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कलयुग से शुरू होता है शिव पुराण का आरंभ
Updated Mon, 30 Jul 2018 11:20 PM IST
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शिव महापुराण सुनने से भक्तों को मिलता है लाभ
थानाभवन।
श्रावण मास में शिव महापुराण सुनने से लाभ मिलता है। शिव पुराण का प्रारंभ ही कलियुग से होता है। इस सब का ज्ञान मनुष्य को शिव महापुराण से ही मिलता है।
कस्बा थानाभवन के जस्सुवाला मंदिर में चल रही शिव महापुराण कथा के दौरान महंत रवि शास्त्री ने अमृत वर्षा करते हुए कहा किएक बार महर्षि वेदव्यास के शिष्य और पुराणविद् सूतजी नदी के तट पर थे। तभी महर्षि शौनक जी ऋषियों के साथ वहां आए। ऋषियों ने सूतजी को प्रणाम करते हुए कहा कि कलियुग आने वाला है। कोई ऐसा उपाय बताओ, जिससे कलियुग के पापों से मुक्ति मिल सके। क्योंकि कलियुग घोर संकट का समय है। सारी व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो जाएगी। काम, क्रोध, लोभ और अहंकार का बोलबाला होगा। घर में माता-पिता का निरादर होगा। कलिकाल में कौन सा ऐसा उपाय है, जिसके करने से कलिकाल के पापों से मुक्ति मिल सकती है। ऋषियों के अनेक प्रश्न सुनकर सूतजी बोले कि इस काल में शंकर जी के ध्यान से ही समस्त विकारों और पापों से मुक्ति मिल सकती है। इस छोटी सी कथा का संदेश है कि ज्ञान किसी से भी लिया जा सकता है। ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती। इस मौके पर ठाकुर रणवीर सिंह, सभासद ऋषिपाल, अंकुर सैनी, ऋषिपाल विकसित, मीनू दिनेश, आंचल, जिनेश, प्रगति सैनी, प्रियंका सैनी, सन्नी कुमार, फूलमति, कौशल, मदनपाल आदि मौजूद रहे।
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थानाभवन।
श्रावण मास में शिव महापुराण सुनने से लाभ मिलता है। शिव पुराण का प्रारंभ ही कलियुग से होता है। इस सब का ज्ञान मनुष्य को शिव महापुराण से ही मिलता है।
कस्बा थानाभवन के जस्सुवाला मंदिर में चल रही शिव महापुराण कथा के दौरान महंत रवि शास्त्री ने अमृत वर्षा करते हुए कहा किएक बार महर्षि वेदव्यास के शिष्य और पुराणविद् सूतजी नदी के तट पर थे। तभी महर्षि शौनक जी ऋषियों के साथ वहां आए। ऋषियों ने सूतजी को प्रणाम करते हुए कहा कि कलियुग आने वाला है। कोई ऐसा उपाय बताओ, जिससे कलियुग के पापों से मुक्ति मिल सके। क्योंकि कलियुग घोर संकट का समय है। सारी व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो जाएगी। काम, क्रोध, लोभ और अहंकार का बोलबाला होगा। घर में माता-पिता का निरादर होगा। कलिकाल में कौन सा ऐसा उपाय है, जिसके करने से कलिकाल के पापों से मुक्ति मिल सकती है। ऋषियों के अनेक प्रश्न सुनकर सूतजी बोले कि इस काल में शंकर जी के ध्यान से ही समस्त विकारों और पापों से मुक्ति मिल सकती है। इस छोटी सी कथा का संदेश है कि ज्ञान किसी से भी लिया जा सकता है। ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती। इस मौके पर ठाकुर रणवीर सिंह, सभासद ऋषिपाल, अंकुर सैनी, ऋषिपाल विकसित, मीनू दिनेश, आंचल, जिनेश, प्रगति सैनी, प्रियंका सैनी, सन्नी कुमार, फूलमति, कौशल, मदनपाल आदि मौजूद रहे।