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Shahjahanpur News: एबीसी सेंटर में घुसा पानी...कुत्तों को छोड़कर स्टाफ नदारद
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शाहजहांपुर में एबीसी सेंटर में भरा पानी। संवाद
शाहजहांपुर। अजीजगंज में नगर निगम की ओर से बनाए गए एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर में गर्रा नदी का पानी पहुंचने से कुत्तों की नसबंदी का काम बंद हो गया है। सेंटर के अंदर करीब 15 से 20 कुत्ते तो बंद हैं लेकिन उनकी देखभाल के लिए कर्मचारी नदारद हैं।
नगर निगम ने औरैया की एक एजेंसी को कुत्तों की नसबंदी का ठेका दिया है। एजेंसी को प्रत्येक कुत्ते की नसबंदी के एवज में नगर निगम की ओर से 980 रुपये का भुगतान किया जाता है। इस राशि में कुत्तों को पकड़ने से लेकर नसबंदी करने, तीन से चार दिन तक सेंटर में रखने, दवा और खाने-पीने की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी एजेंसी की होती है।
नसबंदी के बाद दो-तीन दिन में कुत्तों के स्वस्थ होने पर उन्हें उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है। बुधवार दोपहर करीब ढाई बजे अजीजगंज स्थित एबीसी सेंटर का परिसर में पानी भरा हुआ था। मुख्य गेट खुला हुआ था। अंदर पहुंचने पर ओटी समेत अन्य कमरों के दरवाजे खुले हुए थे लेकिन कोई कर्मचारी नहीं था। अंदर बने बैरक में 15 से 20 कुत्ते भूखे-प्यासे भौंक रहे थे। करीब 20 मिनट रुकने बाद भी एबीसी सेंटर में कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा।
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नगर निगम की जिम्मेदारी पर सवाल
नसबंदी के लिए एजेंसी को भुगतान किए जाने के बावजूद बाढ़ की स्थिति में सेंटर में बंद कुत्तों की देखभाल की व्यवस्था नहीं होने से नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। बाढ़ का पानी पहुंचने के बाद कुत्तों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने या उनके लिए भोजन-पानी की व्यवस्था करने के संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से क्या कदम उठाए गए, यह भी सवाल बना हुआ है। नगर निगम के नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज मिश्र ने बताया कि वह सुबह सेंटर में गए थे। वहां उपस्थित स्टाफ को पानी बढ़ने पर कुत्तों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए कहा था। दोपहर में सेंटर पर कोई कर्मचारी नहीं था तो एजेंसी संचालक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जाएगा।
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एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर में पर्याप्त स्टाफ है। दरवाजा खुले होने के बाद भी अगर वहां कोई स्टाफ नहीं था तो सेंटर में लगे सीसी कैमरों से स्थिति दिखवाई जाएगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- सौम्या गुरुरानी, नगर आयुक्त
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नगर निगम ने औरैया की एक एजेंसी को कुत्तों की नसबंदी का ठेका दिया है। एजेंसी को प्रत्येक कुत्ते की नसबंदी के एवज में नगर निगम की ओर से 980 रुपये का भुगतान किया जाता है। इस राशि में कुत्तों को पकड़ने से लेकर नसबंदी करने, तीन से चार दिन तक सेंटर में रखने, दवा और खाने-पीने की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी एजेंसी की होती है।
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नसबंदी के बाद दो-तीन दिन में कुत्तों के स्वस्थ होने पर उन्हें उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है। बुधवार दोपहर करीब ढाई बजे अजीजगंज स्थित एबीसी सेंटर का परिसर में पानी भरा हुआ था। मुख्य गेट खुला हुआ था। अंदर पहुंचने पर ओटी समेत अन्य कमरों के दरवाजे खुले हुए थे लेकिन कोई कर्मचारी नहीं था। अंदर बने बैरक में 15 से 20 कुत्ते भूखे-प्यासे भौंक रहे थे। करीब 20 मिनट रुकने बाद भी एबीसी सेंटर में कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा।
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नगर निगम की जिम्मेदारी पर सवाल
नसबंदी के लिए एजेंसी को भुगतान किए जाने के बावजूद बाढ़ की स्थिति में सेंटर में बंद कुत्तों की देखभाल की व्यवस्था नहीं होने से नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। बाढ़ का पानी पहुंचने के बाद कुत्तों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने या उनके लिए भोजन-पानी की व्यवस्था करने के संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से क्या कदम उठाए गए, यह भी सवाल बना हुआ है। नगर निगम के नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज मिश्र ने बताया कि वह सुबह सेंटर में गए थे। वहां उपस्थित स्टाफ को पानी बढ़ने पर कुत्तों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए कहा था। दोपहर में सेंटर पर कोई कर्मचारी नहीं था तो एजेंसी संचालक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जाएगा।
एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर में पर्याप्त स्टाफ है। दरवाजा खुले होने के बाद भी अगर वहां कोई स्टाफ नहीं था तो सेंटर में लगे सीसी कैमरों से स्थिति दिखवाई जाएगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- सौम्या गुरुरानी, नगर आयुक्त