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बगैर छात्रावास शुरू हुआ पॉलीटेक्निक कॉलेज, उपकरण और प्रवक्ता का अभाव

Sun, 18 Sep 2022 12:13 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 18 Sep 2022 12:13 AM IST
सार

कई छात्राएं निगोही, शाहजहांपुर में किराये पर रहती हैं। निर्माणदायी संस्था का मानना है कि दिसंबर तक बजट मिलने पर आगे निर्माण कार्य पूरा कराया जाएगा।छात्रावास का निर्माण अधूरा कॉलेज में 120 छात्राओं के लिए दो छात्रावास प्रस्तावित हैं जिनकी बस नींव ही पड़ी है। परिवहन का संकट, सांप-बिच्छू व जंगली जानवरों का भयनिगोही से करीब पांच किमी दूर पॉलीटेक्निक में रखरखाव के अभाव के कारण बड़ी झाड़ियां खड़ी हैं।

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Women's polytechnic started in deserted area without hostel

विस्तार

निगोही। करीब 11 साल बाद भी जहानपुर गांव के पास निर्जन क्षेत्र में बने राजकीय महिला पॉलीटेक्निक का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। इस साल यहां 152 छात्राएं विभिन्न ट्रेड में पढ़ाई कर रही हैं लेकिन छात्रावास से लेकर आवागमन की बेहतर सुविधा का अभाव है। कई छात्राएं निगोही, शाहजहांपुर में किराये पर रहती हैं। वर्कशॉप में उपकरण नहीं हैं तो मैकेनिकल ट्रेड में प्रवक्ता नहीं हैं।
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बसपा सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से जहानपुर गांव के पास महिला पॉलीटेक्निक स्वीकृत हुआ था। 17 करोड़ 37 लाख रुपये लागत से कार्यदायी संस्था उप्र राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड द्वारा निर्माण शुरू किया गया। वर्ष 2011 में एक करोड़, 2012 में तीन करोड़, 2016 में 2.45 करोड़, 2017 में 1.85 करोड़ रुपये संस्था को मिले थे। फर्नीचर और वर्कशॉप उपकरणों के लिए चार करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। 2017 तक निर्माण कार्य चला। इस दौरान बिल्डिंग, स्टाफ भवन का निर्माण कराया गया। बजट के अभाव में अभी कोई काम पूरा नहीं हो सका है। 20 जुलाई 2022 से शिक्षा सत्र शुरू कर दिया गया है। मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान ट्रेड में 152 छात्राएं पंजीकृत हैं। समय के साथ बिल्डिंग मैटेरियल की कीमतें बढ़ने के कारण अधूरे कार्य पूरे कराने के लिए पांच करोड़ रुपये की आवश्यकता है। निर्माणदायी संस्था का मानना है कि दिसंबर तक बजट मिलने पर आगे निर्माण कार्य पूरा कराया जाएगा।
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छात्रावास का निर्माण अधूरा
कॉलेज में 120 छात्राओं के लिए दो छात्रावास प्रस्तावित हैं जिनकी बस नींव ही पड़ी है। कॉलेज में गोरखपुर, लखनऊ, हरदोई, बरेली, पीलीभीत, पूरनपुर और शाहजहांपुर की रहने वाली छात्राएं पढ़ती हैं। इनमें कुछ छात्राएं शाहजहांपुर तो कुछ निगोही में किराये पर रहती हैं। छात्राओं ने बताया कि शाहजहांपुर से रोज आने-जाने में सौ रुपये खर्च होने के साथ ही तीन-चार घंटे का समय लग जाता है। छात्राओं के मुताबिक शाहजहांपुर में चार हजार रुपये और निगोही में दो हजार रुपये किराये पर कमरा लेकर रहते हैं। यहां ओवरहेड टैंक का निर्माण किया गया है लेकिन विद्युत कनेक्शन न होने से जलापूर्ति नहीं होती। कॉलेज में लगे सबमर्सिबल से पेयजल उपलब्ध होता है।
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परिवहन का संकट, सांप-बिच्छू व जंगली जानवरों का भय
निगोही से करीब पांच किमी दूर पॉलीटेक्निक में रखरखाव के अभाव के कारण बड़ी झाड़ियां खड़ी हैं। छात्राओं का कहना है कि सुनसान क्षेत्र होने से जंगली जानवरों का भय बना रहता है। यह कब अंदर आ जाएं, कहा नहीं जा सकता। कक्षाएं सुबह दस से शाम पांच बजे तक यहां आती-जाती हैं। डग्गामार वाहनों से आना-जाना मजबूरी है। विधायक सलोना कुशवाहा के प्रयास से एक ई-बस कॉलेज तक जरूर आ जाती है। सर्दी के मौसम में शाम जल्द गहराने से छात्राओं की सुरक्षा पर भी संकट हो सकता है। फिलहाल यहां आठ सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। उनके रुकने के लिए आवास नहीं बन सका है। अस्थायी आवास की स्थिति जर्जर है।
मैकेनिकल ट्रेड के लिए प्रवक्ता, लैब को उपकरण नहीं
कॉलेज में मैकेनिकल ट्रेड के लिए किसी प्रवक्ता की नियुक्ति नहीं की गई है। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में प्रवक्ता निकिता गुप्ता और प्रीति वर्मा हैं। कंप्यूटर विज्ञान में प्रवक्ता सुमित गुप्ता, अरविंद कुमार, पूनम देवी और पूनम गंगवार हैं। हर ट्रेड के लिए छह प्रवक्ताओं का मानक है। प्राचार्य और तीन अन्य स्टाफ भवन अधूरे पड़े हैं। प्रयोगात्मक के लिए वर्कशॉप अभी नहीं बनाया जा सका है। लैब के उपकरण भी नहीं मिले हैं।
12 सितंबर को हुई विभागीय बैठक में अधूरे कार्यों के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं। पांच करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया जाएगा। उम्मीद है कि दिसंबर तक रुपये आने के बाद निर्माण कार्य फिर से शुरू कर दिया जाएगा। - अनिल कुमार पांडेय, एक्सईएन, उप्र राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड

फर्नीचर के लिए चार करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। फर्नीचर आ चुका है लेकिन लैब के उपकरण नहीं मिले हैं। कुछ समस्याएं हैं लेकिन उम्मीद है कि जल्द इनका हल निकल जाएगा।- संतोष कुमार, प्राचार्य
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