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एनडी तिवारी को मानते थे राजनीतिक गुरु
Updated Sun, 04 Feb 2018 01:33 AM IST
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एनडी तिवारी को मानते थे गुरु
शामली। 40 साल तक कैराना क्षेत्र में राजनीति करने वाले हुकुम सिंह की राजनीतिज्ञ पकड़ बहुत मजबूत थी। वह पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। क्योंकि अपने राजनीति सफर के शुरुआती दौर में उन्होंने एनडी तिवारी के साथ कार्य किया था।
इसके अलावा केंद्रीय गृहराज्यमंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से भी उनकी नजदीकी रही थी। राजनीतिज्ञ में हुकुम सिंह का कद ही था कि भाजपा ने उन्हें विधानमंडल दल का उपनेता तक चुना था। इतना ही नहीं पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की समिति में भी हुुकुम सिंह को शामिल रखा गया था। विधानसभा की गतिविधियों में अच्छी जानकारी होने के कारण अन्य नेता उनसे सलाह लेते थे। खुद हुकुम सिंह बताते थे कि वह राजनीतिज्ञ में एनडी तिवारी से उन्होंने बहुत कुछ सीखा। सरल स्वभाव के साथ जनता की समस्याओं को उठाना और उनका निस्तारण कराना ही मकसद रहता था। वहीं, 2014 में सांसद चुने जाने के बाद जब केंद्र सरकार में उन्हें मंत्री पद नहीं मिला, तो स्पीकर की गैरमौजूदगी में लोकसभा स्पीकर के पैनल में भी जगह मिली। उन्होंने कई बार लोकसभा स्पीकर के रूप में कार्य किया।
किसानों के मुद्दे पर खुलकर बोलते थे
सांसद हुकुम सिंह किसानों की पीड़ा को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे। चाहे अपनी सरकार हो या फिर किसी दूसरे राजनीतिज्ञ दल की, वह हमेशा खुलकर बोलते थे। यही वजह है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद छह महीना पूर्व ही सांसद हुकुम सिंह ने संसद में बकाया गन्ना मूल्य भुगतान का मुद्दा उठाने में भी हिचक नहीं की।
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शामली। 40 साल तक कैराना क्षेत्र में राजनीति करने वाले हुकुम सिंह की राजनीतिज्ञ पकड़ बहुत मजबूत थी। वह पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। क्योंकि अपने राजनीति सफर के शुरुआती दौर में उन्होंने एनडी तिवारी के साथ कार्य किया था।
इसके अलावा केंद्रीय गृहराज्यमंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से भी उनकी नजदीकी रही थी। राजनीतिज्ञ में हुकुम सिंह का कद ही था कि भाजपा ने उन्हें विधानमंडल दल का उपनेता तक चुना था। इतना ही नहीं पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की समिति में भी हुुकुम सिंह को शामिल रखा गया था। विधानसभा की गतिविधियों में अच्छी जानकारी होने के कारण अन्य नेता उनसे सलाह लेते थे। खुद हुकुम सिंह बताते थे कि वह राजनीतिज्ञ में एनडी तिवारी से उन्होंने बहुत कुछ सीखा। सरल स्वभाव के साथ जनता की समस्याओं को उठाना और उनका निस्तारण कराना ही मकसद रहता था। वहीं, 2014 में सांसद चुने जाने के बाद जब केंद्र सरकार में उन्हें मंत्री पद नहीं मिला, तो स्पीकर की गैरमौजूदगी में लोकसभा स्पीकर के पैनल में भी जगह मिली। उन्होंने कई बार लोकसभा स्पीकर के रूप में कार्य किया।
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किसानों के मुद्दे पर खुलकर बोलते थे
सांसद हुकुम सिंह किसानों की पीड़ा को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे। चाहे अपनी सरकार हो या फिर किसी दूसरे राजनीतिज्ञ दल की, वह हमेशा खुलकर बोलते थे। यही वजह है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद छह महीना पूर्व ही सांसद हुकुम सिंह ने संसद में बकाया गन्ना मूल्य भुगतान का मुद्दा उठाने में भी हिचक नहीं की।
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