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संतो के दर्शन करने से मिलती है पापों से मुक्ति
Updated Tue, 12 Dec 2017 11:39 PM IST
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संतों के दर्शन करने से मिलती है पापों से मुक्ति
थानाभवन (शामली)। आश्रम पंचतीर्थी के प्रांगण में चल रहे तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम में महाराज देवाचार्य ने बताया कि संतों के दर्शन करने से ही पापों से मुक्ति मिल सकती है।
स्वामी अमरदेव जी महाराज की 26 वीं पुण्य स्मृति में आए हरिद्वार के जगतगुरु रामानंदचार्य स्वामी हंसा देवाचार्य ने बताया कि जिस किसी पर भी भगवान की कृपा रहती है, तो उसे सत्संग मिलता है। उन्होंने बताया कि संतों के दर्शन करने के बाद ही पापों से मुक्ति मिल सकती है। संतों के दर्शन के बाद हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम भविष्य में कभी पाप नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि जैसे हमें रामचरित्र मानस में भी बताया गया है कि प्रभु श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम थे। वैसे ही ब्रह्मलीन स्वामी अमरदेव भी मर्यादा पुरुषोत्तम संत थे। स्वामी अमरदेव जी ने हमें सिखाया कि सेवा करने से मनुष्य का अहंकार अभिमान नष्ट हो जाते हैं। यह जरूरी नहीं कि मंदिर में आकर भगवान की सेवा करो, गरीब लोगों की तथा माता पिता की सेवा ही भगवान की सच्ची सेवा है, जिससे भगवान अति प्रसन्न होते हैं। कार्यक्रम में स्वामी रामदेव ने कहा कि हमारा घर खुला विश्वविद्यालय है, जहां कोई दूसरा भी अध्यापक नहीं बल्कि हमारे माता पिता ही हमें सही और गलत के बारे में बताते हैं। हमें अपने माता पिता के बताए हुए मार्ग पर ही चलना चाहिए। कार्यक्रम में स्वामी रामबिहारी जी महाराज, स्वामी अरुण दास महाराज, कीमती लाल, शंकर दास किंडा, पवन आहूजा, मनोहर लाल दुआ, कवल किशोर ,गिरधर बोबी, गिरधर यशपाल नारंग, पंडित भारत भूषण शर्मा, पंडित बिहारी लाल, नरेश बजाज, मोहनलाल तनेजा, बिहारी बांगा, बिट्टू ,बांगा, पंकज चावला, गुलशन चावला, तरुण मिगलानी, गगन बांगा ,तरुण तनेजा, जुगल अनेजा, आशू चावला, सूजल आहूजा, बोधराज नारंग, सतीश चावला, प्रणव ,बहल आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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थानाभवन (शामली)। आश्रम पंचतीर्थी के प्रांगण में चल रहे तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम में महाराज देवाचार्य ने बताया कि संतों के दर्शन करने से ही पापों से मुक्ति मिल सकती है।
स्वामी अमरदेव जी महाराज की 26 वीं पुण्य स्मृति में आए हरिद्वार के जगतगुरु रामानंदचार्य स्वामी हंसा देवाचार्य ने बताया कि जिस किसी पर भी भगवान की कृपा रहती है, तो उसे सत्संग मिलता है। उन्होंने बताया कि संतों के दर्शन करने के बाद ही पापों से मुक्ति मिल सकती है। संतों के दर्शन के बाद हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम भविष्य में कभी पाप नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि जैसे हमें रामचरित्र मानस में भी बताया गया है कि प्रभु श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम थे। वैसे ही ब्रह्मलीन स्वामी अमरदेव भी मर्यादा पुरुषोत्तम संत थे। स्वामी अमरदेव जी ने हमें सिखाया कि सेवा करने से मनुष्य का अहंकार अभिमान नष्ट हो जाते हैं। यह जरूरी नहीं कि मंदिर में आकर भगवान की सेवा करो, गरीब लोगों की तथा माता पिता की सेवा ही भगवान की सच्ची सेवा है, जिससे भगवान अति प्रसन्न होते हैं। कार्यक्रम में स्वामी रामदेव ने कहा कि हमारा घर खुला विश्वविद्यालय है, जहां कोई दूसरा भी अध्यापक नहीं बल्कि हमारे माता पिता ही हमें सही और गलत के बारे में बताते हैं। हमें अपने माता पिता के बताए हुए मार्ग पर ही चलना चाहिए। कार्यक्रम में स्वामी रामबिहारी जी महाराज, स्वामी अरुण दास महाराज, कीमती लाल, शंकर दास किंडा, पवन आहूजा, मनोहर लाल दुआ, कवल किशोर ,गिरधर बोबी, गिरधर यशपाल नारंग, पंडित भारत भूषण शर्मा, पंडित बिहारी लाल, नरेश बजाज, मोहनलाल तनेजा, बिहारी बांगा, बिट्टू ,बांगा, पंकज चावला, गुलशन चावला, तरुण मिगलानी, गगन बांगा ,तरुण तनेजा, जुगल अनेजा, आशू चावला, सूजल आहूजा, बोधराज नारंग, सतीश चावला, प्रणव ,बहल आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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