराश होना
- बुखार होना।
- गर्दन में सूजन।
- सांस लेने में परेशानी होना।
- गले में मोटी झिल्ली का बनना।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले में डिप्थीरिया यानि गलघोंटू से बचाव के लगने वाले टीके से छूटे हुए 2601 बच्चे मिले हैं। छूटे हुए बच्चों को टीके लगाने के लिए एक जुलाई से विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा। इसमें जिले के 40 विद्यालयों में सत्र आयोजित कर छूटे हुए कक्षा पांच और दस में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को टीडी (टेटनस और डिप्थीरिया) के टीके लगाए जाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 10 और 16 साल के 2601 विद्यार्थियों को चिह्नित किया है, जिन्हें टीडी का टीका नहीं लगा है। छूटे हुए विद्यार्थियों को टीके लगाने के लिए शुक्रवार से विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. करन चौधरी ने बताया कि जिले के 40 सरकारी, निजी स्कूलों और मदरसों में कक्षा पांच में पढ़ने वाले 896 विद्यार्थी चिह्नित किए गए हैं। इन्हें टीडी 10 का टीका लगाया जाएगा। कक्षा 10 में पढ़ने वाले 1705 विद्यार्थियों को चिन्हित किया गया हैं। इन्हें टीडी 16 का टीका लगाया जाएगा। जिन विद्यार्थियों को टीका लगना है, वे खाली पेट न आए और टीका लगने के आधा घंटा बाद तक कुछ न खाएं। बुखार होने पर पैरासिटामोल की गोली ले और दर्द होने पर ठंडी सिकाई कर सकते हैं। शासन की गाइड लाइन के अनुसार टीकाकरण 31 अगस्त तक किया जाना है, लेकिन उनकी कोशिश है कि 15 अगस्त तक टीकाकरण का कार्य पूरा कर लिया जाए।
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- क्या है डिप्थीरिया
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. करन चौधरी ने बताया कि उन्होंने बताया कि डिप्थीरिया एक संक्रामक जीवाणु रोग है, जो कॉरिनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से फैलती है और मुख्य रूप से नाक और गले को प्रभावित करती है। इससे सांस लेने और निगलने में कठिनाई होती है। डिप्थीरिया से सुरक्षा के लिए बच्चों को पहला टीका 6 सप्ताह में, दूसरा 10 सप्ताह और तीसरा 14 सप्ताह पर लगाया जाता है। इसके बाद पहला बूस्टर डेढ़ वर्ष, दूसरा पांच वर्ष, तीसरा 10 वर्ष और चौथा 16 वर्ष की उम्र में दिया जाता है। उ
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- लक्षण :
- गले में खराश होना
- बुखार होना।
- गर्दन में सूजन।
- सांस लेने में परेशानी होना।
- गले में मोटी झिल्ली का बनना।