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पूर्व चेयरमैन के पिता का अंतिम संस्कार
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शामली। नगर पालिका परिषद के पूर्व चेयरमैन अरविंद संगल के पिता लक्ष्मी चंद संगल का बुधवार को अंतिम संस्कार किया गया।
बुधवार सुबह 10 बजे उनकी शव यात्रा शुरू हुई। जिसमें व्यापारी, सर्व समाज, विभिन्न धार्मिक, सामाजिक संगठनों और स्कूल संगठनों के पदाधिकारियों समेत हजारों शहर वासी शामिल हुए। टंकी रोड स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार हुआ। बड़े बेटे राजकुमार संगल ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में विधायक तेजेंद्र निर्वाल, भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष हरवीर मलिक व्यापारी नेता घनश्याम दास गर्ग, जैन समाज के मोहित जैन, धीमान समाज के सुभाष धीमान, स्कूल संगठन के सूर्यवीर सिंह, रितेश गर्ग, विपिन कौशिक, भाजपा नगराध्यक्ष राकेश गर्ग, अरविंद दृष्टया, संजय बंसल, आशीष, मनोज, नंद किशोर मित्तल, हाजी हाशिम, मुशर्रफ अली आदि शामिल रहे।
बर्फ बेचकर बुलंदियों तक पहुंचाया
लक्ष्मीचंद संगल का परिवार शहर के प्रतिष्ठित परिवारों में एक है। परिजनों के अनुसार लक्ष्मी चंद की माली हालात पहले बहुत कमजोर थी। युवा अवस्था में उन्होंने ठेली लगाकर मूंगफली बेची। आइस फैक्टरी से बर्फ लाकर बेची। दिन रात पूरी मेहनत की। काम कुछ बढ़ा तो खुद की आइस फैक्टरी लगाई। बच्चों को भी पढ़ाया लिखाया। बड़े बेटे राजकुमार संगल सहारनपुर के कालेज में फिजिक्स केमेस्ट्री विभाग के एचओडी हैं। दूसरे नंबर के बेटे अरविंद नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन हैं जबकि छोटे बेटे श्रवण कुमार इंडोनेशिया में जिंदल स्टील ग्रुप में जीएम हैं। प्रवीण संगल की सोडा फैक्टरी और सबसे छोटे संजय संगल का खुद का शामली में व्यापार है।
1987 में भर दिया था आंखें दान करने का फार्म
लक्ष्मीचंद बीमार और बेसहारा लोगों की मदद करते थे। 1987 में उन्होंने नेत्रहीन लोगों की आंखों में रोशनी पहुंचाने की मुहिम शुरू की। उन्होंने अपनी पत्नी जनक दुलारी के नाम से जेडी आई फाउंडेशन बनाया। इसमें मृत्यु के बाद आंखें दान करने के लिए लोगों को प्रेरित किया इसमें करीब 370 लोगों ने मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने के फार्म भरे। सबसे पहला फार्म खुद लक्ष्मी चंद ने भरा था।
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बुधवार सुबह 10 बजे उनकी शव यात्रा शुरू हुई। जिसमें व्यापारी, सर्व समाज, विभिन्न धार्मिक, सामाजिक संगठनों और स्कूल संगठनों के पदाधिकारियों समेत हजारों शहर वासी शामिल हुए। टंकी रोड स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार हुआ। बड़े बेटे राजकुमार संगल ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में विधायक तेजेंद्र निर्वाल, भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष हरवीर मलिक व्यापारी नेता घनश्याम दास गर्ग, जैन समाज के मोहित जैन, धीमान समाज के सुभाष धीमान, स्कूल संगठन के सूर्यवीर सिंह, रितेश गर्ग, विपिन कौशिक, भाजपा नगराध्यक्ष राकेश गर्ग, अरविंद दृष्टया, संजय बंसल, आशीष, मनोज, नंद किशोर मित्तल, हाजी हाशिम, मुशर्रफ अली आदि शामिल रहे।
बर्फ बेचकर बुलंदियों तक पहुंचाया
लक्ष्मीचंद संगल का परिवार शहर के प्रतिष्ठित परिवारों में एक है। परिजनों के अनुसार लक्ष्मी चंद की माली हालात पहले बहुत कमजोर थी। युवा अवस्था में उन्होंने ठेली लगाकर मूंगफली बेची। आइस फैक्टरी से बर्फ लाकर बेची। दिन रात पूरी मेहनत की। काम कुछ बढ़ा तो खुद की आइस फैक्टरी लगाई। बच्चों को भी पढ़ाया लिखाया। बड़े बेटे राजकुमार संगल सहारनपुर के कालेज में फिजिक्स केमेस्ट्री विभाग के एचओडी हैं। दूसरे नंबर के बेटे अरविंद नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन हैं जबकि छोटे बेटे श्रवण कुमार इंडोनेशिया में जिंदल स्टील ग्रुप में जीएम हैं। प्रवीण संगल की सोडा फैक्टरी और सबसे छोटे संजय संगल का खुद का शामली में व्यापार है।
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1987 में भर दिया था आंखें दान करने का फार्म
लक्ष्मीचंद बीमार और बेसहारा लोगों की मदद करते थे। 1987 में उन्होंने नेत्रहीन लोगों की आंखों में रोशनी पहुंचाने की मुहिम शुरू की। उन्होंने अपनी पत्नी जनक दुलारी के नाम से जेडी आई फाउंडेशन बनाया। इसमें मृत्यु के बाद आंखें दान करने के लिए लोगों को प्रेरित किया इसमें करीब 370 लोगों ने मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने के फार्म भरे। सबसे पहला फार्म खुद लक्ष्मी चंद ने भरा था।
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